Dhand-Kaul Village: ढांड के गांव कौल में जिला परिषद चेयरमैन ने उठाई झाड़ू, स्वच्छता के लिए किया बड़ा आह्वान
ढांड के गांव कौल में जिला परिषद चेयरमैन ने उठाई झाड़ू
Dhand-Kaul Village: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘स्वच्छ भारत मिशन’ की जमीनी हकीकत को और मजबूत करने के इरादे से ढांड क्षेत्र के गांव कौल में एक सराहनीय पहल देखने को मिली। जिला परिषद के तत्वावधान में यहां न केवल एक व्यापक सफाई अभियान चलाया गया, बल्कि ग्रामीणों को जागरूक करने के लिए व्यापक जन-संवाद भी हुआ। इस मुहिम के तहत शहीद प्रेमसिंह सीनियर सेकेंडरी स्कूल, स्थानीय कन्या महाविद्यालय और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) जैसी अति-महत्वपूर्ण संस्थाओं को जोड़ने वाली मुख्य सड़क को पूरी तरह कचरा मुक्त किया गया।
अभियान की खास बात यह रही कि इसमें प्रशासनिक अमले के साथ-साथ जिला परिषद के चेयरमैन कर्मबीर कौल, सरपंच प्रतिनिधि नरेश आढ़ती, स्कूल-कॉलेज के शिक्षकों और स्थानीय युवाओं ने खुद कंधे से कंधा मिलाकर श्रमदान किया।
केवल सरकारी योजनाओं के भरोसे नहीं मिल सकता स्वच्छ कल: कर्मबीर कौल
मुख्य मार्ग पर बिखरे कूड़े-कचरे को ठिकाने लगाने के बाद उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए जिला परिषद चेयरमैन कर्मबीर कौल ने बेहद तार्किक बात कही। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “स्वच्छता कोई ऐसा काम नहीं है जिसे केवल सरकारी बजट, कर्मचारियों या फाइलों में चल रही योजनाओं के भरोसे छोड़ दिया जाए।
जब तक हर घर से निकलने वाले कूड़े की जिम्मेदारी वहां का नागरिक खुद नहीं उठाएगा, तब तक हम किसी भी स्थायी बदलाव की उम्मीद नहीं कर सकते।” उन्होंने आगे कहा कि एक साफ-सुथरा गांव न केवल देखने में सुंदर लगता है, बल्कि यह मौसमी और संक्रामक बीमारियों के खिलाफ सबसे मजबूत सुरक्षा कवच भी साबित होता है।
भावी पीढ़ियों के लिए जहर बन रही है ‘डिस्पोजल संस्कृति’
चेयरमैन कौल ने आज के दौर की सबसे बड़ी समस्या यानी प्लास्टिक प्रदूषण पर भी कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने ग्रामीणों को सचेत करते हुए कहा कि हमारी आज की ‘यूज एंड थ्रो’ (डिस्पोजल) संस्कृति पर्यावरण के फेफड़ों को जाम कर रही है। अगर हमने आज अपने दैनिक जीवन से प्लास्टिक को बाहर नहीं निकाला, तो आने वाली पीढ़ियों को इसके बेहद घातक परिणाम भुगतने होंगे। उन्होंने हर हाल में कपड़े या जूट के थैलों का चलन दोबारा शुरू करने की वकालत की।
इसी कड़ी में अपनी बात रखते हुए मास्टर सुशील कुमार ने सामाजिक संस्कारों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बच्चों के भीतर बचपन से ही साफ-सफाई के प्रति ललक पैदा करना आज के समय की सबसे बड़ी मांग है। जब स्कूल और समाज एक सुर में काम करेंगे, तो इसके परिणाम दिखने तय हैं।
वहीं, समापन पर सरपंच प्रतिनिधि नरेश आढ़ती ने सभी का आभार जताते हुए ग्रामीणों के सामने एक व्यावहारिक प्रस्ताव रखा। उन्होंने अपील की कि क्यों न सभी ग्रामीण मिलकर सप्ताह में कम से कम एक दिन (जैसे रविवार) को सामूहिक श्रमदान के लिए आरक्षित करें, ताकि गांव कौल को पूरे जिले में एक सुंदर और आदर्श गांव के रूप में स्थापित किया जा सके।
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