Chandigarh Roundabout Auction: चंडीगढ़ में राउंडअबाउट का रखरखाव करने वाली कंपनियों और एजेंसियों को अब विज्ञापन लगाने के बदले मुफ्त सुविधा नहीं मिलेगी। नगर निगम ने शहर के 35 राउंडअबाउट को लाइसेंस फीस के आधार पर आवंटित करने के लिए रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (आरएफपी) जारी कर दिया है। इच्छुक कंपनियां 23 अक्टूबर तक आवेदन कर सकती हैं। निगम को इस प्रक्रिया से 8 करोड़ रुपये से अधिक राजस्व मिलने की उम्मीद है।
अब तक कंपनियों को राउंडअबाउट की देखभाल करने के बदले वहां विज्ञापन प्रदर्शित करने की अनुमति दी जाती थी। नई व्यवस्था में एजेंसियों को लाइसेंस फीस की पेशकश करनी होगी। जिस कंपनी की बोली किसी राउंडअबाउट के लिए सबसे अधिक होगी, उसे उसका आवंटन किया जाएगा। कंपनियां एक या एक से अधिक राउंडअबाउट के लिए बोली लगा सकती हैं। इस बदलाव से नगर निगम को शहर की सड़कों और चौराहों के रखरखाव के साथ राजस्व बढ़ाने का मौका मिलेगा। वहीं, आवंटन पाने वाली एजेंसियों को हरियाली, सफाई और अन्य निर्धारित जिम्मेदारियां पूरी करनी होंगी।
दो साल के लिए मिलेगा राउंडअबाउट का आवंटन
नगर निगम की आरएफपी शर्तों के अनुसार, राउंडअबाउट का आवंटन शुरुआती तौर पर दो साल के लिए किया जाएगा। इसके बाद संबंधित एजेंसी के कामकाज और निगम की शर्तों के आधार पर अवधि एक साल बढ़ाने पर विचार किया जा सकता है। आवंटन पाने वाली कंपनी राउंडअबाउट के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी किसी दूसरी एजेंसी को सबलेट नहीं कर सकेगी। उसे अपने स्तर पर कर्मचारियों, वाहनों, उपकरणों और अन्य जरूरी संसाधनों की व्यवस्था करनी होगी। विज्ञापन बोर्ड पर विज्ञापन प्रदर्शित करने के लिए भी एक ही इकाई या एजेंसी की शर्त रखी गई है। इस व्यवस्था के तहत एजेंसी को केवल विज्ञापन लगाने का अधिकार नहीं मिलेगा, बल्कि राउंडअबाउट की नियमित देखभाल भी करनी होगी। तय शर्तों का पालन नहीं करने पर संबंधित कंपनी पर जुर्माना लगाया जा सकता है।
फूल-पौधों की देखभाल नहीं की तो 2,000 रुपये जुर्माना
आरएफपी में राउंडअबाउट की हरियाली और सफाई बनाए रखने के लिए जिम्मेदारियां तय की गई हैं। संबंधित एजेंसी को मौसमी फूल-पौधे लगाने, हरित क्षेत्र की देखभाल करने, नियमित रूप से पानी देने और कचरे को उठाकर उसका उचित निपटान करने की व्यवस्था करनी होगी। मौसमी फूल-पौधे नहीं लगाने या हरित क्षेत्र में जरूरत के मुताबिक पानी नहीं देने पर प्रति राउंडअबाउट 2,000 रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है। वहीं, कचरा नहीं उठाने और उसका निपटान नहीं करने पर प्रति राउंडअबाउट 10,000 रुपये का जुर्माना निर्धारित किया गया है।
परफॉर्मेंस बैंक गारंटी जमा कराने और अनुबंध पर हस्ताक्षर करने में देरी होने पर भी जुर्माने का प्रावधान रखा गया है। ऐसी स्थिति में देरी के प्रत्येक दिन के हिसाब से जुर्माना लगाया जा सकता है। इससे एजेंसियों को समय पर औपचारिकताएं पूरी करने और रखरखाव की शर्तों का पालन करने की जिम्मेदारी निभानी होगी। नगर निगम ने आरएफपी में राउंडअबाउट को बड़े, मध्यम और छोटे वर्गों में बांटा है। इनमें चंडीगढ़ के अलग-अलग सेक्टरों और प्रमुख सड़कों के राउंडअबाउट शामिल हैं। आवंटन की प्रक्रिया में कंपनियां अपनी क्षमता और प्रस्तावित लाइसेंस फीस के आधार पर एक या एक से अधिक राउंडअबाउट के लिए बोली लगा सकती हैं।
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मध्यम राउंडअबाउट में ये स्थान शामिल
मध्यम श्रेणी में सेक्टर-2, 3, 10 और 11 के राउंडअबाउट शामिल हैं। इसके अलावा सेक्टर-41 और 42 में फिश मार्केट के पास, सेक्टर-37 से 39 की वी-4 रोड, सेक्टर-11 और 22 की वी-4 रोड तथा सदर बाजार के पास के राउंडअबाउट भी सूची में हैं। इस श्रेणी में सेक्टर-18 और 19सी की वी-4 रोड पर पेशावरी के पास, सेक्टर-19ए और 19डी में पुलिस स्टेशन के पास, शिवालिक गार्डन और मनीमाजरा के राउंडअबाउट भी शामिल हैं। वहीं, सेक्टर-16ए, 16बी, 16सी और 15 की वी-4 रोड, सेक्टर-10ए, 10बी, 10सी और 10डी की वी-3 रोड तथा सेक्टर-16बी/16सी और 23ए/23बी के राउंडअबाउट भी आवंटन की तैयारी में हैं। नगर निगम की इस प्रक्रिया में अब कंपनियों को विज्ञापन के अवसर के साथ लाइसेंस फीस भी देनी होगी। दूसरी ओर, शहरवासियों के लिए इसका असर इस बात पर निर्भर करेगा कि आवंटन के बाद एजेंसियां हरियाली, सफाई और रखरखाव की जिम्मेदारियों को कितनी नियमितता से निभाती हैं।

