Nitin Gadkari statement: केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाने वाले E20 ईंधन को लेकर चल रहे विवाद पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने मंगलवार को कहा कि E20 पेट्रोल के खिलाफ हुआ विरोध एक ‘पेड कैंपेन’ था। यानी उनके मुताबिक, इस विरोध को पैसे देकर चलाया गया था। उद्योग संगठन CII के एक कार्यक्रम में बोलते हुए गडकरी ने कहा कि करीब तीन महीने पहले E20 ईंधन को लेकर काफी विरोध हुआ था, लेकिन अब यह विरोध खत्म हो गया है। उन्होंने भारत की ऊर्जा जरूरतों का जिक्र करते हुए कहा कि इथेनॉल जैसे वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देने से देश को जीवाश्म ईंधन के आयात पर खर्च होने वाली विदेशी मुद्रा बचाने में मदद मिल सकती है।
यह बयान केंद्र सरकार की ओर से केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में संशोधन की अधिसूचना जारी किए जाने के एक दिन बाद आया। इन बदलावों के तहत ऐसे फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को अनुमति दी गई है, जो E100 यानी लगभग शुद्ध इथेनॉल तक पर चल सकते हैं। E20 पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल होता है। सरकार इस मिश्रण को कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने, प्रदूषण घटाने और कृषि आधारित ईंधन को बढ़ावा देने की नीति का हिस्सा मानती है। हालांकि, वाहन चालकों की ओर से माइलेज और पुराने वाहनों की अनुकूलता को लेकर सवाल उठाए जाते रहे हैं।
दो साल में बेहतर होंगे राजमार्ग, 700-800 परियोजनाओं की समीक्षा
E20 पेट्रोल पर बयान के साथ गडकरी ने देश के राजमार्गों की स्थिति और निर्माण गुणवत्ता को लेकर भी भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर कुछ राजमार्गों की खराब हालत को लेकर सामने आई शिकायतों को गंभीरता से लिया गया है। हाल ही में उन्होंने 700 से 800 परियोजनाओं की समीक्षा की है। गडकरी ने स्पष्ट किया कि राजमार्गों की गुणवत्ता के मामले में कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि अगले दो वर्षों में राजमार्गों का इस्तेमाल करने वाले लोगों को मौजूदा समस्याओं के कारण परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। राजमार्गों की गुणवत्ता का मुद्दा सड़क सुरक्षा और रोजाना यात्रा करने वाले लोगों के लिए अहम है। सड़क निर्माण में खामियां, खराब सतह और समय से मरम्मत नहीं होने जैसी समस्याएं वाहन चालकों के सफर और परिवहन लागत को प्रभावित कर सकती हैं। गडकरी के बयान के मुताबिक, सरकार इन समस्याओं को दूर करने पर ध्यान दे रही है।
हरदीप पुरी बोले- फिलहाल 20 प्रतिशत से ज्यादा इथेनॉल मिलाने की योजना नहीं
केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भी मंगलवार को इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को लेकर सरकार की स्थिति स्पष्ट की। दक्षिण गोवा में आयोजित 29वें एनर्जी टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन मीट के उद्घाटन के दौरान उन्होंने कहा कि फिलहाल पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण की मौजूदा 20 प्रतिशत सीमा बढ़ाने की कोई योजना नहीं है। पुरी ने कहा कि बायोफ्यूल और E20 पेट्रोल को लेकर गलत जानकारी फैलाई जा रही है। उन्होंने E20 से संबंधित चर्चाओं को एक सोची-समझी कहानी बताया। उनके मुताबिक, सरकार का लक्ष्य पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाना था और फिलहाल इसे इससे आगे बढ़ाने की इच्छा नहीं है।
सरकार इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने की रणनीति के तहत बढ़ावा दे रही है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। इस पर होने वाला खर्च देश के चालू खाता घाटे को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारकों में शामिल है। इथेनॉल का उत्पादन कृषि उत्पादों से किया जा सकता है। इसलिए इसके इस्तेमाल को बढ़ावा देने के पीछे किसानों के लिए अतिरिक्त बाजार तैयार करने और पेट्रोलियम ईंधन के विकल्प विकसित करने का उद्देश्य भी शामिल है।
E20 को लेकर क्यों उठे माइलेज और इंजन के सवाल?
E20 पेट्रोल को लेकर विवाद तब बढ़ा, जब कई वाहन चालकों ने शिकायत की कि इस ईंधन के इस्तेमाल से उनकी गाड़ियों का माइलेज घट रहा है। कुछ वाहन मालिकों ने पुराने वाहनों के इंजन और अन्य पुर्जों पर संभावित असर को लेकर भी चिंता जताई। इथेनॉल और पेट्रोल के ऊर्जा गुण अलग-अलग होते हैं। इसी वजह से वाहन की तकनीक, इंजन डिजाइन और ईंधन के अनुकूलन के आधार पर माइलेज में अंतर आ सकता है। पुराने वाहनों में E20 के इस्तेमाल को लेकर विशेष रूप से सवाल उठे हैं, जबकि उपभोक्ताओं ने कम इथेनॉल वाले पेट्रोल का विकल्प उपलब्ध कराने की मांग भी की है।
सरकार की ओर से पहले यह कहा गया है कि पुराने वाहनों में ईंधन दक्षता लगभग 3 से 5 प्रतिशत तक प्रभावित हो सकती है। साथ ही, सरकार का कहना रहा है कि निर्धारित मानकों के अनुरूप E20 के इस्तेमाल से बड़े पैमाने पर इंजन खराब होने के प्रमाण नहीं मिले हैं। हालांकि, वाहन चालकों की व्यक्तिगत शिकायतें माइलेज, वाहन की उम्र और तकनीकी अनुकूलता जैसे अलग-अलग पहलुओं से जुड़ी हो सकती हैं। इस विवाद में दो पक्ष सामने आए हैं। सरकार इथेनॉल मिश्रण को आयात खर्च कम करने, प्रदूषण घटाने और कृषि आधारित ईंधन को प्रोत्साहन देने की नीति के रूप में देखती है। दूसरी ओर, वाहन चालक माइलेज, पुराने इंजनों की अनुकूलता, ईंधन के विकल्प और संभावित अतिरिक्त खर्च को लेकर स्पष्टता चाहते हैं। गडकरी ने E20 के विरोध को ‘पेड कैंपेन’ बताया है, जबकि पुरी ने फिलहाल मिश्रण की सीमा 20 प्रतिशत पर ही रखने की बात कही है। ऐसे में उपभोक्ताओं के लिए ईंधन की उपलब्धता, वाहन निर्माता की सलाह और अपने वाहन के अनुरूप ईंधन के इस्तेमाल से जुड़ी जानकारी अहम बनी हुई है।
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