Rajasthan News: राजस्थान में सरकारी प्रक्रियाओं को सरल बनाने और प्राचीन पांडुलिपियों को संरक्षित करने की दिशा में चल रहे काम की प्रगति केंद्र सरकार के सामने रखी गई है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में प्रदेश की विकास प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाते हुए मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने मंगलवार को नई दिल्ली स्थित सेवा तीर्थ में कैबिनेट सचिव डॉ. टी.वी. सोमनाथन से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने डिरेगुलेशन एंड कम्प्लायंस रिडक्शन और ज्ञान भारतम् मिशन के तहत राजस्थान में हुए काम की जानकारी दी। मुख्य सचिव ने बताया कि राज्य ने नियामकीय प्रक्रियाओं को आसान बनाने के लिए पहले चरण में आवंटित सभी 23 प्राथमिकता क्षेत्रों में कार्रवाई पूरी कर ली है। दूसरे चरण में मिले 28 प्राथमिकता क्षेत्रों में से 24 पर की गई कार्रवाई को केंद्र की सहमति मिल चुकी है।
वी. श्रीनिवास के अनुसार, दूसरे चरण के शेष चार प्राथमिकता क्षेत्रों में से तीन में राज्य स्तर पर कार्रवाई जारी है, जबकि एक मामला केंद्र सरकार के स्तर पर विचाराधीन है। इन सुधारों का उद्देश्य सरकारी मंजूरियों और नियमों से जुड़ी अनावश्यक जटिलताओं को कम करना है। इसके तहत भवन निर्माण, उद्योगों की स्थापना और व्यावसायिक स्वीकृतियों से जुड़ी प्रक्रियाओं को सरल बनाने के कदम उठाए गए हैं। सरकार का लक्ष्य है कि कारोबार शुरू करने और निवेश करने वालों को कम नियामकीय बाधाओं का सामना करना पड़े। इससे प्रदेश में उद्योग और व्यापार के लिए अनुकूल माहौल तैयार करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
24.63 लाख पांडुलिपियों का सत्यापित सर्वे पूरा
मुख्य सचिव ने ज्ञान भारतम् मिशन की प्रगति साझा करते हुए बताया कि राजस्थान में अब तक 24,63,769 पांडुलिपियों का सत्यापित सर्वेक्षण पूरा किया जा चुका है। इनमें से करीब 1 लाख 61 हजार पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण भी हो चुका है। प्रदेश के 19 केंद्रों पर पांडुलिपियों को डिजिटल स्वरूप देने का काम जारी है। इस मिशन के तहत पांडुलिपियों की पहचान, सर्वेक्षण और संरक्षण के लिए विश्वविद्यालयों, पुस्तकालयों, मंदिरों, मठों, विभिन्न संस्थाओं और निजी पांडुलिपि धारकों के साथ समन्वय किया गया है। इससे अलग-अलग स्थानों पर उपलब्ध प्राचीन दस्तावेजों को चिह्नित कर उनके संरक्षण का काम आगे बढ़ाया जा रहा है।
ज्ञान भारतम् मिशन के तहत संस्कृत, अरबी, फारसी, प्राकृत, पाली और अपभ्रंश सहित विभिन्न भाषाओं में उपलब्ध पांडुलिपियों का सर्वेक्षण और डिजिटलीकरण किया जा रहा है। इन दस्तावेजों में मौजूद ज्ञान और ऐतिहासिक सामग्री को सुरक्षित रखने के लिए उन्हें डिजिटल रूप में उपलब्ध कराने पर जोर है। इस पहल का उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़ी सामग्री को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना है। डिजिटलीकरण से पुरानी पांडुलिपियों को संभालना और उन तक शोधकर्ताओं तथा विद्यार्थियों की पहुंच आसान बनाना संभव होगा।
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