US Midterm Election 2026: अमेरिका के मिडटर्म चुनाव में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। 3 नवंबर को हुए चुनाव के नतीजों में विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी ने सीनेट में बहुमत हासिल कर लिया है, जबकि हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में भी उसकी स्थिति मजबूत हुई है। इन नतीजों के साथ ट्रम्प के लिए संसद में अपने एजेंडे को आगे बढ़ाना पहले के मुकाबले चुनौतीपूर्ण हो जाएगा। डेमोक्रेट्स अब सरकार के फैसलों, नीतियों और विधायी प्रस्तावों पर अधिक प्रभावी तरीके से सवाल उठा सकेंगे। चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी को हुए नुकसान के पीछे ईरान के साथ युद्ध, महंगाई और पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों को भी अहम मुद्दा माना जा रहा है। खुद ट्रम्प ने स्वीकार किया है कि ईरान के साथ संघर्ष का असर उनकी पार्टी के प्रदर्शन पर पड़ा। दूसरी ओर, डेमोक्रेट्स ने टेक्सास जैसे रिपब्लिकन के मजबूत गढ़ में भी बड़ी जीत दर्ज कर राजनीतिक समीकरण बदल दिए हैं।
सीनेट में डेमोक्रेट्स का बहुमत, ट्रम्प के फैसलों पर बढ़ेगी चुनौती
अमेरिकी संसद के ऊपरी सदन सीनेट में कुल 100 सीटें हैं। यहां बहुमत के लिए 51 सदस्यों का समर्थन जरूरी होता है। चुनाव से पहले रिपब्लिकन पार्टी के पास 53 सीटें थीं, जबकि डेमोक्रेटिक पार्टी के पास 45 सीटें थीं। इसके अलावा दो निर्दलीय सांसद डेमोक्रेट्स के साथ मिलकर काम करते थे। इस बार सीनेट की 35 सीटों पर चुनाव हुए। इनमें 22 सीटें रिपब्लिकन और 13 सीटें डेमोक्रेटिक पार्टी के कब्जे में थीं। डेमोक्रेट्स को बहुमत हासिल करने के लिए कम से कम चार सीटों का शुद्ध फायदा उठाना था। चुनावी नतीजों में पार्टी ने रिपब्लिकन के कब्जे वाली कई अहम सीटें जीतकर सीनेट का नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया। सीनेट में बहुमत मिलने से डेमोक्रेट्स को राष्ट्रपति की नियुक्तियों, विधायी प्रस्तावों और सरकारी नीतियों पर अधिक प्रभाव मिलेगा। अमेरिकी राजनीतिक व्यवस्था में सीनेट की भूमिका काफी अहम है। यहां बहुमत वाली पार्टी विभिन्न संसदीय प्रक्रियाओं और समितियों के कामकाज को प्रभावित कर सकती है।
हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में भी बहुमत की लड़ाई
अमेरिकी संसद के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में कुल 435 सीटें हैं। बहुमत हासिल करने के लिए किसी भी पार्टी को कम से कम 218 सीटें जीतनी होती हैं। इस बार सभी 435 सीटों पर चुनाव हुए हैं। चुनाव से पहले रिपब्लिकन पार्टी के पास सदन में मामूली बहुमत था। डेमोक्रेट्स ने कई अहम निर्वाचन क्षेत्रों में जीत दर्ज कर उसकी स्थिति को चुनौती दी है। शुरुआती रुझानों में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार कई सीटों पर आगे रहे, जबकि कई क्षेत्रों में मतगणना जारी रही।
इस चुनाव में आयोवा के पहले संसदीय क्षेत्र का मुकाबला भी चर्चा में रहा। यहां डेमोक्रेटिक उम्मीदवार क्रिस्टीना बोहानन ने रिपब्लिकन उम्मीदवार को हराकर जीत दर्ज की। उन्होंने यह सीट रिपब्लिकन पार्टी से छीन ली। इस जीत को डेमोक्रेट्स के लिए अहम माना जा रहा है, क्योंकि पार्टी ने ऐसे निर्वाचन क्षेत्र में सफलता हासिल की जहां पहले रिपब्लिकन का कब्जा था। हाउस में बहुमत मिलने पर डेमोक्रेट्स को राष्ट्रपति ट्रम्प की विधायी योजनाओं पर रोक लगाने और उनकी सरकार से जवाब मांगने के अधिक अवसर मिलेंगे। हालांकि, अंतिम सीटों का आंकड़ा पूरा होने के बाद ही सदन में दोनों पार्टियों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।
ट्रम्प बोले- ईरान युद्ध और महंगे ईंधन का पड़ा चुनाव पर असर
चुनाव में पार्टी को हुए नुकसान के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने डेमोक्रेटिक पार्टी को जीत की बधाई दी और माना कि विपक्षी पार्टी लंबे समय से दोनों सदनों में बहुमत हासिल करने की कोशिश कर रही थी। ट्रम्प ने अपने कार्यकाल के पिछले दो वर्षों के कामकाज का बचाव करते हुए अर्थव्यवस्था में सुधार और अमेरिका की दक्षिणी सीमा की सुरक्षा को अपनी सरकार की उपलब्धियां बताया। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि ईरान के साथ युद्ध ने चुनावी नतीजों को प्रभावित किया। ट्रम्प के मुताबिक, पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों से अमेरिकी नागरिक नाराज थे। लोगों को ईंधन खरीदने के लिए पहले से ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ रहे थे और इसका असर मतदान के दौरान दिखाई दिया।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रम्प ने फॉक्स न्यूज से बातचीत में ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका को कुछ बड़ा करना होगा और इसमें ईरान पर जोरदार हमला भी शामिल हो सकता है। ट्रम्प ने दोहराया कि ईरान को किसी भी स्थिति में परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिया जाएगा। ईरान के साथ जारी संघर्ष और ईंधन की कीमतों का मुद्दा अमेरिकी मतदाताओं के लिए अहम रहा। चुनाव परिणामों ने यह संकेत दिया है कि विदेश नीति और घरेलू महंगाई जैसे मुद्दे राष्ट्रपति की पार्टी के राजनीतिक प्रदर्शन को प्रभावित कर सकते हैं।
टेक्सास में डेमोक्रेट्स की ऐतिहासिक जीत
इस चुनाव में टेक्सास से भी डेमोक्रेटिक पार्टी के लिए बड़ी खबर आई है। पार्टी की उम्मीदवार जीना हिनोजोसा ने गवर्नर चुनाव में रिपब्लिकन उम्मीदवार ग्रेग एबॉट को हराकर जीत दर्ज की है। इस जीत के साथ वह टेक्सास की पहली लैटिना गवर्नर बनने जा रही हैं। लैटिना शब्द का इस्तेमाल लैटिन अमेरिकी मूल की महिलाओं के लिए किया जाता है। टेक्सास में लैटिन अमेरिकी मूल के लोगों की बड़ी आबादी है। ऐसे में हिनोजोसा की जीत को राज्य की राजनीति में अहम बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है।
टेक्सास लंबे समय से रिपब्लिकन पार्टी का मजबूत राजनीतिक गढ़ रहा है। यहां तीन दशक से अधिक समय बाद डेमोक्रेटिक उम्मीदवार ने गवर्नर पद पर जीत दर्ज की है। इससे पहले एन रिचर्ड्स राज्य की डेमोक्रेटिक गवर्नर थीं, जिनका कार्यकाल 1990 के दशक में रहा था। हिनोजोसा की जीत के साथ डेमोक्रेट्स ने यह भी दिखाया है कि पार्टी रिपब्लिकन के मजबूत माने जाने वाले राज्यों में भी मुकाबला कर सकती है। टेक्सास में गवर्नर पद के साथ सीनेट की सीट पर भी डेमोक्रेटिक उम्मीदवार जेम्स टालारिको ने जीत दर्ज की है।
दोनों सदनों में डेमोक्रेट्स का नियंत्रण
मिडटर्म चुनाव के नतीजों के बाद ट्रम्प के सामने सबसे बड़ी चुनौती संसद में अपने प्रस्तावों को पारित करवाने की होगी। यदि दोनों सदनों में डेमोक्रेट्स का नियंत्रण रहता है तो वे राष्ट्रपति की कई योजनाओं का विरोध कर सकते हैं। इसके अलावा सरकारी नीतियों की जांच और प्रशासन से जवाब मांगने की उनकी क्षमता भी बढ़ेगी। ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर लाल रंग की एक टोपी की तस्वीर पोस्ट की थी, जिस पर ‘वीटो’ लिखा हुआ था। इसे उन्होंने डेमोक्रेट्स के नियंत्रण वाले सदनों के सामने अपनी संवैधानिक ताकत का संकेत देने के तौर पर पेश किया।
अमेरिकी संविधान के अनुसार, राष्ट्रपति को संसद से पारित किसी विधेयक पर वीटो लगाने का अधिकार है। इसका मतलब है कि राष्ट्रपति किसी विधेयक को कानून बनने से रोक सकते हैं। हालांकि, यदि संसद के दोनों सदन दो-तिहाई बहुमत से उसी विधेयक को दोबारा पारित कर दें तो राष्ट्रपति का वीटो निष्प्रभावी हो सकता है। डेमोक्रेटिक पार्टी के पास फिलहाल दोनों सदनों में वीटो को रद्द करने के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत नहीं है। ऐसे में ट्रम्प के पास विपक्ष के विधेयकों को रोकने का अधिकार बना रहेगा। दूसरी तरफ, डेमोक्रेट्स भी राष्ट्रपति के कई प्रस्तावों को संसद में चुनौती दे सकेंगे।
मिडटर्म चुनाव में राष्ट्रपति की पार्टी को नुकसान का पुराना रिकॉर्ड
अमेरिका में मिडटर्म चुनाव राष्ट्रपति के चार साल के कार्यकाल के बीच में होते हैं। इन चुनावों में प्रतिनिधि सभा की सभी सीटों, सीनेट की कुछ सीटों और कई राज्यों के गवर्नर पदों के लिए मतदान होता है। अमेरिकी चुनावी इतिहास में राष्ट्रपति की पार्टी को मिडटर्म चुनावों में अक्सर नुकसान उठाना पड़ा है। 1946 से 2022 के बीच हुए 20 मिडटर्म चुनावों में 18 बार राष्ट्रपति की पार्टी ने हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में सीटें गंवाईं। केवल 1998 में बिल क्लिंटन की डेमोक्रेटिक पार्टी और 2002 में जॉर्ज डब्ल्यू. बुश की रिपब्लिकन पार्टी ने सदन में सीटें बढ़ाई थीं। इस बार भी रिपब्लिकन पार्टी को दोनों सदनों में अपना बहुमत बचाने की चुनौती का सामना करना पड़ा। डेमोक्रेट्स की जीत के बाद अब अमेरिकी राजनीति में सत्ता के दोनों केंद्रों के बीच टकराव बढ़ने की संभावना है। आने वाले समय में ट्रम्प प्रशासन के बजट, विदेश नीति, सरकारी नियुक्तियों और दूसरे विधायी प्रस्तावों पर इसका सीधा असर दिखाई दे सकता है।


