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Narnaul: चुनावी पहल से मिली विजयपाल को प्रधानी, नित्यानंद को साफ छवि का नहीं मिला लाभ

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Narnaul: चुनावी पहल से मिली विजयपाल को प्रधानी, नित्यानंद को साफ छवि का नहीं मिला लाभ
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Narnaul:  धर्मनारायण शर्मा

जगमार्ग न्यूज़ नारनौल

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पहला मारे सो मीर। यह कहावत इस बार जिला बार एसोसिएशन नारनौल के चुनाव में सार्थक सिद्ध हुई। इस चुनाव में विजयपाल सिंह नए प्रधान बने। इसके पीछे उनका सबसे पहले चुनाव प्रचार में उतर जाना और एक बड़े तबके का गुपचुप तरीके से समर्थन मिल जाना रहा।
जिला बार एसोसिएशन नारनौल के कुल 1020 वोटो में से 330 मत प्राप्त करके विजयपाल सिंह ने नित्यानंद को 17 मतों से हराया। निवर्तमान प्रधान संतोख यादव को तीसरे स्थान पर रहना पड़ा।
हालांकि बार एसोसिएशन का चुनाव समाज के एक सबसे अधिक पढ़े लिखे और कानून के जानकार तबके का रहता है, लेकिन इस चुनाव की समीक्षा की जाए तो लगेगा कि यहां भी जातीय समीकरण ज्यादा प्रभावी रहे। जिला मुख्यालय नारनौल की बार एसोसिएशन की प्रधानता अपने आप में बहुत महत्व रखती है। यही कारण रहा कि इस बार के चुनाव में निवर्तमान प्रधान संतोख सिंह यादव जब दूसरी बार चुनाव मैदान में उतरे तो पहले दृष्टि में ही उनका चुनाव कुछ पीछे खिसकता दिखने लगा। हालांकि संतोख सिंह ने अपने प्रधान कार्यकाल में बार एसोसिएशन के लिए काफी काम किया। उससे पहले वे सचिव के तौर पर भी काम कर चुके हैं। किंतु उनकी कार्यशैली को लेकर इस बार एक वर्ग में शामिल वकील नाराज थे। यही कारण था कि उनके दूसरी बार चुनाव लड़ने के ऐलान के साथ ही कुछ समर्थक वकीलों ने भी अपने पैर खींचने शुरू कर दिए ।
दूसरी बात यह रही कि विजयपाल सिंह ने इस बार अपनी उम्मीदवारी सबसे पहले घोषित की और वह जल्दी ही प्रचार में उतर गए। उन्हें जाट वोटो के अलावा गैर जाट वोटो का लाभ मिला। साथ ही 150 से अधिक उन वकील मतदाताओं तक भी वह अपनी पहुंच बनाने में सफल रहे जो नॉन प्रैक्टिशनर की श्रेणी में आते हैं। यानी जो नियमित रूप से कोर्ट में आकर प्रेक्टिस नहीं करते। इस चुनाव में उन्हें इसका लाभ मिला। क्योंकि ऐसे मतदाताओं को इस बात से कोई लेना देना नहीं रहता कि बार एसोसिएशन की राजनीति किसके पक्ष में और किसके खिलाफ।
इस चुनाव की दूसरी महत्वपूर्ण बात यह कि नित्यानंद यादव को उनकी स्वच्छ व सरल छवि का लाभ मिल रहा था। यही कारण था कि वह अपने विरोधी उम्मीदवारों पर प्रचार के दौरान भारी भी दिख रहे थे। वकीलों को एक बड़ा तबका भी उनके समर्थन में था।
शनिवार को मतदान के दौरान दोपहर 12 बजे तक भी नित्यानंद का पलड़ा भारी रहा। उसके बाद अचानक से गैर यादव वकील मतदाताओं की सक्रियता बढ़ती चली गई। उनका झुकाव विजयपाल सिंह की ओर अग्रसर हो गया।

नारनौल जिला बार एसोसिएशन के चुनाव में एक तरफ जहां वकील मतदाता प्रधानी के लिए लड़ाई लड़ रहे थे तो सूत्र बताते हैं कि प्रधानता का चुनाव नए लड़कर भी कुछ वरिष्ठ अधिवक्ता इस कुर्सी पर अपने खास उम्मीदवार को काबिज देखने के लिए लगातार सक्रिय भूमिका में रहे। इनमें एक धड़ा जहां संतोख यादव को दूसरी बार प्रधान बनने के लिए जी तोड़ मेहनत कर रहा था, तो दूसरी तरफ गैर यादव वकील मतदाताओं का एक बड़ा धड़ा एक वरिष्ठ अधिवक्ता के नेतृत्व में एक पखवाड़े से लगातार सक्रिय था। उन्हें इसकी सफलता भी मिली। हालांकि नित्यानंद यादव के पक्ष में भी काफी संख्या में समर्थक वकील मतदाताओं से जनसंपर्क साथ रहे थे और वह काफी आगे नजर भी आ रहे थे। लेकिन चुनाव के दौरान दोपहर बाद की गई सक्रियता से विजयपाल सिंह को उनके समर्थकों ने जीत दिला ही दी।

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