Narnaul News: भारत सरकार के उपभोक्ता मामले विभाग के सचिव के पत्र का हवाला देते हुए सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि होटलों, रेस्तरां और कैफे में उपभोक्ताओं से जबरन सर्विस चार्ज वसूलने की प्रथा पर जिला प्रशासन द्वारा सख्ती बरती जाएगी।
इस संबंध में उपायुक्त ने सभी एसडीएम, जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक अधिकारी को नियमों की पालना सुनिश्चित करने के लिए पत्र जारी किया है।
सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि विभाग के 9 सितंबर 2026 के पत्र में कहा गया है कि नियमों और अदालती फैसलों के बावजूद कुछ प्रतिष्ठान अब भी यह शुल्क वसूल रहे हैं।
प्रवक्ता ने बताया कि केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) ने 4 जुलाई 2022 को जारी दिशा-निर्देशों में साफ किया था कि होटल और रेस्तरां बिल में सर्विस चार्ज अपने आप या डिफॉल्ट रूप से नहीं जोड़ सकते। इसे किसी अन्य नाम से भी नहीं वसूला जा सकता।
उपभोक्ता को स्पष्ट रूप से बताना होगा कि यह भुगतान स्वैच्छिक और ऐच्छिक है। सर्विस चार्ज न देने पर किसी को प्रवेश या सेवा से वंचित नहीं किया जा सकता, और खाने के बिल में सर्विस चार्ज जोड़कर उस पर जीएसटी भी नहीं लगाया जा सकता।
उन्होंने बताया कि दिल्ली उच्च न्यायालय ने 28 मार्च 2025 को नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया बनाम भारत संघ मामले में इन दिशा-निर्देशों को बरकरार रखा था। अदालत ने कहा था कि सर्विस चार्ज या टिप ग्राहक का स्वैच्छिक भुगतान है, इसे अनिवार्य नहीं बनाया जा सकता। अलग-अलग नामों से इसकी वसूली भ्रामक है और उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 2(47) के तहत अनुचित व्यापार व्यवहार है।
प्रवक्ता ने कहा कि पत्र में चिंता जताई गई है कि कई प्रतिष्ठान सिर्फ नाम बदलकर यही शुल्क वसूल रहे हैं। ऐसे में स्टाफ वेलफेयर चार्ज, कर्मचारी कल्याण शुल्क, सर्विस फीस, हॉस्पिटैलिटी चार्ज या वॉलंटरी सर्विस चार्ज जैसे किसी भी नाम से लिया गया अनिवार्य शुल्क सर्विस चार्ज ही माना जाएगा और अवैध होगा।
प्रवक्ता ने उपभोक्ताओं से अपील की कि यदि कहीं जबरन सर्विस चार्ज वसूला जाए तो वे इसकी शिकायत संबंधित विभाग या उपभोक्ता मंच में करें।
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