Mahendragarh News: हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय महेंद्रगढ़ के समाजशास्त्र विभाग द्वारा ’सामाजिक सुरक्षा एवं सामाजिक-आर्थिक विकासः एक अनुभवजन्य अध्ययन’ विषय पर विचार-गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें गुरुग्राम स्थित आईआईएलएम के स्कूल ऑफ मैनेजमेंट के अर्थशास्त्र विभाग में सहायक आचार्य डॉ. मोहम्मद राशिद ने मुख्य वक्ता के रूप में विद्यार्थियों को संबोधित किया।
कार्यक्रम में सामाजिक सुरक्षा की आर्थिक विकास, मानव विकास तथा समावेशी समाज के निर्माण में भूमिका पर विचार-विमर्श किया।
कार्यक्रम का संचालन समाजशास्त्र विभाग की सहआचार्य डॉ. रीमा गिल ने किया। उन्होंने विषय की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। डॉ. राशिद ने कहा कि सामाजिक सुरक्षा को केवल सरकार द्वारा कल्याणकारी योजनाओं पर किए जाने वाले व्यय के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि यह व्यक्तियों और परिवारों को आर्थिक एवं सामाजिक अनिश्चितताओं से बचाने का एक आवश्यक माध्यम है।
डॉ. राशिद ने सामाजिक सुरक्षा के कानूनी एवं मानवाधिकार संबंधी आधारों पर चर्चा करते हुए सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020, मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा तथा आर्थिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक अधिकारों पर अंतरराष्ट्रीय अनुबंध का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सामाजिक संरक्षण मानव गरिमा, सामाजिक न्याय और सम्मानजनक जीवन स्तर के अधिकार को सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
डॉ. राशिद ने वर्ष 1991 से 2019 तक के आंकड़ों पर आधारित अपने अनुभवजन्य अध्ययन के माध्यम से डॉ. राशिद ने भारत में सामाजिक सुरक्षा पर व्यय, आर्थिक विकास, सामाजिक-आर्थिक प्रगति और मानव विकास के बीच संबंधों का विश्लेषण प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम में भारत की प्रमुख सामाजिक सुरक्षा एवं कल्याणकारी योजनाओं पर भी चर्चा की गई। डॉ. राशिद ने असंगठित क्षेत्र एवं प्लेटफॉर्म आधारित कामगारों के सीमित सामाजिक सुरक्षा कवरेज, युवाओं में बेरोजगारी और कल्याणकारी योजनाओं की दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता से जुड़े मुद्दों का उल्लेख किया। कार्यक्रम के अंत में समाजशास्त्र विभाग की डॉ. तन्वी भाटी ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।
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