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ब्रिक्स में मोदी ने ‘विशेषाधिकार के पिरामिड’ को ‘साझेदारी के मंच’ में बदलने का किया आह्वान

ब्रिक्स में मोदी ने 'विशेषाधिकार के पिरामिड' को 'साझेदारी के मंच' में बदलने का किया आह्वान

BRICS में मोदी बोले- संकटों में ग्लोबल साउथ सबसे आगे

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VVinita Kohli

Modi BRICS Summit: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को दो दिवसीय वार्षिक ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की शुरुआत करते हुए कहा कि विभिन्न चुनौतियों से निपटने के लिए ‘ग्लोबल साउथ’ को नियमों का पालन करने वाले के बजाय ”नियम तय करने वाला” बनना होगा। मोदी ने कहा, ”आज ग्लोबल साउथ वैश्विक संकटों में पहली पंक्ति में खड़ा है, लेकिन निर्णय लेने की प्रक्रिया में वह सबसे पीछे की पंक्ति में है। हमें इस ‘विशेषाधिकार के पिरामिड’ को ‘साझेदारी के मंच’ में बदलना होगा – एक ऐसा मंच जहां हर देश की आवाज हो, हर सदस्य की हिस्सेदारी हो और हर प्रयास के केंद्र में मानवता का विकास हो।” इस सम्मेलन में यूक्रेन और पश्चिम एशिया में जारी युद्धों के वैश्विक प्रभाव से विकासशील अर्थव्यवस्थाओं को बचाने पर विचार-विमर्श होने की उम्मीद है।

मोदी ने यहां शिखर सम्मेलन में अपने प्रारंभिक संबोधन में कहा कि ब्रिक्स ने वैश्विक मंच पर एक विशिष्ट पहचान स्थापित की है और यह गुट किसी के खिलाफ नहीं है। उनके इस बयान को अमेरिका और अन्य पश्चिमी शक्तियों के लिए एक संदेश के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने ने कहा, ”इस संबंध में, मेरा प्रस्ताव है कि हम संयुक्त रूप से वैश्विक शासन सुधार के लिए 10 प्रस्ताव तैयार करें, जिसका उद्देश्य अगले शिखर सम्मेलन तक उन्हें एक ब्रिक्स सुधार रोडमैप का रूप देना हो।” मोदी ने ये टिप्पणियां रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग, ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान, दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा, मलेशियाई प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम और इंडोनेशियाई राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो की उपस्थिति में कीं।

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शिखर सम्मेलन में भाग लेने वाले अन्य नेताओं में अबू धाबी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान, इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद अली, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फत्ताह अल-सीसी और वियतनामी प्रधानमंत्री ले मिन्ह हुंग शामिल हैं। उन्होंने कहा, ”वैश्विक शासन की वर्तमान संरचना एक पिरामिड की तरह दिखती है- सत्ता और निर्णय लेने की शक्ति शीर्ष पर केंद्रित है, जबकि निचले स्तरों में वे देश शामिल हैं जो इन निर्णयों से प्रभावित होते हैं और उन्हें आकार देने में असमर्थ हैं।” मोदी ने कहा कि दुनिया के सामने मौजूद विभिन्न चुनौतियों से निपटने के लिए ग्लोबल साउथ को ”नियम तय करने वाला” बनना होगा। प्रधानमंत्री ने ब्रिक्स गुट के व्यापक ढांचे के तहत वैश्विक शासन सुधार के लिए संयुक्त रूप से 10 सूत्रीय मसौदे का प्रस्ताव रखा। मोदी ने कहा कि अगले शिखर सम्मेलन तक इस मसौदे को अंतिम रूप दिया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा, ”इस मसौदे को तैयार करते समय हमें तीन प्रमुख पहलुओं पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए- प्रतिनिधित्व, संवेदनशीलता/त्वरित प्रतिक्रिया और नियम-निर्माण ।” ‘प्रतिनिधित्व’ पर विस्तार से बात करते हुए मोदी ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के सुधारों को अब और टाला नहीं जा सकता तथा इस पर बातचीत को एक निश्चित समयसीमा और स्पष्ट परिणामों के दायरे में लाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, ”इसी तरह, वित्तीय संस्थानों के भीतर मतदान शक्ति, नेतृत्व के पद और नीतिगत प्राथमिकताएं आज की आर्थिक वास्तविकताओं के अनुरूप होनी चाहिए। वैश्विक आर्थिक वृद्धि को गति देने वाले देशों को वैश्विक आर्थिक शासन को आकार देने में भी उचित भूमिका निभानी चाहिए।” अपने तीसरे बिंदु की व्याख्या करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भविष्य के वैश्विक नियमों को परिभाषित करने में समान भागीदारी सुनिश्चित करना अत्यंत महत्वपूर्ण है।

उन्होंने मौजूदा वैश्विक और क्षेत्रीय संकटों के कारण बढ़ते जोखिमों का सामना कर रहे नाविकों की सुरक्षा के लिए नाविक आपातकालीन सहायता नेटवर्क स्थापित करने की पुरजोर वकालत की। नयी दिल्ली में आयोजित यह शिखर सम्मेलन इसलिए भी अधिक महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि यह ऐसे समय में हो रहा है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया संकट (विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी) और ट्रंप प्रशासन की व्यापार तथा शुल्क नीतियों के प्रतिकूल प्रभावों का सामना कर रही है। ब्रिक्स अध्यक्ष के रूप में भारत ने खाद्य, ऊर्जा और आपूर्ति शृंखला सुरक्षा के व्यावहारिक समाधान तलाश कर ग्लोबल साउथ को अपने एजेंडे के केंद्र में रखा है, जिसका मुख्य उद्देश्य यूक्रेन और पश्चिम एशिया के संघर्षों के आर्थिक परिणामों से विकासशील देशों को बचाना है।

मोदी ने कहा, ”कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), साइबरस्पेस, अंतरिक्ष, जैव प्रौद्योगिकी और महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियां जैसे क्षेत्र न केवल भविष्य के अवसरों को आकार दे रहे हैं बल्कि भविष्य के नियमों को भी परिभाषित कर रहे हैं।” उन्होंने कहा, ”हमें ग्लोबल साउथ को ‘नियमों का पालन करने वाले’ से ‘नियम तय करने वाले’ में बदलने का प्रयास करना चाहिए।” प्रधानमंत्री ने वैश्विक व्यापार में नाविक समुदाय द्वारा निभाई जा रही महत्वपूर्ण भूमिका को भी रेखांकित किया और कहा कि उनकी सुरक्षा प्राथमिकता का विषय होनी चाहिए। उन्होंने कहा, ”नाविक वैश्विक व्यापार में भारी योगदान देते हैं, फिर भी अक्सर मुश्किल समय में उन्हें सहायता की कमी का सामना करना पड़ता है। मेरा प्रस्ताव है कि हम एक ‘नाविक आपातकालीन सहायता नेटवर्क’ स्थापित करें।” उन्होंने कहा, ”यह संबंधित देशों के समुद्री प्राधिकरणों और राजनयिक मिशनों को जोड़ेगा, जिससे आपातकालीन अलर्ट, चिकित्सा सहायता, परिजनों को सूचना देने और निकासी में मदद मिलेगी।”

फरवरी में पश्चिम एशिया संघर्ष शुरू होने के बाद से भारत होर्मुज जलडमरूमध्य के पास व्यापारिक जहाजों पर हुए ईरानी हमलों की आलोचना करता रहा है, जिनमें भारतीय नाविकों की जान गई है और वे घायल हुए हैं। पश्चिम एशिया संघर्ष में अब तक मारे गए 16 भारतीयों में 10 भारतीय नाविक शामिल हैं। हालांकि, मोदी के संबोधन का मुख्य जोर वैश्विक शासन संरचना में सुधार के आह्वान के साथ-साथ ब्रिक्स को और अधिक मजबूत बनाने के तरीको पर था। उन्होंने कहा, ”इस साल का ब्रिक्स शिखर सम्मेलन एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है। हम ब्रिक्स की 20वीं वर्षगांठ मना रहे हैं। मानव जीवन में 20 वर्ष की आयु परिपक्वता और जिम्मेदारी के एक नए चरण की शुरुआत का प्रतीक होती है।”

मोदी ने कहा कि ब्रिक्स भी अब अपने परिपक्वता के दौर में पहुंच गया है और इसने वैश्विक मंच पर एक विशिष्ट पहचान स्थापित की है। उन्होंने कहा, ”हम एक-दूसरे के दृष्टिकोण का सम्मान करते हैं और आम सहमति से आगे बढ़ते हैं। हम किसी का विरोध करके नहीं, बल्कि सबको साथ लेकर आगे बढ़ने का प्रयास करते हैं।” उन्होंने कहा, ”अब समय आ गया है कि हम ब्रिक्स के भीतर अपनी एकता और आम सहमति को वैश्विक मंच पर ठोस परिणामों में बदलें।” उन्होंने कहा, ”हमें अगले 20 वर्षों के लिए एक नए और महत्वाकांक्षी एजेंडे पर काम करने की जरूरत है। हमें इस प्रक्रिया की शुरुआत अपनी आंतरिक कार्य प्रणालियों से करनी होगी। यद्यपि ब्रिक्स की अध्यक्षता हर साल बदलती है, लेकिन इससे हमारी संस्थागत गति बाधित नहीं होनी चाहिए।” मोदी ने ‘ब्रिक्स निरंतरता एवं कार्यान्वयन तंत्र’ स्थापित करने का भी आह्वान किया।

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