Karnal News: हरियाणा के करनाल में सोमवार को हर्ष एनकाउंटर प्रकरण को लेकर रोड़ समाज का बड़ा गुस्सा सड़कों पर देखने को मिला। प्रदेश के कोने-कोने से पहुंचे हजारों लोगों ने एकजुट होकर सरकार और पुलिस प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। करनाल के पुराने बस स्टैंड के पास स्थित रोड़ धर्मशाला में एकत्रित होने के बाद प्रदर्शनकारियों ने जिला सचिवालय तक विशाल पैदल मार्च निकाला। इस दौरान न्याय की मांग को लेकर जमकर नारेबाजी की गई और जिला प्रशासन के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया।
तीन प्रमुख मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा
प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे अखिल भारतीय रोड़ महासभा के प्रदेश अध्यक्ष बलकार सिंह पुंडरी ने स्पष्ट किया कि समाज अब आर-पार की लड़ाई के मूड में है। उन्होंने सरकार के सामने तीन प्रमुख शर्तें रखी हैं। पहली मांग यह है कि करनाल के स्थानीय विधायक जगमोहन आनंद इस मामले में समाज से सार्वजनिक रूप से माफी मांगें और अपने पद से इस्तीफा दें। दूसरी मांग पूरे एनकाउंटर प्रकरण की निष्पक्ष सीबीआई (CBI) जांच कराने की है। वहीं, तीसरी मांग के तहत जांच में दोषी पाए जाने वाले पुलिस अधिकारियों पर सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई करने की बात कही गई है।
“अदालतें किस लिए हैं? दोषी था तो कानून के तहत सजा मिलती”
अध्यक्ष बलकार सिंह पुंडरी ने न्यायिक प्रक्रिया की अनदेखी पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा, “हम यह नहीं कह रहे कि हर्ष निर्दोष था या उससे कोई गलती नहीं हुई। लेकिन अगर उसके खिलाफ कोई आरोप थे, तो उसे गिरफ्तार कर अदालत के सामने पेश किया जाना चाहिए था। देश में संविधान, न्यायपालिका और अदालतें इसीलिए हैं।
यदि अदालत उसे दोषी ठहराती तो समाज फैसला स्वीकार करता। लेकिन पुलिस द्वारा जान ले लेना किसी भी तरह से न्यायसंगत नहीं है।” उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर पुलिस ने यह कार्रवाई किसके दबाव में की, इसकी सच्चाई केवल एक स्वतंत्र जांच एजेंसी ही सामने ला सकती है।
वादाखिलाफी से नाराज समाज जिला सचिवालय के बाहर धरने पर बैठा
रोड़ महासभा ने बताया कि इससे पहले मुख्यमंत्री से हुई बातचीत के दौरान सरकार ने 16 अगस्त तक का समय मांगा था और कार्रवाई का आश्वासन दिया था। हालांकि, निर्धारित समयसीमा समाप्त होने के बाद भी जब कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो समाज को मजबूरन सड़कों पर उतरना पड़ा।
प्रदर्शनकारी जुलूस के रूप में जिला सचिवालय पहुंचे और वहां मुख्य गेट के बाहर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए। महासभा ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक मामले की जांच सीबीआई को नहीं सौंपी जाती, तब तक समाज के मन में उठ रहे सवालों और आक्रोश का समाधान नहीं हो सकेगा।
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