GPA Property Transfer: जीपीए और एग्रीमेंट टू सेल के आधार पर मकान खरीदने वाले हजारों लोगों के लिए चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड (सीएचबी) ने राहत का रास्ता खोल दिया है। बोर्ड ने वर्ष 2016 की जीपीए हस्तांतरण नीति को संशोधनों के साथ दोबारा लागू करने की मंजूरी दे दी है। इसके तहत पात्र लोगों को मकानों का हस्तांतरण करवाने के लिए छह महीने का समय मिलेगा। मंगलवार को बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की 435वीं बैठक में यह अहम फैसला लिया गया। बैठक में आवंटियों की लंबे समय से लंबित मांगों पर विचार करते हुए कई अन्य प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई। बोर्ड ने स्मॉल फ्लैट्स योजना–2006 एवं किफायती किराया आवास परिसर योजना (एआरएचसी) के लाइसेंसधारकों के लिए एकमुश्त ब्याज माफी, एआरएचसी योजना के अंतर्गत लाइसेंस शुल्क का युक्तिकरण तथा चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड के कर्मचारियों को अनुग्रह राशि एवं दिवाली उपहार प्रदान करने का भी फैसला लिया।
इस फैसले से उन लोगों को एक और अवसर मिलेगा, जिन्होंने जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी (जीपीए), एग्रीमेंट टू सेल और अन्य दस्तावेजों के आधार पर मकानों का लेन-देन तो किया, लेकिन उनका औपचारिक हस्तांतरण नहीं करवा पाए। हालांकि, इस नीति का लाभ सभी पुराने मामलों को नहीं मिलेगा। यह केवल 11 अक्टूबर 2011 से पहले निष्पादित जीपीए पर लागू होगी। बोर्ड ने इसे एकबारगी अपवाद के रूप में छह महीने के लिए मंजूरी दी है। बोर्ड के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2011 में सूरज लैंप मामले में जीपीए और बिना पंजीकृत दस्तावेजों के आधार पर संपत्ति हस्तांतरण को वैध नहीं माना था। हालांकि, इस फैसले से पहले निष्पादित जीपीए के आधार पर हुए पुराने हस्तांतरण के मामलों में राहत का प्रावधान किया गया था। इसी के तहत सीएचबी ने वर्ष 2016 में हस्तांतरण नीति बनाई थी। पहले भी आवेदन के लिए विंडो खोली गई थी, लेकिन कई आवंटी इसका लाभ नहीं उठा सके। ऐसे लोगों की मांग पर बोर्ड ने नीति को संशोधनों के साथ फिर लागू करने का फैसला किया है।
सीएचबी ने अफोर्डेबल रेंटल हाउसिंग कॉम्प्लेक्स (एआरएचसी) योजना के तहत आवंटित फ्लैटों के लाइसेंस शुल्क को युक्तिसंगत बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इसके तहत सेक्टर-52 और सेक्टर-56 में प्री-फैब्रिकेटेड आश्रयों के निवासियों को आवंटित करीब 2,000 फ्लैटों के पात्र लाभार्थियों को राहत मिलेगी। अभी इन फ्लैटों का मासिक लाइसेंस शुल्क 3,000 रुपये है, जबकि स्मॉल फ्लैट्स योजना-2006 में यह 800 रुपये निर्धारित है। लंबे समय से एआरएचसी आवंटी भी लाइसेंस शुल्क को स्मॉल फ्लैट्स योजना के बराबर करने की मांग कर रहे थे। बोर्ड ने फैसला किया है कि जिन गरीब लाभार्थियों की सभी स्रोतों से सकल वार्षिक आय 1.5 लाख रुपये से कम है, उन्हें 800 रुपये मासिक लाइसेंस शुल्क देना होगा। सार्वजनिक वितरण प्रणाली के प्राथमिकता परिवार कार्डधारकों, दिव्यांगजनों, निराश्रितों और विधवाओं को भी इस रियायती शुल्क का लाभ मिलेगा।
सीएचबी ने अपने कर्मचारियों के लिए भी दिवाली की सौगात का फैसला किया है। बोर्ड ने कर्मचारियों को अनुग्रह राशि के साथ दिवाली उपहार देने की मंजूरी दी है। बैठक में वित्त सचिव दिप्रवा लाकड़ा, सीईओ डी. कार्तिकेयन, असिस्टेंट एस्टेट ऑफिसर खुशप्रीत कौर, चीफ आर्किटेक्ट राजीव मेहता और चीफ इंजीनियर सी. बी. ओझा मौजूद रहे। बोर्ड के गैर-सरकारी सदस्य बलबीर सिंह ढोल, विनोद जोशी और शक्ति प्रकाश देवशाली के अलावा सीएचबी सचिव सौरभ कुमार अरोड़ा और चीफ इंजीनियर जसविंदर सिंह भी बैठक में शामिल हुए।
14 हजार आवंटियों के लिए 20 करोड़ की ब्याज माफी की सिफारिश
सीएचबी ने स्मॉल फ्लैट्स योजना-2006 और अफोर्डेबल रेंटल हाउसिंग कॉम्प्लेक्स (एआरएचसी) योजना के लाइसेंसधारकों के लिए एकमुश्त ब्याज माफी योजना की भी सिफारिश की है। इसके दायरे में वे लाइसेंसधारक भी आएंगे, जिनके लाइसेंस बकाया भुगतान न करने के कारण रद्द कर दिए गए थे। इस प्रस्ताव से करीब 20 करोड़ रुपये का ब्याज माफ करने और लगभग 14 हजार आवंटियों व उनके परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है। आवंटी लंबे समय से ब्याज माफी की मांग कर रहे थे। योजना का लाभ लेने के लिए लाइसेंसधारकों को 31 अक्टूबर 2026 तक की समस्त बकाया देय राशि का भुगतान करना होगा। यह भुगतान एकमुश्त या किस्तों में किया जा सकेगा, लेकिन इसकी अंतिम समयसीमा 31 अक्टूबर 2027 या लाइसेंस अवधि की समाप्ति होगी। दोनों में से जो तारीख पहले आएगी, उसी तक भुगतान करना अनिवार्य होगा।
Click Here👉 चंडीगढ़ की खबरें पढ़नें के लिए लिंक पर क्लिक करें


