Gangster Himanshu Bhau: रोहतक के कुख्यात गैंगस्टर हिमांशु उर्फ भाऊ की अमेरिका में गिरफ्तारी की खबर फैलते ही अपराध जगत में खलबली मच गई है। हालांकि, उसका अपना पैतृक गांव रिटोली इस बड़ी खबर के बाद भी एक अजीब सी खामोशी और दहशत की चादर में लिपटा हुआ है। शनिवार को जब ‘जगमार्ग’ की टीम गांव में हिमांशु के घर और आसपास का माहौल जानने पहुंची, तो ग्रामीणों के चेहरे पर डर साफ छलक रहा था।
गांव में कोई भी व्यक्ति हिमांशु या उसके परिवार के बारे में एक शब्द भी बोलने को तैयार नहीं हुआ। हद तो यह रही कि लोग उसके घर का रास्ता तक बताने से बचते नजर आए। काफी मशक्कत के बाद जब टीम हिमांशु के मकान पर पहुंची तो वहां जंग लगा ताला लटक रहा था। गांव की एक बुजुर्ग महिला ने नाम न छापने की शर्त पर बस इतना कहा कि हिमांशु जब छोटा था, तभी गांव छोड़कर चला गया था। पहले वह ठीक लड़का था, लेकिन पता नहीं किसकी संगत में पड़कर उसका रास्ता भटक गया।
सूना पड़ा मकान, दिल्ली में रहती है मां; ग्रामीणों ने साधी चुप्पी
गांव में पड़ताल के दौरान पता चला कि हिमांशु का परिवार अब रिटोली में नहीं रहता। पिता के गुजरने के बाद उसकी मां अपनी शादीशुदा बेटी के पास दिल्ली में रहने लगी है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में फिलहाल कोई तनाव नहीं है और स्थिति पूरी तरह शांत है, लेकिन जैसे ही हिमांशु का नाम लिया जाता है, लोग बात टाल देते हैं। बात करने वाले लगभग हर शख्स ने एक ही शर्त रखी—”हमारा नाम कहीं मत लिखना।”
गांव के एक व्यक्ति ने दबी जुबान में कहा कि अपराध और रंजिश के बारे में सबको पता है, लेकिन कोई अपनी जान जोखिम में डालकर कुछ नहीं कहना चाहता। वहीं, गांव के सरपंच प्रतिनिधि मंजीत दलाल का कहना है कि रिटोली में अब भाईचारा और शांति बनी हुई है। अतीत में जो खूनी घटनाएं हुईं, वे बेहद दुर्भाग्यपूर्ण थीं, लेकिन अब लोग शांति चाहते हैं।
17 की उम्र में बंदूक उठाई, बाल सुधार गृह से भागकर बना 2.5 लाख का इनामी
पुलिस फाइलों के मुताबिक, हिमांशु भाऊ 2019 तक एक आम छात्र की तरह पढ़ाई कर रहा था। लेकिन महज 17 साल की उम्र में उसने पहली बार गोली चलाई, जिसमें एक युवक की मौत हो गई। नाबालिग होने के कारण उसे हिसार के बाल सुधार गृह भेजा गया, लेकिन वह वहां से चकमा देकर फरार हो गया। इसके बाद उसने पीछे मुड़कर नहीं देखा और रोहतक, झज्जर से लेकर उत्तरी दिल्ली तक हत्या, लूट और रंगदारी के 18 से अधिक मामलों को अंजाम दिया।
साल 2022 में हिमांशु फर्जी पासपोर्ट के सहारे पुर्तगाल और फिर वहां से अमेरिका भाग गया। विदेश में बैठकर ही उसने बंबीहा और नीरज बवाना गैंग से हाथ मिलाया और दिल्ली-एनसीआर में अपना खौफ फैलाया। गोहाना में मातूराम हलवाई और सांपला में सीताराम हलवाई के ठिकाने पर ताबड़तोड़ फायरिंग से लेकर दिल्ली के बहुचर्चित बर्गर किंग शूटआउट तक में भाऊ गैंग का नाम आया। इंटरपोल ने उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया था, जबकि हरियाणा पुलिस ने 1.5 लाख और दिल्ली पुलिस ने 1 लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा था।
एक कार की किश्त और बस विवाद से शुरू हुई थी खूनी दुश्मनी
रिटोली गांव में हिमांशु भाऊ और अंकित उर्फ बाबा गैंग के बीच खूनी दुश्मनी का इतिहास काफी पुराना है। इसकी शुरुआत 2019 में गांव के ही हंसराज उर्फ हंसे की एक निजी बस के विवाद से हुई थी। विवाद बढ़ा तो हंसे ने सुरक्षा के लिए हिमांशु से मदद मांगी। इसके बाद हंसे ने कर्ज पर कार खरीदी, लेकिन कागजात अंकित के परिवार के इस्तेमाल हुए। जब हंसे ने किश्तें भरनी बंद कीं तो बैंक कर्मी अंकित के घर पहुंचने लगे, जिससे विवाद गहरा गया।
इसी दौरान स्टेडियम में हुई बहस के बाद हिमांशु ने अंकित के भाई सन्नी पर गोली चला दी थी। बाल सुधार गृह से भागने के बाद यह दुश्मनी और हिंसक हो गई। 2 मार्च 2022 को अंकित बाबा गैंग ने हिमांशु के चचेरे भाई रोहित उर्फ बजरंग और बीच-बचाव करने आए राजेंद्र की हत्या कर दी। इसके ठीक 5 दिन बाद, 7 मार्च को भाऊ गैंग ने गांव के बस अड्डे पर बस में घुसकर हंसराज की सरेआम हत्या कर बदला लिया। महज पांच दिनों के भीतर तीन लाशें गिरने के बाद से ही गांव में दहशत की नींव पड़ी थी, जो आज भी कायम है।
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