Ethanol Fuel: भारत में पेट्रोल के विकल्प के तौर पर एथेनॉल आधारित ईंधन के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की दिशा में केंद्र सरकार ने नियमों में बदलाव किया है। नए प्रावधानों के तहत 100 प्रतिशत एथेनॉल यानी E100 ईंधन से चलने वाले वाहनों को भी उत्सर्जन संबंधी नियमों में शामिल किया गया है। इससे ऐसी गाड़ियों की टेस्टिंग और नियमानुसार मंजूरी का रास्ता साफ हुआ है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि अब सभी पेट्रोल कारें E100 पर चल सकेंगी। इस व्यवस्था का फायदा उन वाहन मालिकों को मिल सकता है, जो भविष्य में एथेनॉल आधारित ईंधन से चलने वाली गाड़ी खरीदना चाहते हैं। मौजूदा कार मालिकों को फिलहाल अपनी गाड़ी में बदलाव कराने की जरूरत नहीं है। उनके लिए सामान्य पेट्रोल या वाहन के निर्माता की ओर से स्वीकृत ईंधन का इस्तेमाल जारी रहेगा।
E100 का मतलब लगभग 100 प्रतिशत एथेनॉल वाला ईंधन है। एथेनॉल एक तरह का अल्कोहल आधारित जैव ईंधन है, जिसे गन्ने, मक्का और दूसरे जैविक स्रोतों से तैयार किया जा सकता है। पेट्रोल में एथेनॉल मिलाकर भी अलग-अलग मिश्रण वाले ईंधन तैयार किए जाते हैं, लेकिन E100 में पेट्रोल की मिलावट नहीं होती। E20 और E100 के बीच मुख्य अंतर एथेनॉल की मात्रा का है। E20 में 20 प्रतिशत एथेनॉल और शेष हिस्सा मुख्य रूप से पेट्रोल होता है, जबकि E100 लगभग पूरी तरह एथेनॉल पर आधारित होता है। ईंधन की इस संरचना के कारण इंजन, फ्यूल सिस्टम और दूसरे तकनीकी हिस्सों को उसके अनुरूप तैयार करना पड़ता है।
नहीं। सामान्य पेट्रोल या E20 के लिए बनी कार में सीधे E100 या E85 ईंधन का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। सरकार के प्रावधानों के मुताबिक, इन ईंधनों का इस्तेमाल उन्हीं वाहनों में किया जा सकेगा, जिन्हें संबंधित ईंधन के लिए खास तौर पर डिजाइन किया गया हो और जरूरी प्रमाणन मिला हो। इसका मतलब है कि कार मालिक अपनी मौजूदा गाड़ी में केवल ईंधन बदलकर E100 का इस्तेमाल शुरू नहीं कर सकते। ऐसा करने से पहले वाहन निर्माता की मंजूरी और तकनीकी अनुकूलता जरूरी है। E85 के लिए प्रमाणित वाहन को भी अपने आप E100 के अनुकूल नहीं माना जा सकता।
फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक कैसे काम करती है?
फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक वाली कारों को पेट्रोल और एथेनॉल के अलग-अलग अनुपात वाले ईंधन पर चलने के लिए तैयार किया जाता है। इनमें एक ही फ्यूल टैंक हो सकता है और वाहन की तकनीक ईंधन के मिश्रण के अनुसार इंजन के संचालन को समायोजित करती है। हालांकि, हर फ्लेक्स-फ्यूल कार की क्षमता अलग हो सकती है और वह कितने अनुपात तक एथेनॉल इस्तेमाल कर सकती है, यह उसके डिजाइन और प्रमाणन पर निर्भर करता है। भविष्य में ऐसी गाड़ियां खरीदने वाले ग्राहकों को यह देखना होगा कि कंपनी ने वाहन को किस ईंधन के लिए मंजूरी दी है। केवल फ्लेक्स-फ्यूल नाम होने से यह जरूरी नहीं कि कार E100 पर भी चल सके। वाहन के मैनुअल और निर्माता के निर्देश इस मामले में सबसे अहम होंगे।
नए नियमों का मतलब पेट्रोल कारों को बंद करना नहीं है। E100 आधारित वाहन पेट्रोल से चलने वाली गाड़ियों के लिए एक वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर सामने आ सकते हैं। उपभोक्ताओं को कौन-सी गाड़ी खरीदनी है, यह वाहन की उपलब्धता, कीमत, ईंधन की पहुंच और उनकी जरूरतों पर निर्भर करेगा। मौजूदा पेट्रोल कार मालिकों को सिर्फ इस बदलाव के कारण अपनी गाड़ी बदलने या उसमें तकनीकी संशोधन कराने की जरूरत नहीं है। सरकार के नियमों में E100 को शामिल करने का उद्देश्य इस ईंधन के अनुकूल वाहनों के लिए नियामकीय व्यवस्था उपलब्ध कराना है।
E100 ईंधन से देश को क्या फायदा हो सकता है?
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों के बड़े हिस्से के लिए आयात पर निर्भर है। पेट्रोल के विकल्प के तौर पर घरेलू स्तर पर तैयार एथेनॉल का इस्तेमाल बढ़ने से इस निर्भरता को कम करने और विदेशी मुद्रा की बचत करने में मदद मिल सकती है। इसका वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि देश में एथेनॉल का उत्पादन कितना बढ़ता है और इस ईंधन पर चलने वाले वाहन कितनी संख्या में सड़कों पर आते हैं। एथेनॉल के इस्तेमाल से उत्सर्जन में कमी की संभावना भी बताई जाती है। हालांकि, यह दावा करना सही नहीं होगा कि E100 से चलने वाली कारें पूरी तरह प्रदूषण-मुक्त होंगी। वाहन से निकलने वाले उत्सर्जन और पर्यावरण पर कुल असर का आकलन इंजन की तकनीक, ईंधन के उत्पादन के तरीके और पूरे जीवनचक्र को ध्यान में रखकर किया जाता है।
अमेरिका और ब्राजील में फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक वाले वाहनों का इस्तेमाल होता है। इन देशों में एथेनॉल मिश्रित ईंधन का उपयोग भी किया जाता है। ऐसे उदाहरण बताते हैं कि एथेनॉल आधारित ईंधन वाहन क्षेत्र में एक विकल्प बन सकता है, लेकिन इसके लिए वाहन तकनीक, ईंधन की उपलब्धता और जरूरी मानकों का साथ-साथ विकसित होना जरूरी है। भारत में E100 को नियमों में शामिल किए जाने के बाद आगे की प्रगति इस बात पर निर्भर करेगी कि वाहन कंपनियां ऐसे मॉडल कब और कितनी संख्या में पेश करती हैं। आम ग्राहकों के लिए फिलहाल सबसे जरूरी बात यही है कि E100 हर कार के लिए उपलब्ध या उपयुक्त ईंधन नहीं है। अपनी गाड़ी में वही ईंधन इस्तेमाल करें, जिसकी निर्माता ने अनुमति दी हो।
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