Nangal Chaudhary News: (विजय यादव) दौंखेरा पहाड़ की लीज बीते दो महीने से विवादों में बनी हुई है। ग्रामीणों का आरोप है की 2001 में तत्कालीन जेडी माईंस संचालक को करीब साढे चार एकड़ रकबा पत्थर खनन के लिए लीज पर छोड़ा गया था। लेकिन उन्होंने प्रशासन और विभाग से मिलीभगत करके करीब 15 एकड़ में खनन कर लिया।
अब दूसरी माईंस को सात एकड़ का खनन पट्टा अलॉट कर दिया। लेकिन निर्धारित रकबे में करीब साढे चार एकड़ पर पहले ही सैकड़ों फीट खनन मिला है। शिकायत मिलने पर प्रशासन ने पैमाइश करवा दी, रिपोर्ट के आधार पर राजस्व नुकसान की भरपाई करने का प्रपोजल तैयार किया गया है।
आपको बता दें कि राजस्थान बार्डर पर स्थित पहाड़ की तलहटी पर दौंखेरा गांव बसा हुआ है। ग्रामीणों ने पहाड़ पर मंदिर निर्माण तथा अन्य सार्वजनिक सुविधाएं स्थापित की हैं। लेकिन 2001 में विभाग ने पहाड़ को लीज के लिए चिन्हित किया तथा ऑक्शन के लिए सरकार को रिपोर्ट भेज दी। विभाग ने विभिन्न प्रक्रिया पूरी करके जेडी माईंस को पत्थर खनन के लिए लीज अलॉट कर दी।
तत्कालीन माईंस संचालक को साढे चार एकड़ पर निर्धारित मानकों से खनन करना था, किंतु उन्होंने 15 एकड़ से अधिक रकबे पर सैकड़ों फीट गहराई से पत्थर निकाल लिया। ग्रामीणों का आरोप है कि संचालक के पट्टे की अवधि 2021 में समाप्त हो गई थी। किंतु उन्होंने प्रशासनिक पहुंच और भ्रष्टाचार की मदद से 2025 तक खनन करके पंचायत के रकबे को नुकसान पहुंचाया है।
दूसरी तरफ पट्टा खत्म होते ही सरकार ने दुबारा विभिन्न प्रक्रिया पूरी लीज अलॉट कर दी। संचालक ने हैंडओवर के लिए पहाड़ का निरीक्षण किया तथा बिना विभागीय अनुमति से पंचायती जमीन को खुर्दबुर्द करना आरंभ कर दिया।
आक्रोशित ग्रामीणों ने जिला उपायुक्त, एसपी, एसडीएम तथा तहसीलदार से मिलकर खनन एरिया की जांच तथा पैमाइश करने की गुहार लगाई। कहा कि पहाड़ के साथ लगता पंचायती रकबा है जहां मंदिर निर्माण के अलावा हरियाली है। खनन संचालक पौधों को उखाड़कर पंचायती रकबे से पत्थर निकालने की फिराक में हैं।
शिकायत मिलने पर प्रशासन ने तहसीलदार निशा श्योराण की निगरानी में पैमाइश कमेटी गठित की, जिसने पहाड़ पर खाली और खनन रकबा मापा है। पैमाइश के दौरान जेडी माईंस द्वारा निर्धारित अनुमति से करीब 10 एकड़ अधिक खनन करने का अनुमान है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि तत्कालीन संचालक ने लीज अवधि खत्म होने बाद भी तीन साल तक पहाड़ पर खनन किया है, जिसकी विभागीय अधिकारियों को जानकारी होने के बावजूद कार्रवाई नहीं होने से भ्रष्टाचार की चर्चाएं तेज हो गई है।
पंचायती रकबे को टारगेट करके खनन का लिया टैंडर
कालू बटार, पूर्व सरपंच लालचंद ने बताया कि लीज आलॉट की प्रक्रिया में धड़ल्ले से भ्रष्टाचार का सहारा लिया गया है। जिस कारण मंदिर, पैट्रोल पंप, आबादी के मानकों को नजरंदाज करके एनओसी रिलीज की गई हैं। प्रशासनिक पैमाइश में आधे से अधिक रकबे पर खनन हो चुका है। बावजूद नामजद फर्म ने लीज अलॉट करवा ली। क्योंकि संचालक ने पंचायती रकबे पर खनन करने का टारगेट निर्धारित कर रखा है। उन्होंने कहा कि पहाड़ पर अवैध खनन का विरोध लगातार जारी रहेगा।
जेडी माईंस के अवैध खनन की रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजेंगे
जिला खनन अधिकारी राजेश कुमार ने बताया कि जेडी माईंस को करीब साढे चार एकड़ रकबा लीज पर छोड़ा था, किंतु उन्होंने अवैध रूप से पंचायती रकबे से पत्थर निकाला है। माईंस रकबे की पैमाइश करवाई गई है, रिपोर्ट के आधार पर राजस्व नुकसान का आंकलन करके उच्चाधिकारियों को अवगत कराया जाएगा। उन्होंने बताया बताया कि पहाड़ को दुबारा खनन के लिए छोड़ा गया है किंतु ग्रामीणों के विरोध के चलते काम रूका हुआ है।
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