हिमाचल में बारिश से जनजीवन बेहाल: मंडी में 51 सड़कें बंद, शिमला-सोलन में 118 ट्रांसफार्मर प्रभावित

हिमाचल में बारिश से जनजीवन बेहाल
Himachal Weather: हिमाचल प्रदेश में बारिश का असर लगातार बना हुआ है। राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र (SEOC) की 3 सितंबर सुबह 10 बजे तक की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में 110 सड़कें बंद हैं। बारिश और भूस्खलन से कई इलाकों में यातायात प्रभावित हुआ है, जिससे लोगों को आने–जाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
जिलेवार स्थिति देखें तो मंडी में सबसे ज्यादा 51 सड़कें बंद हैं। इसके बाद कुल्लू में 22, शिमला में आठ, सिरमौर में आठ, चंबा में सात, कांगड़ा में सात, ऊना में चार, सोलन में दो और लाहौल–स्पीति में एक सड़क बंद है।
198 बिजली ट्रांसफार्मर भी प्रभावित
बारिश का असर प्रदेश की बिजली आपूर्ति पर भी पड़ा है। SEOC की सुबह की रिपोर्ट के मुताबिक हिमाचल में 198 बिजली वितरण ट्रांसफार्मर (DTR) बाधित हैं।
इनमें चंबा में 35, कुल्लू में 26, हमीरपुर में 23, मंडी में आठ, शिमला में 53, सिरमौर में 11 और सोलन में 65 DTR प्रभावित हैं। बिजली व्यवस्था प्रभावित होने से कई इलाकों में सामान्य सेवाओं पर भी असर पड़ सकता है।
56 पेयजल योजनाओं पर असर
बारिश के कारण प्रदेश की पेयजल आपूर्ति भी प्रभावित हुई है। रिपोर्ट के अनुसार हिमाचल में 56 पेयजल योजनाएं बाधित हैं।
सड़क, बिजली और पेयजल जैसी बुनियादी सेवाओं के एक साथ प्रभावित होने से बारिश का असर केवल यातायात तक सीमित नहीं है। ग्रामीण और पहाड़ी इलाकों में लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
मानसून में अब तक 261 लोगों की मौत
30 जून से 2 सितंबर तक की संचयी रिपोर्ट के अनुसार हिमाचल प्रदेश में मानसून के दौरान आपदा से संबंधित घटनाओं में 261 लोगों की मौत हुई है। इस अवधि में 471 लोगों के घायल होने की भी रिपोर्ट है।
जिलेवार आंकड़ों में शिमला में 35, कांगड़ा में 33, सिरमौर में 33, चंबा में 31, कुल्लू में 25, मंडी में 23 और ऊना में 21 मौतें दर्ज हैं। ये आंकड़े मानसून के दौरान सामने आए हादसों और आपदा संबंधी घटनाओं के व्यापक असर को दिखाते हैं।
सड़क हादसों में 154 लोगों की जान गई
मानसून सीजन में सड़क दुर्घटनाएं भी मौतों की बड़ी वजह बनी हैं। संचयी रिपोर्ट के अनुसार इस दौरान सड़क हादसों में 154 लोगों की मौत दर्ज की गई है।
सड़क दुर्घटनाओं में चंबा, शिमला और सिरमौर में 19-19 मौतें दर्ज हुई हैं। वहीं कांगड़ा में 17 और कुल्लू में 16 लोगों की जान गई।
लाहौल–स्पीति में भूस्खलन से जुड़ी 13 मौतें
आपदा से हुई मौतों के कारणों की जिलेवार रिपोर्ट में लाहौल–स्पीति भी प्रभावित जिलों में शामिल है। यहां 13 मौतें भूस्खलन और अन्य घटनाओं से जुड़ी बताई गई हैं।
संचयी रिपोर्ट में लाहौल–स्पीति में कुल 20 मौतें दर्ज हैं। पहाड़ी इलाकों में लगातार बारिश के दौरान भूस्खलन और सड़क बाधित होने का खतरा बना रहता है, जिससे यातायात और जरूरी सेवाओं पर सीधा असर पड़ता है।
आम लोगों के लिए क्या मायने रखती है स्थिति
प्रदेश में 110 सड़कों का बंद होना सीधे तौर पर स्थानीय आवाजाही और रोजमर्रा की जरूरतों को प्रभावित करता है। इसके अलावा बिजली ट्रांसफार्मर और पेयजल योजनाओं के बाधित होने से कई इलाकों में लोगों को एक साथ कई बुनियादी सेवाओं की परेशानी झेलनी पड़ सकती है।
फिलहाल SEOC की रिपोर्ट में सड़क, बिजली और पेयजल व्यवस्था पर बारिश के असर की स्थिति सामने आई है। प्रभावित इलाकों में लोगों के लिए मौसम और स्थानीय प्रशासन की ओर से जारी यातायात व सुरक्षा संबंधी निर्देशों पर नजर रखना जरूरी है।
