Karnal Sarpanch Suspended: हरियाणा के करनाल जिले में पंचायती राज संस्थाओं में जारी भ्रष्टाचार और वित्तीय धांधली के खिलाफ प्रशासनिक शिकंजा कसता नजर आ रहा है। घरौंडा खंड की ग्राम पंचायत हसनपुर में वित्तीय अनियमितताओं और सरकारी फंड के कथित दुरुपयोग के मामले में बड़ी कार्रवाई हुई है। करनाल के उपायुक्त (DC) डॉ. आनंद कुमार शर्मा ने पद का दुरुपयोग करने और रिकॉर्ड पेश न करने के आरोपों के चलते हसनपुर की सरपंच मंजू रानी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इसके साथ ही पंचायत की चल-अचल संपत्ति का प्रभार बहुमत प्राप्त पंच को सौंपने का फरमान जारी किया गया है।
बिना एस्टीमेट, टेंडर और जियो टैगिंग के बांट दिए लाखों रुपये
मामले का खुलासा खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी (BDPO) घरौंडा की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के बाद हुआ। रिपोर्ट के अनुसार, ग्राम पंचायत द्वारा करीब 17.80 लाख रुपये का भुगतान निर्धारित नियमों, कायदों और वैधानिक दस्तावेजों के बिना ही कर दिया गया। विभागीय पड़ताल में सामने आया कि इस बड़े भुगतान के समर्थन में न तो कोई एस्टीमेट तैयार किया गया था, न कोटेशन या टेंडर आमंत्रित किए गए और न ही मापक पुस्तिका (MB) या सत्यापित वाउचर उपलब्ध कराए गए। यहाँ तक कि जिन कार्यस्थलों पर काम होना दिखाया गया था, वहाँ साक्ष्य के रूप में अनिवार्य जियो-टैग तस्वीरें तक रिकॉर्ड में गायब मिलीं।
शामलात भूमि की लेवलिंग पर दिखाए 17.80 लाख, बाजार दर से ज्यादा खर्च का दावा
जांच में मुख्य रूप से पंचायत की करीब 95 एकड़ शामलात जमीन की कंप्यूटर लेवलिंग के नाम पर हुए भारी-भरकम खर्च पर भी गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। कृषि कार्यों के लिए पट्टे पर दी जाने वाली इस शामलात जमीन को समतल कराने के नाम पर करीब 17.80 लाख रुपये का खर्च दिखाया गया था। प्रशासनिक जांच में इस खर्च को निर्धारित सरकारी दरों और वास्तविक बाजार मूल्य की तुलना में काफी बढ़ा-चढ़ाकर दर्शाया गया पाया गया, जिससे वित्तीय गबन का अंदेशा और गहरा गया।
नोटिस के बावजूद नहीं जमा कराए 25 लाख, एसडीएम संभालेंगे जांच की कमान
प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक, सरपंच मंजू रानी को बार-बार निर्देश देने और कारण बताओ नोटिस जारी करने के बावजूद उन्होंने 21 प्रतिशत ब्याज सहित कुल 25,27,826 रुपये की रिकवरी राशि जमा नहीं करवाई। यही नहीं, जांच के लिए जरूरी पूरा रिकॉर्ड भी खंड कार्यालय में प्रस्तुत नहीं किया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए उपायुक्त ने सरपंच को निलंबित करते हुए घरौंडा के उपमंडल अधिकारी (नागरिक/SDM) को जांच अधिकारी नियुक्त किया है। एसडीएम को एक महीने के भीतर पूरे घटनाक्रम की गहन जांच पूरी कर अपनी रिपोर्ट डीसी कार्यालय को सौंपने की हिदायत दी गई है।
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