Mahendragarh News: हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय (हकेवि) के स्वामी दयानंद सरस्वती पीठ द्वारा महर्षि वाल्मीकि जयंती के उपलक्ष्य में ‘रामायण की शिक्षाओं का विद्यार्थी जीवन में महत्व’ विषय पर एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को प्राचीन भारतीय ग्रंथों के नैतिक मूल्यों और आदर्शों से अवगत कराना था।
विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. सुनील कुमार ने अपने शुभकामना संदेश में कहा कि रामायण में संपूर्ण जीवन का सार निहित है। महर्षि वाल्मीकि की शिक्षाओं और आदर्शों को अपनाकर व्यक्ति अपने जीवन में सुख, समृद्धि और उच्च नैतिक उन्नति प्राप्त कर सकता है।
कार्यक्रम के दौरान स्वामी दयानंद सरस्वती पीठ की अध्यक्ष एवं संयोजक डॉ. सुमन रानी तथा पोषण विज्ञान विभाग की सहआचार्य डॉ. सविता बुधवार ने मुख्य वक्ता—पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के सहायक आचार्य डॉ. सुरेंद्र का गर्मजोशी से स्वागत किया।
मुख्य वक्ता डॉ. सुरेंद्र ने अपने संबोधन में विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि रामायण केवल एक धार्मिक ग्रंथ मात्र नहीं है, बल्कि यह जीवन के नैतिक मूल्यों, ईमानदारी, वचनबद्धता, कर्तव्यनिष्ठा और विनम्रता की शिक्षा देने वाला एक महान मार्गदर्शक ग्रंथ है।
उन्होंने भगवान श्रीराम के जीवन के आदर्शों का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों को अपनी जिम्मेदारियों के प्रति पूरी तरह निष्ठावान रहने तथा शैक्षणिक जीवन में अनुशासन और ईमानदारी बनाए रखने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि विद्यार्थियों को ज्ञानार्जन के साथ-साथ हमेशा विनम्रता अपनानी चाहिए और अपनी योग्यताओं व उपलब्धियों का उपयोग सकारात्मक कार्यों में करना चाहिए।
कार्यक्रम का मंच संचालन डॉ. निलेश द्वारा किया गया, जबकि अंत में डॉ. सुमन रानी ने सभी का आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया। इस विशेष व्याख्यान में संस्कृत विभाग से डॉ. अर्चना एवं डॉ. सुमित, योग विभाग से डॉ. निलेश एवं डॉ. बबीता सहित अन्य विभागों के शिक्षक और लगभग 100 विद्यार्थी व शोधार्थी उपस्थित रहे।
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