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Narnaul : मध्यरात्रि भगवान के जन्मोत्सव के साथ गूंजा ‘हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की’, श्रद्धालुओं में बंटी पंजीरी

ppravesh kaushik
Narnaul : मध्यरात्रि भगवान के जन्मोत्सव के साथ गूंजा 'हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की', श्रद्धालुओं में बंटी पंजीरी

मां चामुण्डा देवी मंदिर में स्लम एरिया के बच्चों द्वारा दि गई प्रस्तुती

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Narnaul : कृष्ण जन्मोत्सव का पर्व शहर में पूरी आस्था, उल्लास और भव्यता के साथ मनाया गया। इस पावन अवसर पर शहर के विभिन्न मंदिरों को आकर्षक विद्युत रोशनी और फूलों से दुल्हन की तरह सजाया गया था। जगह-जगह सजी भगवान श्रीकृष्ण की झांकियों के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा।

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इस दौरान मंदिरों में विशेष धार्मिक अनुष्ठान हुए और मध्य रात्रि भगवान के जन्मोत्सव के बाद श्रद्धालुओं में प्रसाद के रूप में पंजीरी का वितरण किया गया।

चामुण्डा देवी मंदिर में स्लम बच्चों की प्रस्तुतियों ने जीता दिल

जन्माष्टमी के इस खास मौके पर शहर के प्रसिद्ध प्राचीन मां चामुण्डा देवी मंदिर में एक अनूठा और प्रेरणादायक कार्यक्रम देखने को मिला। मंदिर परिसर में स्लम एरिया (झुग्गी-झोपड़ी) से आने वाले बच्चों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं।

इन नन्हे-मुन्नों की कलाकारी और प्रस्तुतियों ने वहां मौजूद हर दर्शक का मन मोह लिया और तालियों से पूरा मंदिर परिसर गूंज उठा। इस पहल ने उत्सव के आनंद को कई गुना बढ़ा दिया और समाज के इन बच्चों को अपनी प्रतिभा दिखाने का एक बेहतरीन मंच मिला।

ब्रह्मकुमारी राजयोग केंद्र में भी गूंजे कान्हा के जयकारे

शहर के ब्रह्मकुमारी राजयोग केंद्र में भी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व पूरी आध्यात्मिकता के साथ मनाया गया। यहां आयोजित विशेष कार्यक्रम में संस्थान से जुड़े लोगों ने भगवान श्रीकृष्ण के जीवन दर्शन, गीता के उपदेशों और उनके आदर्शों पर प्रकाश डाला। राजयोग केंद्र में पहुंचे श्रद्धालुओं ने ध्यान और प्रार्थना के जरिए आध्यात्मिक उल्लास के साथ पर्व का आनंद लिया।

रोशनी से जगमगाए शहर के प्रमुख मंदिर और सजी झांकियां

उत्सव को लेकर शहर के अन्य प्रतिष्ठित मंदिरों में भी खासा उत्साह देखा गया। महावीर मार्ग स्थित प्राचीन सीता राम मंदिर और प्राचीन हनुमान मंदिर को विशेष तौर पर सजाया गया था। इसके साथ ही पुस्तक गली स्थित ऐतिहासिक सत्यनारायण मंदिर में भी भव्य सजावट की गई।

इन सभी मंदिरों में बाल गोपाल के जीवन प्रसंगों पर आधारित सुंदर झांकियां सजाई गई थीं, जिन्हें देखने के लिए देर रात तक श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती रही।

रात बारह बजते ही ‘हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की’ के जयकारों से पूरा शहर गूंज उठा। भगवान के जन्मोत्सव के उपरांत महाआरती की गई और सभी को धनिया-पंजीरी का प्रसाद वितरित किया गया, जिसके साथ ही यह भव्य धार्मिक पर्व संपन्न हुआ।

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