Pinjore Murder Case: आरोपियों का जबरन मुंडन और नंगे पैर परेड कराने पर कोर्ट सख्त, पंचकूला CP को जांच के आदेश
सीआईए और क्राइम ब्रांच दफ्तर में नहीं हैं सीसीटीवी कैमरे! पिंजौर हत्याकांड के आरोपियों की पिटाई पर कोर्ट में खुलासा
Pinjore Murder Case: पंचकूला के पिंजौर में हुए चर्चित जितेश मनोचा उर्फ किट्टू हत्याकांड के आरोपियों को नंगे पैर सड़क पर चलाने, जबरन सिर मुंडवाने और मीडिया के सामने उनकी नुमाइश करने के गंभीर आरोपों पर अदालत ने बेहद कड़ा संज्ञान लिया है।
कालका के सब-डिवीजनल जुडिशियल मजिस्ट्रेट (एसडीजेएम) अभिमन्यु राजपूत ने खाकी की इस कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए पंचकूला के पुलिस कमिश्नर को पूरे मामले की विभागीय जांच कराने और इसकी विस्तृत रिपोर्ट अदालत में पेश करने का हुक्म सुनाया है। अदालत ने साफ लफ्जों में कहा कि पुलिस हिरासत में हिंसा, आरोपियों को कानून से इतर जाकर सजा देना या उन्हें सार्वजनिक तौर पर जलील करना किसी भी सभ्य न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा नहीं हो सकता।
आरोपी रोहित मेहता का सनसनीखेज दावा, सीसीटीवी फुटेज गायब होने पर उठे सवाल
दरअसल, यह पूरा मामला बीती 5 जून को पिंजौर के मुख्य बाजार में सरेआम हुई जितेश मनोचा की हत्या से जुड़ा है, जिसमें छह आरोपियों की गिरफ्तारी हुई थी।
मामले में नामजद आरोपी रोहित मेहता ने अदालत में अर्जी दाखिल कर आरोप लगाया कि पुलिस रिमांड के दौरान क्राइम ब्रांच के अधिकारियों ने उनके साथ बेरहमी से मारपीट की, जबरन सिर मुंडवा दिया और नंगे पैर सड़कों पर घुमाते हुए उनकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कराए।
इस शिकायत पर जब अदालत ने चंडीमंदिर डिटेक्टिव स्टाफ और क्राइम ब्रांच के प्रभारियों को तलब किया, तो उनके बयानों ने सबको चौंका दिया। पुलिस अधिकारियों ने कोर्ट को बताया कि क्राइम ब्रांच और सीआईए परिसर में कोई भी सीसीटीवी कैमरा स्थापित ही नहीं है, इसलिए वहां की कोई फुटेज उपलब्ध नहीं कराई जा सकती।
मेडिकल रिपोर्ट में चोटों की पुष्टि, पुलिस ने दी भागने की दलील
अदालत के निर्देश पर गठित तीन डॉक्टरों के स्पेशल मेडिकल बोर्ड ने जब आरोपियों की जांच की, तो खुशदीप सिंह, रोहित मेहता और मनप्रीत सिंह के जिस्म पर तीन से पांच दिन पुरानी कई साधारण चोटों के निशान पाए गए। हालांकि, एक्स-रे रिपोर्ट में किसी भी फ्रैक्चर की पुष्टि नहीं हुई है।
वहीं दूसरी तरफ, पुलिस ने अपना बचाव करते हुए दलील दी कि दो आरोपियों ने हिरासत से भागने की कोशिश की थी, जिसके दौरान उन्हें ये चोटें आईं और इस बाबत अलग से एफआईआर भी दर्ज है। पुलिस का कहना था कि हथियारों और सबूतों की बरामदगी के लिए आरोपियों को सार्वजनिक जगहों पर ले जाना कानूनी मजबूरी थी, उनका अपमान करने की कोई नीयत नहीं थी।
‘जबरन सिर मुंडवाकर नहीं घुमा सकती पुलिस’ – जवाबदेही तय करने की हिदायत
अदालत ने पुलिस की इन दलीलों के बावजूद साफ किया कि यह जांच का एक बेहद गंभीर विषय है कि क्या आरोपियों का जानबूझकर मुंडन कर उन्हें जनता के सामने बेइज्जत किया गया। मजिस्ट्रेट ने सख्त लहजे में कहा कि यदि इन आरोपों में रत्ती भर भी सच्चाई है, तो यह कानून का खुला उल्लंघन है और इसके दोषी अधिकारियों की जवाबदेही तय होनी ही चाहिए।
अदालत ने पंचकूला पुलिस कमिश्नर को हिदायत दी है कि वे चल रही तफ्तीश में इस संवेदनशील पहलू को भी शामिल करें या फिर इसके लिए अलग से जांच कमेटी बनाकर एक निश्चित समय सीमा के भीतर अपनी रिपोर्ट सीधे कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करें।
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