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Frog Wedding: छत्तीसगढ़ में सूखे का डर, कार्ड बांटकर रचाई मेंढक-मेंढकी की शादी, अब मौसम विभाग ने दी बड़ी खुशखबरी

Frog Wedding: छत्तीसगढ़ में सूखे का डर, कार्ड बांटकर रचाई मेंढक-मेंढकी की शादी, अब मौसम विभाग ने दी बड़ी खुशखबरी

सामान्य से 17% कम बरसे बदरा; सारंगढ़ में सबसे ज्यादा तो सरगुजा में सूखा, जानिए अपने जिले का हाल

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AAmandeep Singh

Frog Wedding: भारत के ग्रामीण अंचलों में लोक मान्यताएं और सदियों पुरानी परंपराएं आज भी कितनी गहरी हैं, इसका एक अनूठा उदाहरण छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में देखने को मिला। प्रतापपुर विकासखंड के खूंशी गांव में इस बार सावन के महीने में भी मनमुताबिक पानी नहीं बरसा, जिससे किसान सूखे को लेकर फिक्रमंद हो उठे।

इस आफत से निपटने के लिए ग्रामीणों ने एक प्राचीन टोटके का सहारा लिया और पूरे रीति-रिवाज के साथ मेंढक और मेंढकी का ब्याह रचा डाला। यह कोई आनन-फानन में की गई औपचारिकता नहीं थी, बल्कि बाकायदा आसपास के गांवों में शादी के कार्ड बांटे गए थे। गुरुवार को जब बैंड-बाजे की धुन और पारंपरिक लोक गीतों के बीच बारात निकली, तो पूरा इलाका इस अनूठे जश्न का गवाह बना। इसके बाद पंडित ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ दोनों के फेरे करवाए।

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पुरखों की परंपरा पर अटूट विश्वास, शादी के बाद हुआ सामूहिक भंडारा

इस अनोखे आयोजन की कमान संभाल रहे आयोजन समिति के सदस्य रामनाथ सिंह ने बताया कि यह परंपरा नई नहीं है, बल्कि जब भी इलाके में अकाल या सूखे के आसार बनते हैं, तब पुरखों के जमाने से यह रीत निभाई जाती रही है। ग्रामीणों का ऐसा अटूट विश्वास है कि मेंढक-मेंढकी के इस मिलन से वर्षा के देवता इंद्रदेव पिघल जाते हैं और झमाझम बारिश होती है।

शादी की रस्में मुकम्मल होने के बाद भगवान की विशेष आरती उतारी गई और पूरे क्षेत्र की खुशहाली के लिए एक बड़े सामूहिक भोज यानी भंडारे का आयोजन हुआ, जिसमें सैकड़ों ग्रामीणों ने प्रसाद ग्रहण किया।

सूबे में मानसून की दूसरी पारी शुरू, मौसम विभाग ने दी बड़ी राहत

दिलचस्प बात यह है कि इस पारंपरिक शादी के तुरंत बाद मौसम विभाग ने भी किसानों के चेहरों पर मुस्कान बिखेर दी है। बीते तीन-चार दिनों से सुस्त पड़ा मानसून छत्तीसगढ़ में एक बार फिर पूरी तरह एक्टिव हो गया है। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, अगले चार दिनों तक प्रदेश के कई हिस्सों में गरज-चमक के साथ अच्छी बारिश होने के आसार हैं।

हालांकि, आंकड़ों पर नजर डालें तो 1 जून से लेकर अब तक राज्य में उम्मीद से कम बादल बरसे हैं। इस अवधि में जहां सामान्य तौर पर 286.7 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए थी, वहां महज 239.2 मिलीमीटर दर्ज की गई है, जो सामान्य से करीब 17 फीसदी कम है। पूरे प्रदेश में अब तक सबसे ज्यादा पानी सारंगढ़ में गिरा है, जबकि सरगुजा जिला बूंद-बूंद को तरस रहा है।

रायपुर समेत कई जिलों में दोबारा जलभराव का खतरा

मौसम केंद्र रायपुर के अनुसार, राजधानी में अधिकतम तापमान 31 डिग्री और न्यूनतम 25 डिग्री सेल्सियस के आसपास बने रहने की संभावना है, जबकि आसमान में काले बादलों का डेरा रहेगा। इससे पहले जुलाई के शुरुआती दिनों में हुई मूसलाधार बारिश ने रायपुर, दुर्ग, भिलाई, धमतरी और गरियाबंद के निचले इलाकों को जलमग्न कर दिया था, जिससे कई नदियां और नाले उफान पर आ गए थे।

कई रिहायशी इलाकों में तो अब तक जलभराव की स्थिति पूरी तरह सुधर भी नहीं पाई है। ऐसे में मौसम विभाग ने चेतावनी जारी की है कि अगर अगले चार दिनों तक रुक-रुक कर भारी बारिश का यह नया दौर जारी रहा, तो शहरी इलाकों में बाढ़ जैसे हालात दोबारा पैदा हो सकते हैं।

यह भी पढ़ें– Wedding Trends: दक्षिण कोरिया में शादी के मंडप के पास ही मेहमानों के लिए लगाई गई एटीएम मशीन

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