Haryana News: हरियाणा के किसानों के लिए बड़ा कदम, 1.40 लाख एकड़ जमीन होगी सेम मुक्त, सैटेलाइट से रखी जाएगी नजर

हरियाणा के किसानों के लिए बड़ा कदम, 1.40 लाख एकड़ जमीन होगी सेम मुक्त, सैटेलाइट से रखी जाएगी नजर
Haryana News: हरियाणा में कृषि क्षेत्र को नई दिशा देने और किसानों की लागत घटाकर उनकी जेब मजबूत करने के लिए राज्य सरकार ने एक्शन प्लान तैयार कर लिया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने शुक्रवार को ‘विजन-2047’ के तहत कृषि विभाग की आगामी 5 वर्षों की कार्ययोजना की विस्तृत समीक्षा की। इस बैठक का मुख्य केंद्र बिंदु खेती में आधुनिक तकनीकों का समावेश, जलभराव की पुरानी समस्या का स्थाई समाधान और किसानों को उनकी जैविक उपज का सही दाम दिलाना रहा।
1.40 लाख एकड़ जमीन को सेम से मुक्ति, सैटेलाइट रखेगा नजर
राज्य के कई हिस्सों में जलभराव और सेम (जलजमाव) की वजह से बंजर हो रही उपजाऊ जमीन को लेकर सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। चालू वर्ष के दौरान प्रदेश की 1 लाख 40 हजार एकड़ भूमि को सेम मुक्त करने का लक्ष्य तय किया गया है। सबसे खास बात यह है कि उपचार के बाद जमीन पर दोबारा जलभराव न हो, इसके लिए स्पेस टेक्नोलॉजी का सहारा लिया जाएगा और सैटेलाइट के जरिए प्रभावित जमीनों की नियमित मॉनिटरिंग की जाएगी। इससे प्रभावित क्षेत्रों में ड्रेनेज सिस्टम को समय रहते दुरुस्त करना आसान होगा।
यूरिया की ज्यादा खपत वाले जिलों की होगी गहन जांच, बनेंगे 15 लाख ‘सोल हेल्थ कार्ड’
फसलों की लागत घटाने और मिट्टी की सेहत सुधारने के लिए राज्य में 15 लाख ‘सोल हेल्थ कार्ड’ जारी किए जाएंगे। योजना के पहले चरण में 3.75 लाख मिट्टी के नमूने जुटाने का काम चल रहा है, जिनमें से 50 हजार से अधिक सैंपल लिए जा चुके हैं और बाकी जुलाई तक पूरे कर लिए जाएंगे। इस अभियान में स्कूल-कॉलेज के छात्रों और ग्रामीण युवाओं को बतौर वॉलंटियर जोड़ा जा रहा है। वहीं, मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि जिन जिलों में यूरिया की खपत जरूरत से ज्यादा है, वहां की मिट्टी का विशेष विश्लेषण कराया जाए ताकि यह पता चल सके कि खेतों में वाकई नाइट्रोजन की कमी है या किसान अज्ञानता में यूरिया बहा रहे हैं।
हिसार और गुरुग्राम में बनेंगी अलग जैविक मंडियां
प्राकृतिक और जैविक खेती (ऑर्गेनिक फार्मिंग) को बढ़ावा देने के लिए सरकार अब बाजार की सीधी व्यवस्था करने जा रही है। इसके तहत हिसार और गुरुग्राम में विशुद्ध रूप से जैविक उत्पादों के लिए अलग मंडियां स्थापित की जाएंगी। इसके अलावा प्रदेश के 8 अन्य जिलों की मौजूदा अनाज मंडियों में भी जैविक फसलों के लिए अलग शेड और जगह चिन्हित की जाएगी। हैफेड के माध्यम से इन उत्पादों की ब्रांडिंग और मार्केटिंग की जाएगी ताकि किसानों को सामान्य फसल से बेहतर दाम मिल सकें।
पराली प्रबंधन और सीधी बिजाई पर जोर, अगस्त में लगेगा विशेष मेला
बैठक के दौरान पराली जलाने की घटनाओं पर पूरी तरह अंकुश लगाने के लिए पंजाब सीमा से सटे संवेदनशील जिलों में रीपर और अन्य आधुनिक कृषि यंत्रों की उपलब्धता बढ़ाने के आदेश दिए गए। साथ ही ‘मेरा पानी-मेरी विरासत’, धान की सीधी बिजाई (DSR), फसल विविधीकरण और ड्रिप इरिगेशन जैसी योजनाओं की समीक्षा की गई। कपास उत्पादक किसानों को राहत देने और चुगाई की समस्या हल करने के लिए अगस्त महीने में हिसार में एक विशेष कृषि मेले का आयोजन किया जाएगा, जहां आधुनिक कॉटन पिकिंग मशीनों का प्रदर्शन होगा।
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