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Kaithal Farmers: भारत-अमेरिका FTA के विरोध में आंदोलन की चेतावनी, पेट्रोल-डीजल व रसोई गैस के दाम घटाने की मांग

Kaithal Farmers: भारत-अमेरिका FTA के विरोध में आंदोलन की चेतावनी, पेट्रोल-डीजल व रसोई गैस के दाम घटाने की मांग

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर हरियाणा के किसानों का अल्टीमेटम

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AAmandeep Singh

Kaithal Farmers: ढांड (नरेश ढांडा)। केंद्र सरकार की आर्थिक और व्यापारिक नीतियों के खिलाफ देश के अन्नदाताओं ने एक बार फिर बड़े आंदोलन की बिसात बिछानी शुरू कर दी है। सोमवार को ढांड स्थित कार्यालय में ‘आल इंडिया किसान खेत मजदूर संगठन’ की जिला कमेटी की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई।

जिलाध्यक्ष कामरेड राजकुमार सारसा की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में भारत-अमेरिका के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को लेकर तीखे तेवर अपनाए गए। किसान नेताओं ने साफ लफ्जों में चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने देश के हितों को ताक पर रखकर इस समझौते पर दस्तखत किए, तो अगले ही दिन पूरे देश की सड़कों पर आक्रोश का सैलाब उमड़ पड़ेगा।

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बैठक में विशेष रूप से पहुंचे राज्य कमेटी के सदस्य कामरेड बाबूराम ने कहा कि यह समझौता भारत के छोटे किसानों, खेतिहर मजदूरों और स्थानीय दुग्ध उत्पादकों की कमर तोड़कर रख देगा। विदेशी कंपनियों के भारतीय बाजार में सीधे दखल से हमारी घरेलू अर्थव्यवस्था पूरी तरह चरमरा जाएगी।

चंडीगढ़ की बैठक में बनी संयुक्त रणनीति, ‘रेल-रास्ता रोको’ का आह्वान

किसान नेताओं ने बताया कि इस लड़ाई को केवल एक संगठन तक सीमित नहीं रखा जाएगा। बीते 25 जून को चंडीगढ़ में विभिन्न धड़ों और किसान मंचों की एक साझा बैठक हुई थी, जिसमें इस व्यापार समझौते के खिलाफ एकजुट होकर राष्ट्रव्यापी आंदोलन चलाने पर सहमति बनी है। संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने भी साफ किया है कि कॉरपोरेट परस्त और जनविरोधी नीतियों के खिलाफ समान विचारधारा वाले सभी संगठनों को एक मंच पर लाया जाएगा।

आंदोलन की बड़ी तारीखें और रणनीतियां:

हस्ताक्षर होते ही विरोध: यदि केंद्र सरकार ने भारत-अमेरिका FTA पर मुहर लगाई, तो उसके ठीक अगले दिन देशव्यापी प्रदर्शन शुरू हो जाएंगे।

10 अगस्त को ‘महा-संग्राम’: संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर आगामी 10 अगस्त 2026 को पूरे देश में ‘विरोध दिवस’ मनाया जाएगा।

जेल भरो और चक्का जाम: इस आंदोलन के तहत देश के अलग-अलग राज्यों की परिस्थितियों के हिसाब से ‘रेल रोको’, ‘रास्ता रोको’ और ‘जेल भरो’ जैसे कड़े कदम उठाए जाएंगे।

किसान संगठन ने एक बार फिर प्रधानमंत्री से अपील की है कि वे देश के करोड़ों किसानों की आजीविका को संकट में डालने वाले इस समझौते से कदम पीछे खींचें। इसके साथ ही स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के मुताबिक C2 + 50 % के फॉर्मूले पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी देने, किसानों की मुकम्मल कर्ज माफी और पूर्व में किए गए सभी मुक्त व्यापार समझौतों को तत्काल रद्द करने की मांग को दोहराया गया।

“कच्चा तेल हुआ सस्ता, फिर भी जनता की जेब पर डाका”

बैठक के दूसरे सत्र में देश में लगातार बढ़ रही महंगाई और ईंधन की आसमान छूती कीमतों पर सरकार को घेरा गया। जिलाध्यक्ष कामरेड राजकुमार सारसा ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतें लगातार कम हो रही हैं, लेकिन देश के आम उपभोक्ताओं को इसका कोई फायदा नहीं मिल रहा है।

सारसा ने आरोप लगाया, “सरकारी और निजी तेल कंपनियां रोजाना करोड़ों रुपये का मुनाफा कूट रही हैं, जबकि देश का आम नागरिक, किसान और मध्यम वर्ग दो वक्त की रोटी के लिए संघर्ष कर रहा है। डीजल महंगा होने से खेती की लागत बढ़ गई है और रसोई गैस के सिलेंडरों ने घर का बजट बिगाड़ दिया है।” संगठन ने केंद्र और राज्य सरकार, दोनों से मांग की है कि पेट्रोल, डीजल और घरेलू एलपीजी (LPG) के दामों में तुरंत कटौती कर जनता को इस चौतरफा महंगाई से राहत दी जाए।

इस रणनीतिक बैठक में जिला कमेटी के वरिष्ठ सदस्य कामरेड दर्शन सिंह, संजू, सलिंदर कुमार समेत कई स्थानीय पदाधिकारी और सक्रिय कार्यकर्ता मौजूद रहे, जिन्होंने गांव-गांव जाकर 10 अगस्त के प्रदर्शन को ऐतिहासिक बनाने का संकल्प लिया।

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