Dharamshala: हिमाचल में पूरे उत्साह के साथ मनाया गया दलाई लामा का 91वां जन्मदिन
दलाई लामा का 91वां जन्मदिन
Dharamshala: हिमाचल प्रदेश में तिब्बती समुदाय ने सोमवार को 14वें दलाई लामा का 91वां जन्मदिन श्रद्धा, उत्साह और धार्मिक अनुष्ठानों के साथ मनाया। इस अवसर पर धर्मशाला के मैक्लॉडगंज स्थित सुगलागखंग मठ सहित प्रदेश के विभिन्न तिब्बती बौद्ध केंद्रों में विशेष प्रार्थना सभाएं आयोजित की गईं। कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में तिब्बती समुदाय के लोग, श्रद्धालु और गणमान्य व्यक्ति शामिल हुए। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने भी दलाई लामा को जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हुए उन्हें करुणा, अहिंसा और सार्वभौमिक मानवीय मूल्यों का वैश्विक प्रतीक बताया।
कांगड़ा जिले के धर्मशाला के मैक्लॉडगंज स्थित सुगलागखंग मठ में जन्मदिन समारोह विशेष धार्मिक अनुष्ठानों के साथ आयोजित किया गया। यह स्थान केंद्रीय तिब्बती प्रशासन का मुख्यालय भी है। समारोह में विशेष प्रार्थनाएं की गईं और दलाई लामा के उत्तम स्वास्थ्य तथा दीर्घायु की कामना की गई। कार्यक्रम में कांगड़ा के उपायुक्त हेमराज बैरवा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने तिब्बती समुदाय के लोगों से मुलाकात की और समारोह में भाग लिया।
लेह में हुआ मुख्य जन्मदिन समारोह
दलाई लामा इन दिनों लद्दाख के दौरे पर हैं। उनके 91वें जन्मदिन का मुख्य समारोह लेह के शेवात्सेल टीचिंग ग्राउंड में आयोजित किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु और अनुयायी मौजूद रहे। कार्यक्रम में धार्मिक अनुष्ठानों के साथ सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी दी गईं। तिब्बती कलाकारों ने पारंपरिक नृत्य और संगीत प्रस्तुत कर समारोह को विशेष बनाया, जबकि तिब्बती निर्वासित समुदाय के वरिष्ठ नेताओं ने भी लोगों को संबोधित किया।
मुख्यमंत्री ने दिया शुभकामना संदेश
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने अपने संदेश में कहा कि दलाई लामा का जीवन पूरी मानवता के लिए प्रेम, सद्भाव और निस्वार्थ सेवा की प्रेरणा है। उन्होंने कहा कि उनकी शिक्षाएं दुनिया भर के लाखों लोगों के लिए नैतिक मार्गदर्शन और आशा का स्रोत बनी हुई हैं। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि हिमाचल प्रदेश में दलाई लामा की उपस्थिति ने राज्य को वैश्विक स्तर पर आध्यात्मिकता और शांति के प्रमुख केंद्र के रूप में पहचान दिलाई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि दलाई लामा का करुणा, सह-अस्तित्व और शांति का संदेश समाज को जोड़ने का कार्य करता है। उनके विचारों ने हिमाचल प्रदेश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को समृद्ध किया है तथा दुनिया भर के लोगों को सकारात्मक जीवन मूल्यों के प्रति प्रेरित किया है। उल्लेखनीय है कि 14वें दलाई लामा का जन्म 6 जुलाई 1935 को तिब्बत के अमदो क्षेत्र के तक्तसेर गांव में हुआ था। वर्तमान में उनका स्थायी निवास हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में है, जहां से वे लंबे समय से अपने आध्यात्मिक और मानवीय संदेश का प्रसार कर रहे हैं।
