Manimajra school road: चंडीगढ़ के मनीमाजरा में सरकारी स्कूल तक पहुंचने के लिए बच्चों को अब जर्जर और असुरक्षित रास्ते से गुजरने की परेशानी से राहत मिलने की उम्मीद है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सेक्टर-13 के पॉकेट नंबर-6 स्थित सरकारी मॉडल मिडिल स्कूल तक जाने वाली सड़क का निर्माण एक महीने के भीतर पूरा करने का निर्देश दिया है। सड़क निर्माण में देरी पर नाराजगी जताते हुए कोर्ट ने चंडीगढ़ नगर निगम से सवाल किया कि जब सड़क बनाने के लिए जरूरी तारकोल शहर में ही उपलब्ध है, तो छोटे से हिस्से का काम अब तक क्यों नहीं हुआ। सुनवाई के दौरान नगर निगम के अधीक्षण अभियंता धर्मेंद्र शर्मा ने अदालत को आश्वासन दिया कि सड़क का निर्माण एक महीने के भीतर पूरा कर दिया जाएगा। कोर्ट ने नगर निगम को अगली सुनवाई पर इस संबंध में अनुपालन हलफनामा दाखिल करने का निर्देश भी दिया है। अब निगम को बताना होगा कि निर्धारित समय में सड़क बनी या नहीं।
कच्चे और ढलानदार रास्ते से स्कूल पहुंचते हैं बच्चे
मुख्य न्यायाधीश अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति रोहित कपूर की खंडपीठ के सामने सुनवाई के दौरान स्कूल तक पहुंचने वाले रास्ते की स्थिति बताई गई। कोर्ट को बताया गया कि सड़क कच्ची, ऊबड़-खाबड़ और ढलानदार है। रास्ते पर गंदगी और झाड़ियां होने के कारण विद्यार्थियों को रोजाना परेशानी का सामना करना पड़ता है। इस सरकारी मॉडल मिडिल स्कूल में पहली से सातवीं कक्षा तक के बच्चे पढ़ते हैं। स्कूल में सुबह और शाम, दो पालियों में कक्षाएं लगती हैं। ऐसे में शाम की छुट्टी के समय बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी रहती है, खासकर तब जब रास्ते पर पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था नहीं है। सड़क की खराब हालत का असर केवल आने-जाने की सुविधा तक सीमित नहीं है। छोटे बच्चों को ऐसे रास्ते से गुजरना पड़ता है, जहां गंदगी, झाड़ियां और ढलान परेशानी बढ़ाते हैं। सड़क निर्माण पूरा होने से विद्यार्थियों और उन्हें स्कूल छोड़ने या लेने आने वाले अभिभावकों को राहत मिल सकती है।
स्कूल से 50-60 फीट दूर नाला, रोशनी की कमी भी उठाई गई
जनहित याचिका दाखिल करने वाले डेफाई जिंदल ने अदालत के सामने स्कूल तक पहुंचने वाले रास्ते की समस्याएं रखीं। उन्होंने बताया कि सड़क पर पर्याप्त रोशनी नहीं है, आसपास झाड़ियां उगी हुई हैं और कूड़ा जमा रहता है। इलाके में अस्थायी ढांचे और झुग्गियां भी मौजूद हैं। याचिका में स्कूल की चारदीवारी से करीब 50 से 60 फीट की दूरी पर नाला होने का मुद्दा भी उठाया गया। इन परिस्थितियों के चलते बच्चों के लिए स्कूल तक सुरक्षित पहुंचना मुश्किल बताया गया। खास तौर पर शाम की पाली में छुट्टी के समय रास्ते की स्थिति को लेकर चिंता जताई गई। ऐसे में सड़क का निर्माण और रास्ते की अन्य समस्याओं का समाधान स्कूल आने-जाने वाले बच्चों की सुरक्षा के लिहाज से अहम है। हालांकि, कोर्ट के सामने रखी गई सड़क और आसपास की परिस्थितियों से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए नगर निगम को निर्माण के साथ जरूरी व्यवस्थाओं पर भी ध्यान देना होगा।
तारकोल की कमी का दिया था हवाला, कोर्ट ने मांगा जवाब
इससे पहले मंगलवार को सड़क निर्माण का टेंडर जारी नहीं होने के मामले में अधिकारियों ने यूक्रेन में युद्ध के कारण तारकोल की कमी का हवाला दिया था। इस दलील के बाद हाईकोर्ट ने संबंधित अधिकारी को तलब किया था। बुधवार को सुनवाई के दौरान अधिकारी ने स्वीकार किया कि सड़क बनाने के लिए जरूरी तारकोल चंडीगढ़ में उपलब्ध है। इसके बाद कोर्ट ने सवाल उठाया कि जब निर्माण सामग्री शहर में मौजूद है, तो सड़क के छोटे से हिस्से का काम करने में क्या परेशानी है। अदालत की नाराजगी के बीच नगर निगम के अधीक्षण अभियंता धर्मेंद्र शर्मा ने एक महीने के भीतर सड़क निर्माण पूरा करने का आश्वासन दिया।
मामले में सड़क निर्माण में देरी और पहले दिए गए कारणों को लेकर सवाल उठे हैं। अब नगर निगम को अदालत में अपने आश्वासन के मुताबिक काम पूरा करने की स्थिति स्पष्ट करनी होगी। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने नगर निगम को अगली सुनवाई पर अनुपालन हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। इस हलफनामे में निगम को बताना होगा कि अदालत के आदेश के अनुसार सड़क का निर्माण पूरा किया गया है या नहीं। मामले की अगली सुनवाई 30 नवंबर 2026 को निर्धारित की गई है। ऐसे में नगर निगम के सामने एक महीने के भीतर सड़क निर्माण पूरा करने और अदालत को इसकी जानकारी देने की जिम्मेदारी है। मनीमाजरा के इस सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों और उनके अभिभावकों की नजर अब इस बात पर रहेगी कि सड़क का काम तय समय में पूरा होता है या नहीं।
Click Here👉 चंडीगढ़ की खबरें पढ़नें के लिए लिंक पर क्लिक करें

