Kurukshetra News: नालों की सफाई पर कुरुक्षेत्र में बवाल, दुकानदारों और हड़ताली कर्मचारियों में तीखी झड़प

कुरुक्षेत्र में दुकानदारों और हड़ताली कर्मचारियों में तीखी झड़प
Kurukshetra News: धर्मनगरी कुरुक्षेत्र में पिछले करीब एक महीने से चल रही सफाई कर्मचारियों की हड़ताल अब सड़क पर सीधे टकराव की वजह बनने लगी है. गुरुवार को शहर के मुख्य बाजारों में उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो गई, जब दुकानदारों द्वारा अपने स्तर पर नालों से निकलवाए जा रहे कचरे को प्रदर्शनकारी कर्मचारियों ने जबरन रुकवा दिया. बात केवल काम रोकने तक सीमित नहीं रही; आरोप है कि कर्मचारियों ने नाले से बाहर निकाला गया तमाम कूड़ा-कचरा दोबारा नालों में ही उड़ेल दिया. इस हरकत के बाद स्थानीय दुकानदारों और प्रदर्शनकारियों के बीच जमकर हंगामा और तीखी बहस हुई.
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस की टीम तुरंत मौके पर पहुंची और बिगड़ते माहौल को संभालने का प्रयास किया. हालांकि, अपनी मांगों पर अड़े कर्मचारियों का गुस्सा शांत होने का नाम नहीं ले रहा था. पुलिस की मौजूदगी में भी दोनों पक्षों के बीच काफी देर तक तनातनी का माहौल बना रहा.
29 दिन से ठप है व्यवस्था, निजी प्रयास पर फूटा कर्मचारियों का गुस्सा
नगर निकाय के सफाई कर्मचारी अपनी विभिन्न लंबित मांगों को लेकर पिछले 29 दिनों से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं. इतने लंबे समय से सफाई व्यवस्था ठप होने के कारण शहर की सड़कों और बाजारों में गंदगी का अंबार लग चुका है. नालियां और नाले पूरी तरह अवरुद्ध हो चुके हैं, जिससे दुकानदारों का व्यापार और आम लोगों का निकलना दूभर हो रहा है.
गुरुवार को जब दुकानदारों के सब्र का बांध टूटा, तो उन्होंने मिलकर निजी स्तर पर बंद पड़े नालों को साफ कराने की पहल की. जैसे ही कर्मचारियों को भनक लगी कि बाजारों में सफाई का काम चल रहा है, वे बड़ी संख्या में लामबंद होकर मौके पर पहुंच गए. काम रुकवाने के बाद जिस तरह कूड़े को दोबारा नाले में धकेला गया, उसने दुकानदारों के आक्रोश को और भड़का दिया.
‘न खुद काम करेंगे, न किसी और को करने देंगे’ — कर्मचारियों का कड़ा रुख
प्रदर्शनकारी कर्मचारियों ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि जब तक राज्य सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक फैसला नहीं लेती, तब तक वे अपना आंदोलन वापस नहीं लेंगे. कर्मचारियों का कहना है कि प्रशासन या नागरिक अगर खुद सफाई व्यवस्था संभालने की कोशिश करेंगे, तो उसका हर स्तर पर कड़ा विरोध किया जाएगा.
कर्मचारी नेताओं का साफ कहना है, “जब तक हमारी मांगें पूरी नहीं होतीं, न तो हम खुद झाड़ू उठाएंगे और न ही शहर में किसी दूसरे को कचरा उठाने या नालों की सफाई करने देंगे.” इस हठधर्मिता और पुलिस-प्रशासन की नाकामी के चलते अब कुरुक्षेत्र के आम नागरिकों और व्यापारियों की चिंताएं लगातार बढ़ती जा रही हैं.
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