Haryana Roadways Strike: हरियाणा रोडवेज कर्मचारी सांझा मोर्चा द्वारा 5 और 6 नवंबर को पूरे प्रदेश में बसों का चक्का जाम करने की घोषणा के बाद सरकारी महकमे में अफरा-तफरी का माहौल है। कर्मचारियों के कड़े रुख को देखते हुए परिवहन विभाग ने हड़ताल टालने के लिए मोर्चा संभाल लिया है।
विभाग ने कर्मचारी यूनियनों को 4 नवंबर को सुबह 11 बजे हरियाणा सचिवालय में उच्चस्तरीय बैठक के लिए बुलाया है। यह हड़ताल ऐसे समय पर प्रस्तावित है जब 5 नवंबर को केंद्रीय गृहमंत्री का करनाल और अंबाला दौरा तय है, जिससे प्रशासनिक अमले की सिरदर्दी और बढ़ गई है।
4 नवंबर को सचिवालय में होगी आर-पार की बात
ऑल हरियाणा परिवहन कर्मचारी संघ के प्रधान अशोक खोखर ने बताया कि परिवहन विभाग के कमिश्नर अतुल द्विवेदी और डीजी निखिल गजराज की मौजूदगी में यह बैठक होगी। विभाग की ओर से सांझा मोर्चा में शामिल सभी 10 से अधिक यूनियनों को पत्र जारी कर 2-2 प्रतिनिधियों को वार्ता के लिए आमंत्रित किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि कर्मचारियों की मांगों पर पहले हुई बैठक के मिनट्स जारी किए जा चुके हैं और अब नियमानुसार आगे की कार्रवाई पर चर्चा होगी।
इन 15 सूत्रीय मांगों पर अड़े हैं रोडवेज कर्मी
कर्मचारी सांझा मोर्चा अपनी 15 सूत्रीय मांगों को तुरंत लागू करने की जिद पर अड़ा है। कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में लंबे समय से लंबित बकाया डीए (महंगाई भत्ता) जारी करना, मेडिकल अलाउंस में बढ़ोतरी, और 2016 में भर्ती किए गए चालकों को पक्का (स्थायी) करना शामिल है। इसके अलावा परिचालकों (कंडक्टरों) का पे-ग्रेड बढ़ाने तथा कर्मचारियों को 11 साल का बकाया बोनस देने की मांग भी प्रमुखता से उठाई जा रही है।
बैठक के नतीजों पर टिकी रोडवेज चक्का जाम की दिशा
कर्मचारी नेताओं का साफ कहना है कि 3 नवंबर को बातचीत का न्योता मिला था, लेकिन वे अब 4 नवंबर की बैठक में शामिल होकर अपनी बात मजबूती से रखेंगे। ऑल हरियाणा परिवहन कर्मचारी संघ के अनुसार, वार्ता के दौरान अगर अधिकारियों से कोई ठोस और लिखित आश्वासन नहीं मिलता है, तो कर्मचारी अपने तय कार्यक्रम के अनुसार 5 और 6 नवंबर को बसों के पहिये थामने से पीछे नहीं हटेंगे।
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