चंडीगढ़ पुलिस में पदोन्नतियों की सौगात: 10 एसआई बने इंस्पेक्टर, 28 हेड कांस्टेबलों को मिला एएसआई का लोकल रैंक
चंडीगढ़ पुलिस में पदोन्नतियों
Chandigarh News: चंडीगढ़ पुलिस में शुक्रवार को बड़े पैमाने पर विभागीय पदोन्नति की घोषणा की गई। पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) डॉ. सागर प्रीत हुड्डा ने दो अलग-अलग आदेश जारी करते हुए 38 पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को उच्च पद का लोकल रैंक प्रदान किया। इनमें 10 सब-इंस्पेक्टरों को इंस्पेक्टर और 28 हेड कांस्टेबलों को असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर (एएसआई) का लोकल रैंक दिया गया है। दोनों आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिए गए हैं। पदोन्नति पाने वाले सब-इंस्पेक्टरों में रवदीप सिंह, चंदरमुखी, दलजीत सिंह, सुरेश कुमार, जसकिरणदीप कौर, सूर्य प्रकाश, प्रेम सिंह, हरनेक सिंह, कुलविंदर कौर और गुरविंदर सिंह शामिल हैं। ये अधिकारी वर्तमान में विभिन्न पुलिस थानों, चौकियों, साइबर सेल, एंटी थेफ्ट फोर्स और क्राइम ब्रांच जैसी महत्वपूर्ण इकाइयों में सेवाएं दे रहे हैं।
वहीं, 22 जुलाई को हुई डिपार्टमेंटल प्रमोशन कमेटी (डीपीसी) की बैठक की सिफारिशों के आधार पर 28 हेड कांस्टेबलों को एएसआई का लोकल रैंक प्रदान किया गया। पदोन्नति सूची में सुरिंदर पाल, सुरिंदर कौर, सुनील मेहता, परवीन कुमार, परदीप सिंह, लखविंदर सिंह, संजय कुमार, सुनील कुमार, कमलेश कौर, रणबीर सिंह, जसविंदर कौर, पारवीन कुमार, संजीव कुमार, सविता बैन्स, अनिल चौधरी, रूप कुमार, बलबीर सिंह, गुरविंदर सिंह, भीम, जसविंदर सिंह, रविंदर सिंह, सतीश कुमार, लाखबीर सिंह, सुमन रानी, राजेश कुमार, दलजीत कौर, कुलविंदर सिंह और सविता रानी के नाम शामिल हैं।हालांकि पुलिस विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह नियमित पदोन्नति नहीं, बल्कि केवल लोकल रैंक है। संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को उच्च पद की जिम्मेदारियां निभानी होंगी तथा वे उसी रैंक की वर्दी पहन सकेंगे, लेकिन उन्हें उच्च वेतनमान, अतिरिक्त भत्ते, वरिष्ठता या अन्य वित्तीय लाभ नहीं मिलेंगे। नियमित पदोन्नति भविष्य में विभागीय नियमों और वरिष्ठता के आधार पर ही होगी।
आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी के विरुद्ध विभागीय जांच लंबित पाई जाती है, कार्य निष्पादन असंतोषजनक रहता है अथवा वह किसी आपराधिक मामले में संलिप्त पाया जाता है, तो विभाग बिना कारण बताओ नोटिस जारी किए उसका लोकल रैंक वापस लेकर उसे मूल पद पर भेज सकता है।
क्या होता है लोकल रैंक?
लोकल रैंक पुलिस विभाग की एक प्रशासनिक व्यवस्था है। इसके तहत अधिकारी या कर्मचारी को उच्च पद की जिम्मेदारी और उस पद की वर्दी पहनने का अधिकार दिया जाता है, लेकिन इसे नियमित पदोन्नति नहीं माना जाता। ऐसे अधिकारी को वेतन वृद्धि, भत्ते, वरिष्ठता, पदोन्नति में वरीयता या अन्य सेवा लाभ नहीं मिलते। विभागीय आवश्यकता या प्रतिकूल परिस्थितियों में यह रैंक वापस भी लिया जा सकता है।
