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IRCTC Ticket Rule: ट्रेन टिकट में उम्र भरने में हुई छोटी सी चूक, राजधानी के यात्री पर रेलवे ने ठोक दिया ₹7035 का जुर्माना

IRCTC Ticket Rule: ट्रेन टिकट में उम्र भरने में हुई छोटी सी चूक, राजधानी के यात्री पर रेलवे ने ठोक दिया ₹7035 का जुर्माना

IRCTC Ticket Rule: ट्रेन टिकट में उम्र भरने में हुई छोटी सी चूक, राजधानी के यात्री पर रेलवे ने ठोक दिया ₹7035 का जुर्माना

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AAmandeep Singh

IRCTC Ticket Rule: डिजिटल दौर में घर बैठे ट्रेन का टिकट बुक करना जितना आसान हो गया है, उतनी ही बढ़ गई है एक छोटी सी लापरवाही की कीमत। जल्दबाजी में की गई एक मामूली सी चूक किस कदर जेब पर भारी पड़ सकती है, इसका खामियाजा बेंगलुरु से नागपुर की यात्रा कर रहे एक शख्स को भुगतना पड़ा।

सफर के दौरान सब कुछ ठीक था, लेकिन जब टिकट चेकिंग स्टाफ (TTE) की नजर उनके चार्ट पर पड़ी, तो पूरा मामला ही पलट गया। वैध टिकट और पुख्ता सरकारी पहचान पत्र होने के बावजूद यात्री पर ₹7,035 का जुर्माना ठोक दिया गया। इस घटना ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि क्या क्लर्कल गलतियों पर रेलवे का इतना सख्त रवैया जायज है?

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टीटीई ले गया पैंट्री कार में, फिर थमाया जुर्माने का लंबा-चौड़ा बिल

पीड़ित यात्री रमाकांत ने सोशल मीडिया पर अपने इस कड़वे अनुभव को साझा करते हुए पूरी कहानी बयां की है। उन्होंने बताया कि वह 23 जून 2026 को बेंगलुरु से नागपुर जाने वाली राजधानी एक्सप्रेस (ट्रेन संख्या 22691) के सेकेंड एसी (2AC) कोच में यात्रा कर रहे थे। रूटीन चेकिंग के दौरान टीटीई ने उनकी टिकट देखी और उन्हें अपने साथ पैंट्री कार में चलने को कहा।

वहां पहुंचने पर उनसे अतिरिक्त ₹7,035 जमा करने की मांग की गई। अचानक इतनी बड़ी रकम मांगे जाने पर जब रमाकांत ने कारण जानना चाहा और सुरक्षा के लिहाज से मोबाइल से वीडियो रिकॉर्डिंग शुरू की, तो स्टाफ ने उन्हें बलपूर्वक रोकने की कोशिश की।

24 की जगह दर्ज हो गई थी 1 साल उम्र, किराए में नहीं लिया था कोई लाभ

काफी बहसबाजी के बाद जब मामले की तह की जांच हुई, तो पता चला कि टिकट बुकिंग के वक्त रमाकांत से एक अनजानी भूल हो गई थी। उन्होंने अपनी वास्तविक उम्र 24 साल की जगह गलती से केवल ‘1 साल’ भर दी थी। रमाकांत का तर्क है कि यह महज एक मानवीय भूल थी, जिससे उन्होंने रेलवे को कोई वित्तीय नुकसान नहीं पहुंचाया, क्योंकि 1 साल के बच्चे के आधार पर उन्हें किराए में कोई रियायत (छूट) या फायदा नहीं मिला था।

उनके पास आधार या पैन कार्ड जैसे तमाम पुख्ता पहचान पत्र भी थे, जो साबित करते थे कि टिकट पर लिखा नाम उन्हीं का है। इसके बावजूद उनकी एक न सुनी गई और ₹3,589 की मूल टिकट पर ₹7,035 का जुर्माना जोड़कर उनसे कुल ₹10,624 वसूल लिए गए।

‘रेल मदद’ पर शिकायत का आया जवाब: ‘चार्ट बनने से पहले सुधरवाते गलती’

इस पूरी कार्रवाई से आहत होकर रमाकांत ने रेल मंत्रालय को टैग करते हुए अपनी रसीदें साझा कीं और ‘रेल मदद’ (RailMadad) पोर्टल पर आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई। इस पर रेलवे प्रशासन ने अपना पक्ष रखते हुए स्पष्ट किया कि टिकट चेकिंग स्टाफ ने नियमों के दायरे में रहकर ही कार्रवाई की है। रेलवे के मुताबिक, सफर के दौरान टिकट में दर्ज विवरण और यात्री की वास्तविक स्थिति में अंतर था।

प्रशासन ने यात्रियों को नसीहत देते हुए कहा कि यदि ऑनलाइन टिकट में नाम, उम्र या जेंडर में कोई गलती हो जाती है, तो चार्ट तैयार होने और यात्रा शुरू होने से पहले किसी भी नजदीकी पीआरएस (PRS) काउंटर पर जाकर उसे ठीक कराया जा सकता है। चूंकि रमाकांत ने ऐसा नहीं किया, इसलिए रेलवे एक्ट, 1989 की धारा 138 के तहत उन्हें ‘बिना उचित टिकट’ का यात्री माना गया और ईएफटी नंबर 0225318 के जरिए नियमानुसार जुर्माना वसूला गया। यह घटना उन सभी रेल यात्रियों के लिए एक बड़ी सीख है जो बिना दोबारा जांचे टिकट बुक कर सीधे सफर पर निकल पड़ते हैं।

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