Jio Platforms Share Listing: जियो प्लेटफॉर्म्स ने शेयर बाजार में दमदार शुरुआत की है। कंपनी का शेयर ₹1,119 के इश्यू प्राइस के मुकाबले ₹1,358 पर लिस्ट हुआ, यानी निवेशकों को लिस्टिंग के समय करीब 21% का फायदा मिला। इस लिस्टिंग के साथ कंपनी का मार्केट कैप ₹12.50 लाख करोड़ बताया गया है। बाजार पूंजीकरण के आधार पर जियो प्लेटफॉर्म्स देश की सबसे बड़ी कंपनियों में शामिल हो गई है। लिस्टिंग के मौके पर रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी भावुक नजर आए। उनके बेटे अनंत अंबानी ने जियो की कामयाबी का जिक्र करते हुए कहा कि कंपनी की सफलता में देश के लोगों का बड़ा योगदान है। अनंत के संबोधन में परिवार की विरासत, लोगों के भरोसे और जियो के सफर का जिक्र हुआ।
जियो प्लेटफॉर्म्स की लिस्टिंग के अवसर पर अनंत अंबानी ने कंपनी की सफलता को देश के लोगों से जोड़ते हुए कहा, “जियो को पूरे देश का आशीर्वाद मिला है। मां ने कहा ‘जियो मेरे लाल’, दादी ने कहा ‘जुग जुग जियो’ और दोस्तों ने कहा ‘जियो यार’।” अनंत ने कहा कि जियो को भारत की जनता ने बनाया है। उनके मुताबिक, देश के लोगों के सपनों को पूरा करना ही उनका असली सपना है। इस संबोधन में जियो की पहचान और कंपनी के विकास में आम लोगों की भूमिका पर जोर दिया गया। अनंत की बातें सुनकर मुकेश अंबानी भावुक हो गए। जियो ने दूरसंचार बाजार में अपनी सेवाओं के जरिए बड़ी पहचान बनाई है। कंपनी की लिस्टिंग को निवेशकों के लिए भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे कारोबार के मूल्यांकन और शेयर बाजार में उसकी स्थिति का नया आकलन सामने आया है।
₹12.50 लाख करोड़ का मार्केट कैप, बड़ी कंपनियों के बीच जियो
दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, जियो प्लेटफॉर्म्स का मार्केट कैप ₹12.50 लाख करोड़ तक पहुंच गया। रिलायंस इंडस्ट्रीज का मार्केट कैप ₹15.99 लाख करोड़ बताया गया है, जबकि एयरटेल का बाजार पूंजीकरण ₹12.10 लाख करोड़ है। इन आंकड़ों के आधार पर जियो प्लेटफॉर्म्स बाजार पूंजीकरण के लिहाज से रिलायंस के बाद दूसरे स्थान पर बताई गई है। मार्केट कैप किसी कंपनी के शेयरों की बाजार कीमत के आधार पर उसके कुल मूल्य को दर्शाता है। इसमें शेयर की कीमत बदलने के साथ उतार-चढ़ाव आता रहता है। इसलिए लिस्टिंग के दिन सामने आए बाजार पूंजीकरण को स्थायी आंकड़ा नहीं माना जा सकता।
जियो की लिस्टिंग का असर रिलायंस समूह की बाजार में कुल स्थिति पर भी पड़ा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, रिलायंस समूह की सभी सूचीबद्ध कंपनियों का संयुक्त मार्केट कैप ₹28.9 लाख करोड़ बताया गया है। इसकी तुलना में टाटा समूह का संयुक्त मार्केट कैप ₹25.6 लाख करोड़ और अडाणी समूह का ₹16.6 लाख करोड़ बताया गया। इन आंकड़ों के आधार पर रिलायंस समूह आगे रहा।
लिस्टिंग के बाद शेयर बेचें या लंबे समय तक रखें?
लिस्टिंग के बाद निवेशकों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि मुनाफा लेकर शेयर बेच देना चाहिए या भविष्य की संभावनाओं को देखते हुए उसे पोर्टफोलियो में बनाए रखना चाहिए। बाजार विशेषज्ञों के हवाले से दी गई सलाह के मुताबिक, जिन निवेशकों ने केवल लिस्टिंग गेन के लिए पैसा लगाया था, वे मुनाफा वसूलने पर विचार कर सकते हैं। वहीं, लंबे समय के निवेशकों को कंपनी के कारोबार और भविष्य की संभावनाओं का आकलन करके फैसला लेने की सलाह दी गई है।
कुछ विशेषज्ञों ने जियो प्लेटफॉर्म्स के शेयर के लिए ₹1,500 से ₹1,800 तक का संभावित स्तर बताया है। हालांकि, यह अनुमान है, गारंटी नहीं। शेयर की कीमत बाजार की स्थिति, कंपनी के वित्तीय नतीजों, कारोबार की वृद्धि और निवेशकों की मांग से प्रभावित हो सकती है। इसलिए केवल संभावित लक्ष्य के आधार पर निवेश का फैसला करना जोखिम भरा हो सकता है। लिस्टिंग के दिन शेयर में उतार-चढ़ाव भी देखने को मिल सकता है। ऐसे में निवेशकों को जल्दबाजी में खरीद-बिक्री करने के बजाय कंपनी के मूल्यांकन, वित्तीय प्रदर्शन और अपने निवेश के उद्देश्य पर ध्यान देना चाहिए। किसी भी निवेश में नुकसान की आशंका बनी रहती है।
नए निवेशक अभी शेयर खरीदें या इंतजार करें?
जिन निवेशकों ने आईपीओ में हिस्सा नहीं लिया, उनके सामने अब बाजार से शेयर खरीदने का विकल्प है। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, लिस्टिंग के शुरुआती दौर में शेयर की कीमत में तेज बदलाव हो सकता है। ऐसे में बिना मूल्यांकन किए तुरंत खरीदारी करने से बचने की सलाह दी गई है। यदि शेयर की कीमत में गिरावट आती है, तो कुछ निवेशक चरणबद्ध तरीके से खरीदारी करने पर विचार कर सकते हैं। लेकिन यह रणनीति भी हर निवेशक के लिए सही हो, ऐसा जरूरी नहीं है। खरीदारी से पहले शेयर का मौजूदा मूल्यांकन, कंपनी की कमाई की संभावनाएं और निवेश की अवधि समझना जरूरी है। निवेशकों को यह भी देखना चाहिए कि वे कितना जोखिम उठा सकते हैं और पैसा कितने समय तक निवेश में रख सकते हैं। केवल लिस्टिंग में मिले शुरुआती मुनाफे या दूसरों के बताए लक्ष्य को देखकर फैसला लेने के बजाय अपने वित्तीय लक्ष्यों के अनुसार निवेश करना बेहतर रहता है।
आईपीओ को 22.19 गुना सब्सक्रिप्शन
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के मुताबिक, जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ को 21 से 23 अक्टूबर के बीच कुल 22.19 गुना सब्सक्रिप्शन मिला। यानी उपलब्ध शेयरों के मुकाबले निवेशकों ने कुल मिलाकर 22.19 गुना मांग दर्ज की। सबसे ज्यादा मांग योग्य संस्थागत खरीदारों (QIB) की श्रेणी में रही। इस श्रेणी को 70.55 गुना सब्सक्रिप्शन मिला। गैर-संस्थागत निवेशकों (NII) की श्रेणी 14 गुना सब्सक्राइब हुई, जबकि खुदरा निवेशकों की श्रेणी में 2.72 गुना आवेदन मिले। इन आंकड़ों से पता चलता है कि आईपीओ में संस्थागत निवेशकों की दिलचस्पी काफी अधिक रही। हालांकि, सब्सक्रिप्शन का स्तर अपने आप में भविष्य में शेयर की कीमत बढ़ने की गारंटी नहीं देता। लिस्टिंग के बाद शेयर का प्रदर्शन बाजार की मांग और कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन सहित कई कारकों पर निर्भर करेगा।
100 अरब डॉलर से अधिक मूल्य वाली कंपनियों के समूह में जियो
दिए गए विवरण के अनुसार, जियो प्लेटफॉर्म्स का मूल्यांकन 100 अरब डॉलर से अधिक होने के साथ उसे उन चुनिंदा कंपनियों में शामिल बताया गया है, जिन्हें उनके संस्थापक खुद संचालित करते हैं। इस संदर्भ में मेटा, अलीबाबा और एलन मस्क की स्पेसएक्स का भी जिक्र किया गया है। इस तरह का मूल्यांकन किसी कंपनी के आकार और निवेशकों की अपेक्षाओं को दर्शाता है, लेकिन इससे भविष्य की कमाई या शेयर के प्रदर्शन की निश्चितता साबित नहीं होती। निवेशकों के लिए कंपनी के कारोबार, प्रतिस्पर्धा और वित्तीय नतीजों पर नजर रखना जरूरी रहेगा।
जियो प्लेटफॉर्म्स की लिस्टिंग के साथ रिलायंस समूह की कुल बाजार पूंजी में बढ़ोतरी का दावा किया गया है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, समूह की सभी सूचीबद्ध कंपनियों का संयुक्त मार्केट कैप ₹28.9 लाख करोड़ है। वहीं, टाटा समूह का संयुक्त मार्केट कैप ₹25.6 लाख करोड़ बताया गया है। दोनों के बीच करीब ₹3.23 लाख करोड़ का अंतर है। अडाणी समूह ₹16.6 लाख करोड़ के संयुक्त मार्केट कैप के साथ तीसरे स्थान पर बताया गया है। ये आंकड़े समूह की सूचीबद्ध कंपनियों के बाजार मूल्य की तुलना करते हैं और शेयरों की कीमत में बदलाव के साथ बदल सकते हैं। जियो प्लेटफॉर्म्स की लिस्टिंग ने कंपनी के बाजार मूल्य, रिलायंस समूह की स्थिति और निवेशकों की दिलचस्पी को लेकर चर्चा बढ़ाई है। अब शेयर की आगे की चाल इस बात पर निर्भर करेगी कि कंपनी अपने कारोबार और वित्तीय प्रदर्शन के मोर्चे पर निवेशकों की उम्मीदों पर कितना खरा उतरती है।
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