July 23, 2026

Narnaul News: श्री अनाथ गौशाला नारनौल में नवनिर्मित कमरे का लोकार्पण, गोभक्तों ने बांटी दलिया-बिनौले की सवामणी

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Narnaul News: श्री अनाथ गौशाला नारनौल में नवनिर्मित कमरे का लोकार्पण, गोभक्तों ने बांटी दलिया-बिनौले की सवामणी

नारनौल की अनाथ गौशाला में जुड़ा नया कमरा, दानदाता का पगड़ी पहनाकर हुआ सम्मान

Narnaul News: हरियाणा के नारनौल शहर में स्थित सुप्रसिद्ध ‘श्री अनाथ गौशाला’ में धार्मिक अनुष्ठान और उत्साहपूर्ण वातावरण के बीच गुरुवार को नवनिर्मित कमरे का औपचारिक लोकार्पण किया गया।

गोसेवा मंडल के तत्वावधान में आयोजित इस सादे एवं गरिमामय कार्यक्रम में क्षेत्र के कई प्रमुख गोभक्तों और गणमान्य नागरिकों ने शिरकत की। कार्यक्रम के दौरान जहाँ वैदिक मंत्रोच्चार से पूरा परिसर गुंजायमान रहा, वहीं गोमाता की सेवा और गौशाला के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने का संकल्प दोहराया गया।

वैदिक रीति-रिवाज से हुआ पूजन, गोमाता को लगाया भोग

लोकार्पण समारोह के अवसर पर मुख्य यजमान के रूप में पधारे समाजसेवी सुरेश चंद कंछल एवं उनकी धर्मपत्नी माया देवी ने अनुष्ठान में शिरकत की।

विद्वान पंडित पुरुषोत्तम शास्त्री ने मुख्य यजमान से समस्त देवी-देवताओं और गोमाता का विधि-विधान से पूजन करवाया। पूजन संपन्न होने के पश्चात मुख्य यजमान परिवार की ओर से गौशाला में मौजूद गोवंश के लिए दलिया, खल और बिनौला मिलाकर विशेष ‘गौ-सवामणी’ का आयोजन किया गया, जिसका भोग गोमाता को समर्पित किया गया।

पगड़ी पहनाकर किया मुख्य यजमान का नागरिक अभिनंदन

कार्यक्रम के दौरान श्री अनाथ गौशाला के प्रधान उज्जन पाल यादव ने मुख्य यजमान सुरेश चंद कंछल का हरियाणवी परंपरा के अनुसार पगड़ी पहनाकर स्वागत व अभिनंदन किया।

गौशाला प्रबंधन की ओर से आभार व्यक्त करते हुए उज्जन पाल यादव ने कहा कि नारनौल की यह ऐतिहासिक गौशाला आप जैसे भामाशाहों और दानवीरों के सहयोग से ही सुचारू रूप से संचालित हो रही है। उन्होंने उम्मीद जताई कि क्षेत्र के समाजसेवी भविष्य में भी गोसेवा के इस पवित्र कार्य में अपना सहयोग इसी प्रकार बनाए रखेंगे।

‘गोमाता के निमित्त दिया दान कभी निष्फल नहीं जाता’

नवनिर्मित कमरे का फीता काटकर उसे गौशाला प्रबंधन को सौंपने के बाद मुख्य यजमान सुरेश चंद कंछल ने अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति में गोसेवा को सर्वोपरि माना गया है।

गोमाता के निमित्त निष्काम भाव से किया गया कोई भी दान या सेवा कार्य कभी व्यर्थ नहीं जाता, बल्कि गोमाता के आशीर्वाद से परिवार में सुख-समृद्धि और कई गुना फल की प्राप्ति होती है। समारोह के अंत में उपस्थित सभी गोभक्तों ने गोसेवा को निरंतर जारी रखने का संकल्प लिया।

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