Mahendragarh News: महेंद्रगढ़ जिले के गांव जाट पाली स्थित हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय (CUH) के हिंदी विभाग के एक पीएचडी शोधार्थी ने एक गाइड और विभाग के शिक्षकों पर पढ़ाई पूरी न करने देने और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है।
इस मामले के विरोध में सोमवार को बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने ब्लॉक-4 के बाहर तीन घंटे तक जोरदार धरना दिया। विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए मामले में त्वरित हस्तक्षेप करने और शोधार्थी का शोध कार्य बिना किसी बाधा के पूरा कराने की मांग की।
पीड़ित शोधार्थी मनोज ने बताया कि वह हिंदी विभाग में पीएचडी द्वितीय वर्ष का छात्र है। उसका आरोप है कि 19 मार्च 2025 को क्लास के दौरान एक प्रोफेसर ने उसके साथ जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए अपमानजनक व्यवहार किया था। इस घटना के बाद उसने यूजीसी, हरियाणा के राज्यपाल, शिक्षा मंत्री, विश्वविद्यालय प्रशासन और ग्रीवेंस कमेटी (शिकायत समिति) को लिखित शिकायत दी थी।
मनोज का आरोप है कि इस शिकायत के बाद से ही उस पर पीएचडी पूरी न होने देने का लगातार दबाव बनाया जा रहा है। उसने यह भी बताया कि 21 सितंबर को गाइड ने उसे कार्यालय बुलाकर एक प्रार्थना पत्र लिखने का दबाव डाला और बात न मानने पर शोध कार्य रोकने की धमकी दी। विभाग के अन्य शिक्षकों पर भी उसका करियर बर्बाद करने के प्रयास का आरोप लगाया गया है।
कुलपति के आश्वासन पर समाप्त हुआ धरना
छात्रों के प्रदर्शन की सूचना मिलते ही कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार और उप कुलपति सुनील कुमार मौके पर पहुंचे। उन्होंने शोधार्थी मनोज और प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों की समस्याएं विस्तार से सुनीं। इस दौरान छात्र ने कुलपति के समक्ष तीन प्रमुख मांगें रखीं:
1. पूरे मामले में निष्पक्ष और पारदर्शी कार्रवाई की जाए।
2. शोधार्थी की पढ़ाई और शोध कार्य में किसी प्रकार की अड़चन या बाधा न आने दी जाए।
3. संबंधित प्रोफेसर से लिखित में माफी मंगवाई जाए।
कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार ने छात्रों को आश्वस्त किया कि तीन दिन के भीतर इस पूरे मामले का उचित समाधान निकाल लिया जाएगा। कुलपति के इस भरोसे के बाद विद्यार्थियों ने अपना धरना समाप्त कर दिया। हालांकि, छात्रों ने चेतावनी दी है कि यदि तय समय सीमा के भीतर न्यायसंगत समाधान नहीं हुआ, तो वे दोबारा प्रदर्शन करने के लिए विवश होंगे।
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