Chandigarh News: दवा के साथ योग का मंत्र, पीजीआई ने कमर दर्द के मरीजों के लिए लगाया विशेष शिविर
पीजीआई कमर दर्द के मरीजों के लिए विशेष शिविर
Chandigarh: लंबे समय से कमर दर्द (क्रॉनिक लो बैक पेन) से जूझ रहे लोगों को विशेषज्ञ उपचार उनके घर के नजदीक उपलब्ध कराने की दिशा में पीजीआई ने एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। रविवार को नयागांव स्थित न्यू शिव मंदिर परिसर में आयोजित सातवें सामुदायिक स्वास्थ्य शिविर में विशेषज्ञ डॉक्टरों ने मरीजों की जांच कर उन्हें न केवल मुफ्त दवाइयां दीं, बल्कि दर्द से राहत के लिए योग और जीवनशैली में बदलाव की अहम भूमिका के बारे में भी जागरूक किया। शिविर के बाद मरीजों के लिए 15 दिनों तक निशुल्क योग कक्षाएं भी आयोजित की जाएंगी।
शिविर का नेतृत्व पीजीआई के पेन क्लीनिक की प्रभारी प्रो. बबीता घई ने अपनी बहु-विषयक टीम के साथ किया। यह शिविर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) समर्थित परियोजना के तहत आयोजित किया गया। इससे पहले कांसल, खरड़, सेक्टर-25, इंदिरा कॉलोनी और रटवाड़ा साहिब सहित कई क्षेत्रों में भी ऐसे शिविर आयोजित किए जा चुके हैं। शिविर में क्रॉनिक लो बैक पेन से पीड़ित मरीजों की विस्तृत चिकित्सीय जांच की गई। उन्हें निशुल्क दवाइयां उपलब्ध कराई गईं और रक्तचाप, रक्त शर्करा तथा बोन मिनरल डेंसिटी की जांच भी की गई। विशेषज्ञों ने मरीजों को बताया कि नियमित योग, सही व्यायाम और जीवनशैली में सुधार से लंबे समय से बने रहने वाले कमर दर्द पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है और कई मामलों में दवाओं पर निर्भरता भी कम की जा सकती है।
प्रो. बबीता घई ने बताया कि इस परियोजना का उद्देश्य केवल उपचार देना नहीं, बल्कि समुदाय स्तर पर ऐसे मरीजों तक पहुंचना है जो सामाजिक, आर्थिक या अन्य कारणों से नियमित रूप से तृतीयक स्वास्थ्य संस्थानों तक नहीं पहुंच पाते। इसी सोच के तहत शिविर के बाद भी मरीजों को 15 दिनों तक निशुल्क सामुदायिक योग प्रशिक्षण से जोड़ा जाएगा, ताकि उपचार की निरंतरता बनी रहे। उन्होंने बताया कि परियोजना के तहत डॉक्टरों के साथ मनोवैज्ञानिक, फिजियोथेरेपिस्ट और अन्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी सीधे समुदाय में जाकर सेवाएं दे रहे हैं। प्रत्येक शिविर में औसतन 100 से 120 मरीज लाभान्वित हो रहे हैं, जिससे ऐसे सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों की उपयोगिता और लोगों की बढ़ती भागीदारी का पता चलता है। शिविर के सफल आयोजन में संकल्प संस्था और स्थानीय स्वयंसेवकों ने भी सक्रिय सहयोग दिया।
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