Breaking News
Narnaul News: त्योहारी सीजन में खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई तेज, आठ मिठाइयों के नमूने लिए1 November Rashifal: नवंबर के पहले दिन कर्क राशि में बनेगा महाधन योग, जानिए सभी 12 राशियों का भविष्यफलPanipat Factory Fire: पानीपत में फिर दहला औद्योगिक इलाक, बलाना गांव की कंबल फैक्ट्री में लगी भीषण आगGurugram Car Stunt: गुरुग्राम में क्रेटा सवार युवकों का खौफनाक हुड़दंग, सनरूफ से बाहर निकलकर मचाया उत्पात, महिला-बच्चों से बदतमीजीNarnaul News: 19 व 20 नंवबर को आयोजित होगा जिला युवा महोत्सव, ‘नशा मुक्त युवा-विकसित भारत’ रखी गई थीमNarnaul News: त्योहारी सीजन में खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई तेज, आठ मिठाइयों के नमूने लिए1 November Rashifal: नवंबर के पहले दिन कर्क राशि में बनेगा महाधन योग, जानिए सभी 12 राशियों का भविष्यफलPanipat Factory Fire: पानीपत में फिर दहला औद्योगिक इलाक, बलाना गांव की कंबल फैक्ट्री में लगी भीषण आगGurugram Car Stunt: गुरुग्राम में क्रेटा सवार युवकों का खौफनाक हुड़दंग, सनरूफ से बाहर निकलकर मचाया उत्पात, महिला-बच्चों से बदतमीजीNarnaul News: 19 व 20 नंवबर को आयोजित होगा जिला युवा महोत्सव, ‘नशा मुक्त युवा-विकसित भारत’ रखी गई थीम

Corporate Life Reality: 9 से 5 की नौकरी को बेकार समझने वाले जरूर देखें यह वीडियो, मिलते हैं जीवन के ये 5 बड़े सबक

Corporate Life Reality: 9 से 5 की नौकरी को बेकार समझने वाले जरूर देखें यह वीडियो, मिलते हैं जीवन के ये 5 बड़े सबक

सिर्फ बैंक बैलेंस ही नहीं, आपकी 9 टू 5 जॉब आपको सिखाती है धैर्य और समय की असली कीमत

AI Quick Summary

Want to save time? Let our AI read the article and give you 3 quick bullet points.

Listen to this article
AUDIO VERSION
AAmandeep Singh

Corporate Life Reality: आजकल इंस्टाग्राम रील्स और एक्स (पहले ट्विटर) पर नजर डालें, तो कॉर्पोरेट लाइफ और ‘9 टू 5’ की रूटीन जॉब को लेकर युवाओं में एक अजीब सा असंतोष और झुंझलाहट दिखाई देती है। कोई ऑफिस के काम के दबाव से परेशान है, तो कोई रोज-रोज के सफर से थक चुका है। कई लोग तो यहां तक दावा करते हैं कि यह नौकरी उनकी आजादी छीन लेती है।

लेकिन सिक्के का दूसरा पहलू यह भी है कि अगर हर चीज को सिर्फ नकारात्मक नजरिए से देखा जाएगा, तो उसके छिपे हुए फायदे कभी नजर नहीं आएंगे। इसी विषय पर मशहूर डिजिटल इन्फ्लुएंसर दिव्यम बत्रा का एक वीडियो सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींच रहा है, जिसमें उन्होंने समझाया है कि कैसे एक साधारण नौकरी इंसान के व्यक्तित्व को तराशने का काम करती है।

विज्ञापन

1. कोई भी काम छोटा नहीं होता, विषम परिस्थितियों में धैर्य रखना ही असली सीख

दिव्यम बत्रा ने अपने करियर की शुरुआत के दिनों को याद करते हुए बताया कि उन्होंने एक बीपीओ (BPO) में कॉल सेंटर एग्जीक्यूटिव के तौर पर काम शुरू किया था। उस दौरान उन्हें रोजाना करीब 200 फोन कॉल्स अटेंड करनी पड़ती थीं।

कई बार कॉल करने वाले लोग बिना किसी वजह के अपना गुस्सा उन पर उतारते थे, बदतमीजी करते थे और अपशब्द तक बोल देते थे। ऐसे माहौल में किसी भी आम इंसान का आपा खोना स्वाभाविक है। लेकिन इसी कठिन दौर ने उन्हें सिखाया कि हर ईंट का जवाब पत्थर से देना समझदारी नहीं है। विपरीत परिस्थितियों में भी खुद को शांत रखना, अपनी भावनाओं पर नियंत्रण पाना और पेशेवर तरीके से काम करना एक बहुत बड़ी कला है, जो आगे चलकर जीवन के हर मोड़ पर काम आती है।

2. रोज का संघर्ष ही बनता है मानसिक मजबूती का आधार

शुरुआती दिनों में सुबह अलार्म बजते ही उठना, समय पर दफ्तर के लिए भागना, घंटों कंप्यूटर स्क्रीन के सामने बैठना और फिर शाम को पूरी तरह थककर घर लौटना किसी सजा जैसा लगता है। लेकिन जब यह प्रक्रिया रोज की दिनचर्या बन जाती है, तो हमारा शरीर और दिमाग इसके अभ्यस्त हो जाते हैं।

नियमित रूप से किया जाने वाला यह संघर्ष धीरे-धीरे इंसान की सहनशक्ति को बढ़ा देता है। जो काम पहले पहाड़ जैसा लगता था, वह कुछ महीनों बाद बेहद सामान्य लगने लगता है। यह रूटीन व्यक्ति की मानसिक मजबूती को इस कदर बढ़ा देता है कि वह जीवन में आने वाले किसी भी बड़े उतार-चढ़ाव का सामना करने के लिए तैयार हो जाता है।

3. समय का सही नियोजन और पैसों की असली कीमत का एहसास

जब दिन के 8 से 10 घंटे दफ्तर की फाइलों और बैठकों के नाम हो जाते हैं, तब इंसान को वक्त की असली कीमत समझ में आती है। एक कामकाजी व्यक्ति बहुत जल्द यह सीख जाता है कि बचे हुए चंद घंटों का इस्तेमाल कैसे किया जाए—कब परिवार को समय देना है, कब आराम करना है और कब अपने शौक पूरे करने हैं।

इसके साथ ही, जब महीने भर की हाड़-तोड़ मेहनत के बाद पहली सैलरी बैंक खाते में क्रेडिट होती है, तब रुपये की असली वैल्यू समझ आती है। खुद पैसे कमाने के बाद इंसान फिजूलखर्ची करने से पहले कई बार सोचता है, जिससे उसमें बचत करने की आदत और आर्थिक जिम्मेदारी की समझ विकसित होती है।

4. बातचीत की कला: डिग्रियों से इतर सबसे बड़ी व्यावहारिक स्किल

मौजूदा दौर में युवा अक्सर नई-नई तकनीकी डिग्रियां और कोडिंग जैसी स्किल्स सीखने पर लाखों रुपये खर्च कर देते हैं, लेकिन अगर उन्हें अपनी बात सही ढंग से दूसरों के सामने रखनी नहीं आती, तो सारी मेहनत बेकार चली जाती है। दफ्तर का माहौल आपको अलग-अलग मिजाज के लोगों के साथ तालमेल बिठाना सिखाता है।

कभी आपको अपनी टीम को साथ लेकर चलना होता है, कभी किसी गुस्से से लाल-पीले हो रहे क्लाइंट को समझाना होता है, तो कभी अपने बॉस के सामने अपनी बात मजबूती से रखनी होती है। ये रोजमर्रा के अनुभव व्यक्ति की ‘कम्युनिकेशन स्किल’ को इतना मजबूत कर देते हैं कि वह सामाजिक जीवन में भी हर रिश्ते को बखूबी संभाल लेता है।

यह भी पढ़ें– Unique Love Story: 22 साल के लड़के को 72 की बुजुर्ग महिला से हुआ प्यार, मियामी में शादी कर सबको चौंकाया

ख़बर पसंद आई? शेयर करें
विज्ञापन

ट्रेंडिंग की और ख़बरें

ताज़ा ख़बरें सीधे अपने ईमेल पर

जगमार्ग न्यूज़ की बड़ी ख़बरें रोज़ अपने इनबॉक्स में पाएं। मुफ़्त, कभी भी अनसब्सक्राइब करें।