Delhi Building Collapse: सत्य निकेतन में गिरी 5 मंजिला छात्र PG की इमारत, मलबे में फंसे कई छात्र

सत्य निकेतन में गिरी 6 मंजिला छात्र PG की इमारत, मलबे में फंसे कई छात्र
Delhi Building Collapse: देश की राजधानी दिल्ली का सत्य निकेतन इलाका—जो अपनी चहल-पहल, कैफे और हजारों छात्रों की मौजूदगी के लिए जाना जाता है—रविवार दोपहर अचानक चीख-पुकार और धूल के गुबार से भर गया।
दोपहर करीब 1:30 बजे यहां ‘हॉस्टल डेज’ नाम की एक पांच-छह मंजिला बॉयज पीजी इमारत अचानक जमींदोज हो गई। इमारत गिरते ही उसके बगल में स्थित एक अन्य ढांचा भी उसकी चपेट में आकर ढह गया। इस भयावह हादसे के वक्त कई छात्र अपने-अपने कमरों में मौजूद थे, जो देखते ही देखते मलबे के ढेर में तब्दील हो गए।
संकरी गलियां बनीं रेस्क्यू में रोड़ा, स्थानीय लोगों ने हथौड़ों से हटाया मलबा
हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस, फायर ब्रिगेड और एनडीआरएफ (NDRF) की गाड़ियां मौके पर पहुंच गईं। हालांकि, सत्य निकेतन की गलियां बेहद संकरी होने के कारण भारी मशीनरी और बुलडोजर को मौके तक पहुंचने में खासी मशक्कत करनी पड़ी।
प्रशासन की गाड़ियां पहुंचने से पहले ही स्थानीय निवासियों ने मिसाल पेश करते हुए मोर्चा संभाला। लोगों ने हाथों, हथौड़ों और सब्बलों की मदद से एक-एक ईंट हटाकर मलबे में फंसे छात्रों को निकालना शुरू किया। मलबे के नीचे खड़े कई दोपहिया वाहन भी पूरी तरह चकनाचूर हो गए हैं।
10-15 छात्रों को निकाला गया बाहर, मौतों की पुष्टि नहीं
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) के अध्यक्ष आर्यन मान ने घटनास्थल पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने बताया, “एनडीआरएफ की टीमें पूरी ताकत से रेस्क्यू में जुटी हैं। अब तक करीब 10 से 15 छात्रों को मलबे से सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है। कुछ छात्र अंदर फंसे हुए हैं जिनसे संपर्क साधने की कोशिश जारी है। मुख्यमंत्री से भी बात की गई है। राहत की बात यह है कि अभी तक किसी की जान जाने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।”
वहीं मौके पर पहुंचे स्थानीय भाजपा विधायक अनिल शर्मा ने घटना पर गहरा दुख जताते हुए कहा कि दूर-दराज के राज्यों से छात्र यहां पढ़ाई करने आते हैं। अंदर कितने छात्र दबे हैं, इसका सटीक आंकड़ा पीजी के रजिस्ट्रेशन रिकॉर्ड की जांच के बाद ही साफ हो पाएगा।
इमारत गिरने की 4 संभावित वजहें आ रहीं सामने
हादसे के बाद इलाके में दहशत का माहौल है और एहतियात के तौर पर आसपास की सभी इमारतों को खाली करा लिया गया है। शुरुआती जानकारियों और चश्मदीदों के बयानों के आधार पर हादसे के पीछे मुख्य रूप से चार कारण माने जा रहे हैं:
बेसमेंट की खुदाई: बताया जा रहा है कि इमारत के नीचे बेसमेंट बनाने के लिए खुदाई का काम चल रहा था, जिससे नींव कमजोर हो गई।
कमजोर पिलर: चश्मदीदों का कहना है कि निचले हिस्से के पिलर पूरी तरह से इमारत का वजन सहने में सक्षम नहीं थे।
अवैध निर्माण व फेरबदल: मूल ढांचे से छेड़छाड़ कर अतिरिक्त कमरे या बेसमेंट बनाने की कोशिश ने इमारत को असुरक्षित बना दिया।
जर्जर ढांचा: बेसमेंट के काम के दौरान पड़े अतिरिक्त दबाव को पुरानी नींव बर्दाश्त नहीं कर सकी और पूरी इमारत ढह गई।
दिल्ली यूनिवर्सिटी के श्री वेंकटेश्वर, आर्यभट्ट, मोतीलाल नेहरू और मैत्रेयी कॉलेज के बिल्कुल समीप होने के कारण सत्य निकेतन में हजारों की संख्या में छात्र किराए पर रहते हैं। इस हादसे ने एक बार फिर दिल्ली के छात्र इलाकों में धड़ल्ले से चल रहे अवैध निर्माणों और असुरक्षित पीजी इमारतों की सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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