Neeraj Faridpuria arrested USA: हरियाणा के अपराध जगत की फाइलें एक बार फिर तेजी से पलटी जा रही हैं, जिसकी मुख्य वजह समंदर पार से आई एक बड़ी खबर है। राज्य के दो सबसे शातिर और (Neeraj Faridpuria and Himanshu Bhau arrest) वांटेड गैंगस्टर—नीरज फरीदपुरिया और हिमांशु भाऊ—की अमेरिका में गिरफ्तारी की सूचना ने हरियाणा पुलिस और केंद्रीय जांच एजेंसियों के गलियारों में हलचल मचा दी है।
नीरज फरीदपुरिया का नाम पिछले कई वर्षों से हरियाणा के सबसे खूंखार अपराधियों की सूची में शुमार रहा है। विकास चौधरी हत्याकांड से लेकर बंबीहा और कौशल चौधरी गैंग के साथ उसके कथित गठजोड़ की कहानियां लंबे समय से पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज हैं। अब अमेरिका में उसकी शिकरंजी कसे जाने के बाद यह सवाल सबसे बड़ा हो गया है कि आखिर इस शख्स का अपराध की दुनिया तक पहुंचने का सफर कैसा रहा और इसके पीछे की पूरी पटकथा क्या थी?
जेल की सलाखों से शुरू हुआ था जुर्म का बड़ा सफर
शुरुआती आपराधिक इतिहास खंगालने पर सामने आता है कि नीरज फरीदपुरिया का जुर्म की दुनिया से पुराना नाता रहा है। साल 2012 में हरियाणा पुलिस के साथ हुई एक मुठभेड़ के बाद उसे गिरफ्तार किया गया था, जिसने उसके आपराधिक सफर की पहली बड़ी इबारत लिखी थी। इसके बाद, साल 2015 में हत्या के एक मामले में अदालत द्वारा उसे उम्रकैद की सजा सुनाए जाने की रिपोर्ट्स भी सामने आई थीं।
हालांकि, जुर्म की इस दुनिया में उसकी जड़ें तब और गहरी हुईं जब वह जेल के भीतर बड़े अपराधियों के संपर्क में आया। सूत्रों के मुताबिक, गांव के एक मामूली विवाद के चलते जेल पहुंचने के बाद उसकी मुलाकात टेकचंद खेड़ी से हुई और धीरे-धीरे उसका दायरा भोंडसी जेल तक फैल गया, जहां वह कौशल चौधरी और अन्य कुख्यात गैंगस्टर्स के नेटवर्क के संपर्क में आ गया। इन अंदरूनी मुलाकातों ने ही एक सामान्य अपराधी को बड़े गैंगस्टर नेटवर्क का मोहरा बना दिया।
जमानत के बाद देश से फरार और विकास चौधरी हत्याकांड में नाम
साल 2019 का वह दौर जब पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट से जमानत मिलने के बाद नीरज फरीदपुरिया जेल से बाहर आया, उसके बाद से ही वह भारतीय कानून की पहुंच से बाहर चल रहा था। (Haryana gangsters in USA news) पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, जमानत मिलते ही वह चुपचाप देश छोड़कर फरार हो गया और विदेश से ही अपने आपराधिक साम्राज्य के तार जोड़ने लगा। इसी दौरान उसका नाम हरियाणा के सबसे सनसनीखेज मामलों में से एक—विकास चौधरी हत्याकांड में मुख्य रूप से उछला।
फरीदाबाद में हुई इस हाई-प्रोफाइल हत्या ने राज्य की राजनीति और पुलिस महकमे में भूचाल ला दिया था। हालांकि, किसी भी मामले में गिरफ्तारी या आरोप तय होना अदालत में दोष सिद्ध होने का पर्याय नहीं है, लेकिन इन संगीन मामलों में नीरज की संलिप्तता ने एजेंसियों की नींद उड़ा रखी थी। कौशल चौधरी और बंबीहा गैंग के साथ-साथ हिमांशु भाऊ के नेटवर्क के साथ उसके कथित संबंधों की परतें भी जांच एजेंसियां लगातार खंगाल रही हैं।
अब अमेरिकी धरती से भारत वापसी की जद्दोजहद
अमेरिका में हुई इस गिरफ्तारी के बाद अब सबसे बड़ा और अहम सवाल दोनों गैंगस्टर्स के प्रत्यर्पण (Vikas Choudhary murder case) को लेकर खड़ा हो गया है। भारतीय कूटनीतिक और कानूनी चैनल अब इस बात की जुगत में हैं कि अमेरिकी प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित कर दोनों को जल्द से जल्द भारत लाया जाए।
यदि कानूनी अड़चनों को पार करते हुए इन्हें स्वदेश लाया जाता है, तो हरियाणा और दिल्ली-एनसीआर की पुलिस के पास इनसे पूछताछ के लिए कई अनसुलझे पन्नों को पलटने का मौका होगा। (Haryana crime news) फिलहाल, एजेंसियों की नजर इस बात पर टिकी है कि अमेरिकी कोर्ट की प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रत्यर्पण की कागजी कार्रवाई किस रफ्तार से आगे बढ़ती है, क्योंकि तभी हरियाणा की अदालतों में लंबित पड़े मामलों की जांच को नई दिशा मिल सकेगी।
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