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Haryana Raw Employees News: हरियाणा में कच्चे कर्मचारियों के लिए 'हाई' रिलीफ: हाई कोर्ट का बड़ा आदेश

GGaganpreet Kaur
हरियाणा में कच्चे कर्मचारियों के लिए 'हाई' रिलीफ: हाई कोर्ट का बड़ा आदेश
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चंडीगढ़। हरियाणा की मनोहर-नायब सरकार के विभिन्न महकमों, बिजली निगमों और नगर निकायों में सालों से अपनी सेवाएं दे रहे हजारों अस्थायी और अनुबंधित कर्मचारियों की उम्मीदों को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने संजीवनी दे दी है। जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की खंडपीठ ने नियमितीकरण की मांग को लेकर दायर 98 अपीलों पर सुनवाई करते हुए एक दूरगामी फैसला सुनाया है। अदालत ने साफ कर दिया है कि अब कर्मचारियों के पक्का होने का भविष्य पुरानी नीतियों की कानूनी पेचीदगियों के बजाय सुप्रीम कोर्ट द्वारा 16 अप्रैल 2026 को ‘मदन सिंह बनाम हरियाणा राज्य’ मामले में तय किए गए संवैधानिक सिद्धांतों के आधार पर तय होगा।

प्रशासनिक पुनर्विचार के घेरे में पुरानी नीतियां

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हाई कोर्ट ने सिंगल बेंच के जनवरी 2025 के आदेश में संशोधन करते हुए यह स्पष्ट किया कि साल 1996, 2003, 2011, 2014 और यहां तक कि 2024 की नियमितीकरण नीतियों पर भी अब सुप्रीम कोर्ट की नई व्याख्या के चश्मे से विचार किया जाएगा। खंडपीठ का मानना है कि ‘उमा देवी’ और ‘योगेश त्यागी’ जैसे ऐतिहासिक मामलों के बाद अब राज्य सरकार को हर कर्मचारी के सर्विस रिकॉर्ड, उसकी पात्रता और नीति की वैधता की बारीकी से जांच करनी होगी।

2 हफ्ते का समय और 6 महीने की डेडलाइन

अदालत ने कर्मचारियों और सरकार दोनों के लिए एक स्पष्ट ‘रोडमैप’ तैयार कर दिया है। आदेश के मुताबिक, कर्मचारियों को इस फैसले की सर्टिफाइड कॉपी मिलने के दो हफ्ते के भीतर अपने संबंधित विभागों में विस्तृत आवेदन (Representation) जमा करना होगा। वहीं, विभाग को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वे अगले 6 महीने के भीतर हर मामले की जांच करें और एक तर्कसंगत (Speaking Order) फैसला सुनाएं। सबसे बड़ी राहत यह है कि इस पूरी प्रक्रिया के दौरान किसी भी कर्मचारी को नौकरी से हटाया नहीं जा सकेगा।

क्यों खास है ‘मदन सिंह’ बनाम हरियाणा राज्य मामला?

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने मदन सिंह मामले में राज्य सरकार को निर्देश दिए थे कि वह कच्चे कर्मचारियों को नियमित करने की तमाम संभावनाओं को तलाशे, न कि उन्हें तकनीकी आधार पर खारिज करे। हाई कोर्ट के इस ताजा फैसले के बाद अब हरियाणा सरकार के पास उन हजारों कर्मचारियों की फाइलें फिर से खोलने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है, जो पिछले कई दशकों से ‘समान काम-समान वेतन’ और ‘पक्की नौकरी’ के लिए अदालतों के चक्कर काट रहे थे। यह फैसला न केवल कानूनी विवादों को सुलझाएगा, बल्कि हजारों परिवारों के आर्थिक भविष्य को भी स्थिरता प्रदान कर सकता है।

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