Saha Police Controversy: शुभम, साहा। अंबाला जिले के साहा-शहजादपुर मार्ग पर ओवरलोडिंग और अवैध खनन के खिलाफ पुलिसिया कार्रवाई के दावों की हवा निकलती नजर आ रही है। रविवार को साहा पुलिस टीम द्वारा गश्त के दौरान पकड़ी गई ईंटों और मिट्टी से भरी गाड़ियों को महज एक फोन कॉल पर बिना किसी कानूनी कार्रवाई के छोड़ दिए जाने का मामला गरमा गया है। खाकी की इस कथित ‘मेहरबानी’ और खुलेआम नियमों की अनदेखी के बाद से क्षेत्र के लोगों में पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर भारी नाराजगी और आक्रोश देखा जा रहा है।
गश्त के दौरान रोके थे दोनों वाहन, चालकों के पास नहीं मिले कागजात
प्राप्त जानकारी के अनुसार, रविवार को साहा पुलिस की एक टीम साहा-शहजादपुर मार्ग पर रूटीन गश्त पर थी। इसी दौरान पुलिसकर्मियों ने ईंटों से ओवरलोड भरी एक ट्रैक्टर-ट्रॉली और अवैध रूप से मिट्टी ले जा रहे एक तेज रफ्तार डंपर को रुकवाया। शुरुआती जांच के दौरान जब पुलिसकर्मियों ने दोनों वाहनों के चालकों से दस्तावेज, रॉयल्टी और परिवहन से संबंधित कागजात मांगे, तो वे कोई भी वैध दस्तावेज पेश नहीं कर सके। कागजात न होने और नियमों के उल्लंघन पर पुलिसकर्मियों ने सख्त रुख अपनाते हुए दोनों वाहनों को जब्त कर साहा थाने ले जाने की तैयारी शुरू कर दी थी।
रसूखदार की एक ‘कॉल’ और मिनटों में बदल गया पुलिस का रुख!
प्रत्यक्षदर्शियों और विभागीय सूत्रों की मानें तो कहानी में मोड़ तब आया जब पुलिस टीम थाने ले जाने के लिए गाड़ियां ले जाने ही वाली थी। तभी मौके पर मौजूद अधिकारियों या कर्मचारियों के पास किसी रसूखदार का फोन आया। चर्चा है कि इस एक फोन कॉल पर हुई कथित सांठगांठ के बाद खाकी का कड़ा रुख मिनटों में नरम पड़ गया। इसके बाद पुलिस ने न तो वाहनों का चालान काटा और न ही खनिज एवं खनन विभाग को इसकी सूचना दी। बिना किसी लिखा-पढ़ी के दोनों अवैध वाहनों को मौके से ही सहकुशल रवाना कर दिया गया।
स्थानीय लोगों में आक्रोश, निष्पक्ष विभागीय जांच की उठी मांग
सड़क किनारे सरेआम घटे इस घटनाक्रम को देख रहे स्थानीय निवासियों में पुलिस के इस दोहरे रवैये को लेकर गहरा असंतोष है। ग्रामीणों का कहना है कि एक तरफ तो आम जनता के छोटे-छोटे चालान काट दिए जाते हैं, वहीं दूसरी तरफ ओवरलोडिंग और अवैध खनन करने वाले माफिया को एक फोन कॉल पर अभयदान दे दिया जाता है। इस पूरे मामले ने साहा क्षेत्र में ओवरलोडिंग और अवैध परिवहन को मिल रहे कथित प्रशासनिक संरक्षण पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। क्षेत्रवासियों ने जिला पुलिस कप्तान (SP) और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों से इस मामले का संज्ञान लेकर संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ सख्त विभागीय जांच और कार्रवाई की मांग की है।
यह भी देखें – 61 फीट का रावण, 55 फीट का कुंभकरण! कैथल रामलीला मैदान में दहन के लिए पुतले तैयार

