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Green Crackers Identification: दिवाली पर कहीं नकली ग्रीन पटाखे तो नहीं खरीद रहे आप? ऐसे करें पहचान

Green Crackers Identification: दिवाली पर कहीं नकली ग्रीन पटाखे तो नहीं खरीद रहे आप? ऐसे करें पहचान

दिवाली पर कहीं नकली ग्रीन पटाखे तो नहीं खरीद रहे आप? ऐसे करें पहचान

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GGaganpreet Kaur

Green Crackers Identification: दिवाली के त्योहारी सीजन में दिल्ली-एनसीआर के बाजारों में पटाखों की दुकानें सज चुकी हैं, लेकिन इस बार खरीदारी करते समय थोड़ी सी लापरवाही आपका चालान कटवा सकती है या आपकी सेहत पर भारी पड़ सकती है। सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्देशों के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर में केवल वही पटाखे बेचे और फोड़े जा सकते हैं जो पर्यावरण के अनुकूल यानी CSIR-NEERI और PESO से विधिवत स्वीकृत ‘ग्रीन क्रैकर्स’ हैं। बाजार में सामान्य पटाखों को भी हरा रंग देकर या फर्जी रैपर में बेचे जाने की आशंका को देखते हुए प्रशासन और विशेषज्ञों ने ग्राहकों को खास सावधानी बरतने की सलाह दी है।

क्या होते हैं ग्रीन पटाखे? धुएं और हानिकारक रसायनों पर ऐसे लगती है लगाम

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आमतौर पर ग्रीन पटाखे दिखने में पारंपरिक पटाखों जैसे ही होते हैं, लेकिन इनकी रासायनिक संरचना काफी अलग होती है। वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR-NEERI) ने प्रदूषण के स्तर को घटाने के लिए SWAS (सेफ वाटर रीलीजर), SAFAL (सेफ मिनिमल एल्युमिनियम) और STAR (सेफ थर्माइट क्रैकर) जैसी विभिन्न श्रेणियां तैयार की हैं। इन पटाखों में बेरियम नाइट्रेट जैसे अत्यधिक विषैले रसायनों का प्रयोग नहीं होता, जिससे फटने के बाद इनसे निकलने वाले धुएं, सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड के उत्सर्जन में 30 से 35 प्रतिशत तक की कमी आती है।

क्यूआर कोड स्कैन करें और जांचें प्रामाणिकता, सिर्फ हरा डिब्बा काफी नहीं

अक्सर देखा जाता है कि मुनाफाखोर दुकानदार डिब्बे पर हरा रंग और फर्जी क्यूआर कोड छापकर सामान्य पटाखे महंगे दामों में बेच देते हैं। इससे बचने के लिए ग्राहकों को पैकेट पर छपे क्यूआर कोड को अपने स्मार्टफोन से स्कैन करके देखना चाहिए। स्कैन करते ही मोबाइल स्क्रीन पर निर्माता कंपनी का नाम, CSIR-NEERI का रजिस्ट्रेशन नंबर, PESO लाइसेंस संख्या, प्रोडक्ट का बैच नंबर और लैब टेस्ट सर्टिफिकेट की विस्तृत जानकारी आ जानी चाहिए। यदि क्यूआर कोड स्कैन करने पर कोई प्रामाणिक विवरण न दिखे या पैकेट पर छपी जानकारी से मेल न खाए, तो ऐसे पटाखों को बिल्कुल न खरीदें।

पक्का बिल लें और ऑनलाइन खरीदारी से बचें: नियम तोड़ने पर होगी सख्त कार्रवाई

सुप्रीम कोर्ट के 29 अक्टूबर 2026 के आदेश के तहत दिल्ली-एनसीआर में पटाखों की ऑनलाइन बिक्री और डिलीवरी पर पूरी तरह रोक है। साथ ही बेरियम युक्त पटाखों और किसी भी तरह की ‘लड़ियों’ (लड़ी वाले पटाखे) पर सख्त पाबंदी लगाई गई है। ग्राहकों को सलाह दी जाती है कि वे हमेशा लाइसेंस प्राप्त अधिकृत विक्रेताओं से ही पटाखे खरीदें और खरीदारी का पक्का बिल अवश्य लें। ध्यान रहे कि 9 नवंबर 2026 से दिल्ली-एनसीआर में पटाखों पर लागू पूर्ण प्रतिबंध वापस प्रभावी हो जाएगा। भले ही ये ग्रीन पटाखे हों, लेकिन इनसे भी आंशिक प्रदूषण होता ही है; इसलिए बच्चों, बुजुर्गों और सांस के मरीजों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इनका सीमित प्रयोग ही करें।

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