Woman Farmer Kurukshetra: खेती-किसानी में जब स्वाद के साथ सेहत का मेल हो जाता है, तो सफलता के नए रास्ते खुद-ब-खुद खुल जाते हैं। कुरुक्षेत्र जिले के छोटे से गांव मंगौली जाट्टान की रहने वाली अनुराधा सिंह ने इस बात को साबित कर दिखाया है। उन्होंने मुरब्बा बनाने के पारंपरिक और पुराने तरीकों में एक ऐसा बदलाव किया, जिसने न सिर्फ उनके उत्पादों की सेहतमंद पहचान बनाई, बल्कि उनके छोटे से कारोबार को आसमान की ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया। आज स्थिति यह है कि अनुराधा का सालाना कारोबार दो लाख रुपये से छलांग लगाकर सीधे पांच लाख रुपये तक पहुंच चुका है और उनके हाथ का बना शहद वाला मुरब्बा दिल्ली से लेकर चंडीगढ़ तक के बाजारों में धूम मचा रहा है।
अनुराधा सिंह की यह सफलता यूं ही नहीं मिली। उन्होंने एमएससी डायटेटिक्स की पढ़ाई की है और वर्तमान में एक प्रतिष्ठित निजी अस्पताल में चीफ डाइटीशियन के रूप में सेवाएं दे रही हैं। उनका परिवार लंबे समय से खेती से जुड़ा रहा है और उनके पति कुलबीर सिंह प्राकृतिक खेती के जरिए अपनी एक अलग पहचान बना चुके हैं। पति की प्राकृतिक खेती से उपजी सब्जियों और अनाजों की स्थानीय स्तर पर भारी मांग रहती है। अनुराधा अपनी नौकरी के बाद बचा हुआ समय पति के साथ खेती के उत्पादों की पैकेजिंग और उनकी गुणवत्ता को निखारने में लगाती थीं। इसी दौरान उनके मन में खाद्य उत्पादों में वैल्यू एडिशन और सेहत के लिहाज से उनमें सुधार करने का विचार आया।
पढ़ाई और विज्ञान का रसोईघर में अनूठा संगम
अनुराधा का मानना है कि खानपान को न सिर्फ स्वादिष्ट बल्कि पोषक तत्वों से भरपूर बनाना उनकी शुरुआती रुचि रही है। अपनी डायटेटिक्स की पढ़ाई के दौरान उन्होंने भोजन की बारीकियों और उसके वैज्ञानिक पहलुओं को गहराई से समझा था। बाजार में मिलने वाले पारंपरिक मुरब्बों में अत्यधिक मात्रा में चीनी का इस्तेमाल होता है, जो सेहत के लिए कई मायनों में नुकसानदेह साबित हो सकता है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए उन्होंने चीनी के विकल्प पर काम करना शुरू किया और अंततः आंवला, करौंदा और अदरक के मुरब्बे को पूरी तरह से शहद में तैयार करने का बीड़ा उठाया।
उनके इस प्रयोग के नतीजे बेहद शानदार रहे। शहद की मिठास और इन प्राकृतिक फलों के औषधीय गुणों ने मिलकर एक ऐसा सुपरफूड तैयार किया जो स्वाद में भी बेहतरीन था और सेहत के लिए भी पूरी तरह सुरक्षित। धीरे-धीरे उनके इन उत्पादों की चर्चा आसपास के इलाकों से निकलकर बड़े शहरों तक पहुंच गई। आज दिल्ली और चंडीगढ़ के ग्राहक उनके शहद वाले मुरब्बों की विशेष डिमांड करते हैं।
नौकरी के साथ तराशा कारोबार का हुनर
एक तरफ अस्पताल की नौकरी की व्यस्तता और दूसरी तरफ घर पर कृषि आधारित स्टार्टअप को संभालना—अनुराधा दोनों जिम्मेदारियों को बेहद संतुलित तरीके से निभा रही हैं। वह अपने खाली समय का सदुपयोग मुरब्बा तैयार करने और उसकी मार्केटिंग करने में करती हैं। उनकी यह कहानी इस बात का जीता-जागता उदाहरण है कि यदि उच्च शिक्षा, पारंपरिक जड़ों से जुड़ाव और फूड प्रोसेसिंग में थोड़ा सा नवाचार एक साथ मिल जाए, तो ग्रामीण महिलाएं न केवल अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर सकती हैं, बल्कि समाज के लिए एक प्रेरणा भी बन सकती हैं। उनकी इस उपलब्धि और कृषि क्षेत्र में उनके योगदान को देखते हुए हाल ही में चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार में आयोजित एक कृषि मेले में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने उन्हें ‘प्रगतिशील महिला किसान पुरस्कार’ से सम्मानित किया था।
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