Panchkula School Case: पंचकूला के एक स्कूल में निर्मम मारपीट का शिकार हुई उस नन्ही बच्ची की जिंदगी को लेकर लंबे समय तक अनिश्चितता के बादल छाए रहे, आखिरकार उसके परिवार के लिए राहत और सुकून का सूरज निकल आया है। चंडीगढ़ पीजीआई के डॉक्टरों की कड़ी मेहनत और देशवासियों की दुआओं के सहारे जिंदगी और मौत के बीच लंबी जंग जीतने के बाद बच्ची को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया है। जब वह अपने माता-पिता की गोद में मुस्कुराते हुए घर की दहलीज पर वापस लौटी, तो उस घर का हर एक कोना खुशी के आंसुओं से भीग गया, जहां पिछले कई दिनों से सिर्फ मायूसी और प्रार्थनाओं का पहरा था।
पूरे देश को झकझोर देने वाली घटना, अब दुआओं की हुई जीत
यह वह दर्दनाक हादसा था जिसने न सिर्फ पंचकूला बल्कि पूरे देश के संवेदनशील नागरिकों की आत्मा को झकझोर कर रख दिया था। हर कोई सोशल मीडिया और प्रार्थना सभाओं के जरिए इस नन्ही जान की सलामती की मन्नत मांग रहा था। आज जब बच्ची अस्पताल के बिस्तर से निकलकर अपने घर वापस आ गई है, तो यह उन अनगिनत अनाम दुआओं की सबसे बड़ी जीत है। हालांकि इस मासूम के जिस्म पर लगे जख्मों को भरने में अभी वक्त लगेगा, लेकिन उसके घर लौटने की इस खबर ने हर उस इंसान को सुकून दिया है जो लगातार उसकी हेल्थ अपडेट पर नजर बनाए हुए था।
शिक्षा की जिम्मेदारी उठाने आगे आए समाजसेवी अनिल थापर
इस खौफनाक दौर से उबरने के बाद अब बच्ची के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए समाज के जिम्मेदार लोग भी आगे आने लगे हैं। इस कड़ी में जाने-माने समाजसेवी अनिल थापर ने एक मिसाल पेश करते हुए बच्ची की पूरी पढ़ाई का जिम्मा उठाने का औपचारिक ऐलान किया है। उन्होंने संकल्प लिया है कि यह नन्ही परी जब तक अपनी पढ़ाई पूरी करेगी, तब तक उसकी शिक्षा से जुड़ा सारा आर्थिक खर्च वे खुद वहन करेंगे। समाज की यह सहभागिता इस बात का सबूत है कि अंधेरा चाहे कितना भी गहरा क्यों न हो, उम्मीद की एक किरण हमेशा रास्ता बना ही लेती है। अब उम्मीद यही है कि समय के साथ बच्ची के मानसिक और शारीरिक घाव भरेंगे और वह एक बार फिर अपनी किताबों और खिलौनों की रंगीन दुनिया में खुलकर मुस्कुरा सकेगी।
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