Chandigarh Jagannath Rath Yatra: जय जगन्नाथ’ के जयघोष से गूंजा चंडीगढ़, हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में निकली भव्य रथयात्रा
जय जगन्नाथ' के जयघोष से गूंजा चंडीगढ़
Chandigarh Jagannath Rath Yatra: आस्था, भक्ति और सांस्कृतिक उल्लास के बीच वीरवार को चंडीगढ़ भगवान जगन्नाथ की भक्ति में सराबोर नजर आया। उत्कल सांस्कृतिक संघ की ओर से सेक्टर-31 स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर से भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की भव्य रथयात्रा निकाली गई। फूलों और रंग-बिरंगी सजावट से सजे दिव्य रथ के दर्शन के लिए हजारों श्रद्धालु उमड़ पड़े। पूरे मार्ग में ‘जय जगन्नाथ’ और ‘हरे कृष्ण’ के जयघोष से वातावरण भक्तिमय बना रहा। श्रद्धालुओं ने रथ की रस्सी खींचकर भगवान का आशीर्वाद प्राप्त किया और कीर्तन-भजन के साथ यात्रा में उत्साहपूर्वक भाग लिया। रथयात्रा शुरू होने से पहले मुख्य राजा डॉ. देबादत्ता पानिग्रही ने परंपरागत ‘छेरा पहरा’ (सोने की झाड़ू से रथ की सफाई) की रस्म निभाई। पूजा-अर्चना के बाद दोपहर करीब एक बजे रथयात्रा का शुभारंभ हुआ।
इस अवसर पर चंडीगढ़ प्रशासन के वित्त सचिव दीप्रवा लकड़ा और पंचकूला के मेयर श्याम लाल बंसल ने मुख्य अतिथि के रूप में भगवान जगन्नाथ का आशीर्वाद लेकर यात्रा को रवाना किया। कार्यक्रम में पद्मश्री प्रो. (डॉ.) दिगंबर बेहरा, पीजीआई के डीन (अकादमिक) प्रो. (डॉ.) राधाकांत राठो, डॉ. सुशांत कुमार साहू सहित अनेक गणमान्य लोग भी मौजूद रहे। रथयात्रा सेक्टर-31 स्थित मंदिर से शुरू होकर सेक्टर-32, 29, 30, 20, 21, 34, 44, 45 और 47 से होते हुए रात करीब 9 बजे पुनः मंदिर पहुंची। यात्रा मार्ग में विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर भगवान का स्वागत किया तथा प्रसाद वितरण और भंडारे का आयोजन भी किया गया।
नौ दिन मौसी मां के घर विराजेंगे भगवान, 24 जुलाई को होगी बहुड़ा यात्रा
उत्कल सांस्कृतिक संघ के वाइस चेयरमैन एस.के. भुइयां ने बताया कि रथयात्रा के बाद भगवान जगन्नाथ अपनी मौसी मां के घर पहुंचे हैं, जहां वे नौ दिनों तक विराजमान रहेंगे। इस दौरान प्रतिदिन 17 से 24 जुलाई तक शाम 8 बजे से 10 बजे तक मंदिर परिसर में भजन संध्या और विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। 24 जुलाई को भगवान की वापसी यात्रा, जिसे बहुड़ा यात्रा कहा जाता है, निकाली जाएगी। संघ के संयुक्त सचिव बी. पात्रा ने बताया कि धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान जगन्नाथ अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ भक्तों को दर्शन देने के लिए नगर भ्रमण पर निकलते हैं। मौसी मां के घर नौ दिन प्रवास के बाद बहुड़ा यात्रा के माध्यम से वे पुनः मंदिर लौटते हैं। इसी दौरान माता लक्ष्मी को मनाने की परंपरा भी निभाई जाती है।
ढोल-नगाड़ों और भजनों पर नाचते-गाते किया भगवान का स्वागत
यात्रा में इस्कॉन और श्री चैतन्य गौड़ीय मठ के संन्यासियों एवं भक्तों ने संकीर्तन करते हुए माहौल को भक्तिमय बनाए रखा। श्रद्धालु ढोल-नगाड़ों और भजनों की धुन पर नाचते-गाते भगवान के रथ के साथ चलते रहे। आयोजकों और स्वयंसेवकों ने पूरे मार्ग में सुरक्षा और व्यवस्थाओं का सफल संचालन किया। इस अवसर पर उत्कल सांस्कृतिक संघ के अध्यक्ष प्रो. आर.के. राठ, डॉ. सुशांत कुमार, अरुण कुमार, बसंत कुमार दास, पी.एन. मलिक, रतिकांत, प्रशांत कुमार, दिवाकर, कोषाध्यक्ष एस.के. नायक सहित संस्था के अनेक पदाधिकारी और सदस्य मौजूद रहे।
