प्रशासनिक कार्यशैली के खिलाफ जिला प्रमुख के नेतृत्व में जिला परिषदों ने किया बैठक का बहिष्कार

Narnaul News: नारनौल में आज जिला परिषद की प्रस्तावित बैठक का जिला परिषद के सदस्यों ने सामूहिक रूप से बहिष्कार कर दिया। जिला परिषद के कुल 19 पार्षदों में से 17 बैठक में पहुंचे, लेकिन सभी ने बैठक का बहिष्कार करते हुए प्रशासन के खिलाफ जमकर नाराजगी जताई। बहिष्कार में जिला प्रमुख राकेश कुमार भी शामिल रहे।
बैठक का बहिष्कार करने वाले पार्षदों का आरोप था कि जिले में विकास कार्य पूरी तरह ठप पड़े हैं और प्रशासन की उदासीनता के कारण जनहित के कार्य समय पर नहीं हो पा रहे हैं। पार्षदों ने कहा कि पिछली बैठक के बाद भी अधिकांश प्रस्तावों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। उनके अनुसार करीब 300 प्रस्ताव लंबित हैं, जिनकी अनुमानित लागत 50 से 60 करोड़ रुपये है।
दो साल से बिल लंबित
पार्षदों ने आरोप लगाया कि दो-दो साल से विकास कार्यों के बिल लंबित पड़े हैं और जनवरी के बाद से कोई नया कार्य स्वीकृत नहीं किया गया। उनका कहना था कि पिछले छह महीनों में एक भी नया विकास कार्य शुरू नहीं हो सका है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों का विकास प्रभावित हो रहा है।
लंबे समय नहीं टिकते अधिकारी
प्रदर्शन कर रहे पार्षदों ने प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप था कि जिला स्तर पर अधिकारी लंबे समय तक नहीं टिकते और बैठकों में भी उपस्थित नहीं होते। आज सोमवार की बैठक में भी अधिकांश विभागों के अधिकारी अनुपस्थित रहे। पार्षदों ने इसे प्रशासन की गंभीर लापरवाही बताते हुए कहा कि अधिकारियों की मंशा विकास कार्य कराने की नहीं है।
जानबूझकर हो रही कार्यों में देरी
पार्षदों ने आरोप लगाया कि जानबूझकर कार्यों में देरी की जा रही है ताकि आचार संहिता लागू होने तक विकास कार्य लंबित रहें और बाद में मनमाने तरीके से कार्य कराए जा सकें। उन्होंने भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी के भी गंभीर आरोप लगाए।
48 घंटे का अल्टीमेटम
पार्षदों ने प्रशासन को 48 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि यदि लंबित विकास कार्यों और प्रस्तावों पर ठोस कार्रवाई शुरू नहीं की गई तो वे सामूहिक रूप से इस्तीफा देने पर विचार करेंगे। उनका कहना था कि जनता ने उन्हें विकास के लिए चुना है, लेकिन प्रशासनिक उदासीनता के कारण वे अपने दायित्वों का निर्वहन नहीं कर पा रहे हैं।
