Haryana News: सूचना का अधिकार (RTI) कानून के तहत मांगी गई जानकारियों को दबाने और प्रथम अपीलों को लटकाने की प्रशासनिक परिपाटी पर हरियाणा सरकार ने शिकंजा कस दिया है। राज्य भर से आ रही शिकायतों और सूचना आयोग की तल्ख टिप्पणी के बाद मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने कड़ा रुख अपनाया है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि जन सूचना अधिकारी आम जनता को मांगी गई जानकारी देने में अनावश्यक रोड़े न अटकाएं और तय समयसीमा के भीतर पारदर्शी तरीके से सूचनाएं उपलब्ध कराएं।
धारा 19(6) का दिया हवाला, बिना ठोस कारण के खारिज नहीं होंगी अपीलें
मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की ओर से सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों और प्राधिकारियों को भेजे गए आधिकारिक पत्र में आरटीआई अधिनियम, 2005 की धारा 19(6) का स्पष्ट हवाला दिया गया है। पत्र में कहा गया है कि प्रथम अपीलीय अधिकारी (FAA) अब केवल औपचारिकता पूरी नहीं करेंगे। उन्हें अपीलकर्ता द्वारा उठाए गए हर एक बिंदु पर गहराई से विचार करना होगा और अपना फैसला सुनाते समय उसके पीछे के स्पष्ट एवं तर्कसंगत कारण भी आदेश में दर्ज करने होंगे। गोलमोल या बिना पर्याप्त आधार वाले आदेशों को नियमविरुद्ध माना जाएगा।
राज्य सूचना आयोग की चिंता के बाद जागा प्रशासनिक अमला
दरअसल, हरियाणा राज्य सूचना आयोग ने हाल ही में प्रथम अपीलों की सुस्त रफ्तार और अधिकारियों द्वारा बिना सिर-पैर के आदेश जारी करने पर गहरी चिंता व्यक्त की थी।
आयोग ने शासन को पत्र लिखकर इसमें सुधार के लिए कड़े कदम उठाने की सिफारिश की थी। हालांकि, पिछले दिनों आयोजित एक पत्रकार वार्ता में जब मुख्य सूचना आयुक्त टीवीएसएन प्रसाद से प्रदेश में लंबित आरटीआई मामलों के आंकड़े पूछे गए थे, तो वे उस समय सटीक संख्या बताने के बजाय बाद में जानकारी देने की बात कहकर टाल गए थे। आयोग की उसी आपत्ति को संज्ञान में लेते हुए अब मुख्य सचिव कार्यालय ने पूरे महकमे को तय डेडलाइन में काम करने की सख्त हिदायत जारी कर दी है।
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