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Kurukshetra triple murder case: कुरुक्षेत्र ट्रिपल मर्डर केस में राजस्थान के 9 बदमाश दोषी करार, दो महिलाएं बरी

GGaganpreet Kaur
Kurukshetra triple murder case: कुरुक्षेत्र ट्रिपल मर्डर केस में राजस्थान के 9 बदमाश दोषी करार, दो महिलाएं बरी

कुरुक्षेत्र ट्रिपल मर्डर केस में राजस्थान के 9 बदमाश दोषी करार

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Kurukshetra triple murder case: हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले में न्याय की लंबी प्रक्रिया के बाद लगभग साढ़े 8 साल पुराने बहुचर्चित त्रिपद हत्याकांड (triple murder) और डकैती के मामले में बड़ा फैसला सामने आया है। स्थानीय अदालत ने कुरुक्षेत्र के पिंडारसी गांव में हुए इस सनसनीखेज मामले में राजस्थान के विभिन्न जिलों से ताल्लुक रखने वाले 9 आरोपियों को दोषी करार दिया है। हालांकि, इस मामले में आरोपी बनाई गईं दो महिलाओं—बरखा और मथुरा—को साक्ष्यों के आधार पर बरी कर दिया गया है। कोर्ट ने सभी दोषियों की सजा पर अपना फैसला मंगलवार के लिए सुरक्षित रखा है, जिस पर आज स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।

दोषी ठहराए गए लोगों में मुख्य रूप से राजस्थान के दौसा, भरतपुर और जयपुर जिले के बदमाश शामिल हैं। कोर्ट द्वारा जिन लोगों को डकैती और हत्या के मामलों में दोषी माना गया है, उनमें दौसा के रामलाल, उसके दो सगे भाई बत्री और फौरकिया, भरतपुर के कमलेश, जयपुर के यादराम उर्फ बेरा, उसका भाई मुकेश, रमेश, हरकेश उर्फ राकेश और दौसा की मोडा पट्टी निवासी मीरा देवी शामिल हैं। इस कड़े फैसले से पीड़ितों के परिवारों को न्याय की उम्मीद बंधी है।

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21 मई 2018 की वो खौफनाक रात: डेरे पर बोला गया था धावा

यह पूरा मामला 21 मई 2018 की उस खौफनाक रात का है, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया था। कुरुक्षेत्र के पिंडारसी गांव से बाहर रेलवे लाइन के पास वाल्मीकि समुदाय के कुछ भेड़ पालक परिवारों ने अपना डेरा डाल रखा था। ये लोग करीब 500 भेड़-बकरियां और अन्य मवेशी पालकर अपने परिवार का पेट पालते थे। शातिर अपराधियों की नजर इन मवेशियों पर थी और उन्होंने लूटपाट के इरादे से इस डेरे को अपना निशाना बनाया।

उस रात हथियारों और लाठी-डंडों से लैस होकर आए बदमाशों ने डेरे पर धावा बोल दिया। झुग्गी के अंदर सो रहे 80 वर्षीय बुजुर्ग अर्जुन सिंह, 55 वर्षीय राजाराम और 30 वर्षीय युवक संदीप को बदमाशों ने बेरहमी से बंधक बना लिया। आरोपियों ने तीनों के हाथ-पैर बांध दिए और उनके मुंह पर टेप चिपका दी ताकि वे शोर न मचा सकें। इसके बाद बेरहमी से लाठियों-डंडों से उनकी पिटाई की और अधमरी हालत में उठाकर खेतों के पास बने एक गहरे गड्ढे में फेंक दिया।

ट्रेन की चपेट में आकर मारी गई थीं दर्जनों भेड़ें

हमलावरों ने क्रूरता की हदें पार करते हुए डेरे से करीब 400 भेड़ें लूट लीं और उन्हें लेकर फरार होने लगे। लेकिन जब वे उन मवेशियों को लेकर रेलवे ट्रैक पार करा रहे थे, तभी वहां से जयपुर-कुरुक्षेत्र इंटरसिटी एक्सप्रेस गुजर गई। ट्रेन की अचानक चपेट में आने से 50 से 60 भेड़ें मौके पर ही कटकर मर गईं और कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गईं। इसके बाद आरोपी बची हुई भेड़ों को कुरुक्षेत्र-कैथल रोड पर पहले से खड़े एक ट्रक में लादकर फरार हो गए।

अगली सुबह जब ट्रेन चालक ने रेलवे ट्रैक पर मवेशियों के शव देखे तो उसने ट्रेन रोककर स्थानीय लोगों को सूचना दी। इसके बाद ग्रामीणों और भेड़ पालकों को इस बड़ी घटना का पता चला। जब डेरे पर तलाश की गई तो अर्जुन सिंह, राजाराम और संदीप गायब मिले। पुलिस और ग्रामीणों ने जब आसपास खोजबीन की, तो वे तीनों खेतों के पास बने गड्ढे में गंभीर हालत में मिले। अर्जुन सिंह और राजाराम दम तोड़ चुके थे, जबकि संदीप सांसे ले रहा था। उसे तुरंत एलएनजेपी अस्पताल और बाद में पीजीआई रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी भी मौत हो गई। इस लंबी कानूनी लड़ाई के बाद अब अदालत ने इस मामले में बड़ा फैसला सुनाया है।

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