September 17, 2026

Kisan Rail Roko Punjab Protest : अमृतसर में रेलवे ट्रैक पर बैठे किसान, यात्री हो रहे परेशान

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Kisan Rail Roko Punjab Protest : अमृतसर में रेलवे ट्रैक पर बैठे किसान, यात्री हो रहे परेशान

अमृतसर में रेलवे ट्रैक पर बैठे किसान, यात्री हो रहे परेशान

Kisan Rail Roko Punjab Protest :  पंजाब की पटरियों पर एक बार फिर किसान आंदोलन का असर साफ दिखने लगा है। किसान-मजदूर मोर्चे के आह्वान पर राज्य के कई हिस्सों में आज दोपहर से ‘रेल रोको’ आंदोलन की शुरुआत हो चुकी है। प्रदर्शनकारी किसानों ने रेलवे ट्रैक पर डेरा डाल दिया है, जिसके चलते रेल यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। ब्यास रेलवे स्टेशन पर शताब्दी एक्सप्रेस को रोक दिए जाने की खबर है, जिससे यात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

कई जिलों में रेलवे ट्रैक जाम, प्रशासनिक स्तर पर बैठकों का दौर जारी

अमृतसर के देवीदासपुरा रेलवे ट्रैक पर किसान भारी संख्या में धरने पर बैठे हैं। अमृतसर के अलावा गुरदासपुर, मोगा, फिरोजपुर और संगरूर-सुनाम में भी किसानों ने रेल पटरियों को जाम कर दिया है। फिरोजपुर के मलावाला रेलवे स्टेशन पर किसान मजदूर संघर्ष कमेटी के बैनर तले दोपहर 12 बजे से फिरोजपुर-जालंधर रेलवे लाइन पर प्रदर्शनकारी डटे हुए हैं।

इस बीच, स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने बातचीत के रास्ते खुले रखे हैं। किसान मजदूर मोर्चा के वरिष्ठ नेता सरवन सिंह पंधेर और अन्य प्रमुख नेता इस वक्त आईजी बॉर्डर रेंज और अमृतसर के डिप्टी कमिश्नर के साथ अहम बैठक कर रहे हैं। इस बैठक में किसानों की मांगों और आंदोलन को समाप्त करने को लेकर चर्चा की जा रही है। किसान मजदूर संघर्ष कमेटी के पंजाब प्रधान सुखविंदर सिंह सभरा ने कहा कि यह संघर्ष किसानों और मजदूरों के हक की लंबी लड़ाई है, जिसे सरकार को गंभीरता से लेना होगा।

सरकार की अनदेखी से नाराज हैं अन्नदाता, मंत्रियों के घरों के बाहर भी चला प्रदर्शन

धरना दे रहे किसान नेताओं का कहना है कि सरकार उनकी मांगों को लगातार नजरअंदाज कर रही है। सरवन सिंह पंधेर ने बताया कि इससे पहले मुख्यमंत्री भगवंत मान को विस्तृत पत्र भेजकर समस्याओं से अवगत कराया गया था।

इसके बाद 31 अगस्त को डीसी कार्यालयों के बाहर बड़े स्तर पर प्रदर्शन कर मांग पत्र सौंपे गए थे। इतना ही नहीं, पिछले तीन दिनों से लगातार किसान पंजाब के कैबिनेट मंत्रियों के आवासों के बाहर भी धरना दे रहे थे, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई न होने के कारण उन्हें मजबूरन पटरियों पर उतरना पड़ा है।

क्या हैं किसान-मजदूर मोर्चे की मुख्य मांगें?

इस आंदोलन के केंद्र में कई गंभीर राष्ट्रीय और स्थानीय मुद्दे शामिल हैं, जिन पर किसान सरकार से स्पष्ट जवाब मांग रहे हैं:

  • प्रमुख नीतियां और समझौते: भारत-अमेरिका व्यापार समझौते, बिजली संशोधन अधिनियम और बीज संशोधन अधिनियम को लेकर सरकार अपना रुख स्पष्ट करे।
  • शंभू-खनौरी मोर्चा मुआवजा: आंदोलन के दौरान हुए नुकसान का मुआवजा दिया जाए, जहां करीब 3 करोड़ 77 लाख रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ था और सैकड़ों किसान घायल हुए थे।
  • एमएसपी की कानूनी गारंटी: मूंग, मक्का और आलू समेत पांच प्रमुख फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी का कानून बनाया जाए।
  • स्थानीय और पर्यावरणीय मुद्दे: पंजाब का गिरता भूजल स्तर, नदी के पानी की सुरक्षा, लैंड पूलिंग नीति, भारतमाला परियोजना के तहत भूमि अधिग्रहण और प्रीपेड स्मार्ट बिजली मीटरों के विरोध से जुड़े तमाम मुद्दे शामिल हैं।
  • प्रशासन के साथ चल रही बैठक के बाद, आज शाम 18 सितंबर को होने वाली समीक्षा बैठक में किसान नेता आगे की रणनीति का ऐलान करेंगे।

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