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Jasmin Bhasin Hospitalized Dubai: एक्ट्रेस जैस्मीन भसीन अस्पताल में भर्ती, जानें क्या है ‘टर्मिनल इलिटिस’ जिसने बढ़ाई एक्ट्रेस की मुश्किलें

Jasmin Bhasin Hospitalized Dubai: एक्ट्रेस जैस्मीन भसीन अस्पताल में भर्ती, जानें क्या है 'टर्मिनल इलिटिस' जिसने बढ़ाई एक्ट्रेस की मुश्किलें

एक्ट्रेस जैस्मीन भसीन अस्पताल में भर्ती, जानें क्या है ‘टर्मिनल इलिटिस’

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GGaganpreet Kaur

Jasmin Bhasin Hospitalized Dubai: ग्लोमर दुनिया की जानी-मानी अभिनेत्री जैस्मीन भसीन की सेहत को लेकर एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आई है। अपने जन्मदिन के सिलसिले में दुबई गईं जैस्मीन को अचानक पेट में असहनीय दर्द और गंभीर संक्रमण (इंफेक्शन) के चलते वहां के एक अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। डॉक्टरों की जांच में सामने आया है कि अभिनेत्री ‘टर्मिनल इलिटिस’ नाम की बीमारी से जूझ रही हैं। इस खबर के बाहर आते ही उनके फैंस जहां जल्द ठीक होने की दुआएं मांग रहे हैं, वहीं आम लोगों के बीच यह उत्सुकता बढ़ गई है कि आखिर यह बीमारी क्या है और यह कितनी खतरनाक हो सकती है। जैस्मीन फिलहाल डॉक्टरों की निगरानी में हैं और आगे के इलाज के लिए भारत लौट आई हैं।

समझिए क्या होती है आंतों की यह अंदरूनी सूजन

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चिकित्सीय भाषा में समझें तो हम जो भी भोजन करते हैं, वह पचने के लिए हमारी छोटी और बड़ी आंत से होकर गुजरता है। हमारी छोटी आंत का जो सबसे आखिरी हिस्सा बड़ी आंत से जुड़ता है, उसे ‘टर्मिनल इलियम’ कहा जाता है। जब किसी संक्रमण, खान-पान की गड़बड़ी या अन्य कारणों से इस खास हिस्से में तीव्र सूजन आ जाती है, तो उस मेडिकल कंडीशन को टर्मिनल इलिटिस कहते हैं। डॉक्टरों के मुताबिक, यह अपने आप में कोई स्वतंत्र बीमारी नहीं है, बल्कि शरीर के भीतर पल रहे किसी अन्य गंभीर इंफेक्शन या आंतों के पुराने विकारों (जैसे क्रोहन डिजीज) का एक बड़ा चेतावनी संकेत होती है।

इन लक्षणों को सामान्य गैस या बदहजमी समझने की भूल न करें

इस बीमारी के शुरुआती लक्षण काफी हद तक पेट की आम समस्याओं जैसे ही लगते हैं, यही वजह है कि लोग इसे अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। अगर किसी व्यक्ति को नाभि के निचले या दाहिने हिस्से में लगातार तेज दर्द हो रहा हो, बार-बार दस्त (डायरिया) की शिकायत हो रही हो, जी मिचलाने के साथ उल्टियां आ रही हों, या बिना किसी डाइटिंग के वजन तेजी से गिरने लगे, तो यह आंतों की गंभीर सूजन का इशारा हो सकता है। कुछ गंभीर मामलों में पीड़ित के मल के साथ खून भी आने लगता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे लक्षणों को घरेलू नुस्खों या खुद से पेनकिलर खाकर दबाने की गलती बिल्कुल नहीं करनी चाहिए।

जांच की सटीक कड़ियां और इलाज का तरीका

टर्मिनल इलिटिस का शत-प्रतिशत पता केवल लक्षणों को देखकर नहीं लगाया जा सकता। इसके लिए गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट (पेट रोग विशेषज्ञ) मरीज के खून की जांच, पेट का सीटी स्कैन या फिर एंडोस्कोपी और कोलोनोस्कोपी जैसी आधुनिक जांचों का सहारा लेते हैं। एक बार जब यह साफ हो जाता है कि सूजन की असली वजह क्या है—जैसे कि यह किसी बैक्टीरिया के कारण है या ऑटोइम्यून समस्या है—तभी इलाज की दिशा तय होती है। राहत की बात यह है कि अगर सही समय पर बीमारी पकड़ में आ जाए, तो एंटीबायोटिक्स, सही खान-पान और उचित दवाओं के कॉम्बिनेशन से मरीज बहुत जल्द पूरी तरह स्वस्थ हो जाता है।

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