July 20, 2026

BKU Chaduni Dhand Meeting: 21 जुलाई को दिल्ली में फिर गरजेगा किसान, भाकियू चढ़ूनी की ढांड बैठक में बनी रणनीति, विक्रम कसाना का बड़ा बयान

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BKU Chaduni Dhand Meeting: 21 जुलाई को दिल्ली में फिर गरजेगा किसान, भाकियू चढ़ूनी की ढांड बैठक में बनी रणनीति, विक्रम कसाना का बड़ा बयान

"विदेशी कंपनियों के हाथों खेती बेचने की तैयारी में सरकार"— एडवोकेट विक्रम कसाना ने किया दिल्ली कूच का आह्वान

BKU Chaduni Dhand Meeting: केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों और प्रस्तावित विदेशी व्यापार समझौतों (ट्रेड डील) के खिलाफ देश के अन्नदाता ने एक बार फिर दिल्ली कूच की तैयारी कर ली है। भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) की एक आपात और महत्वपूर्ण बैठक रविवार को ढांड बस स्टैंड स्थित संगठन कार्यालय में आयोजित की गई।

जिलाध्यक्ष गुरनाम सिंह फरल की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में आगामी 21 जुलाई को दिल्ली के ऐतिहासिक किसान घाट पर होने वाली राष्ट्र स्तरीय किसान महापंचायत की रणनीति तय की गई। बैठक में विशेष रूप से पहुंचे भाकियू के युवा प्रदेश अध्यक्ष एडवोकेट विक्रम कसाना ने दोटूक शब्दों में कहा कि यह लड़ाई केवल किसानों की नहीं, बल्कि देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बचाने की है।

“विदेशी कंपनियों के फेर में तबाह हो जाएगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था”— एडवोकेट विक्रम कसाना

कार्यकर्ताओं और किसानों को संबोधित करते हुए युवा प्रदेश अध्यक्ष विक्रम कसाना ने कहा कि ‘देश बचाओ मोर्चा’ के बैनर तले आयोजित होने वाली यह महापंचायत सरकार की उन नीतियों के खिलाफ है जो चोरी-छिपे किसानों पर थोपने की तैयारी की जा रही है। उन्होंने प्रस्तावित ट्रेड डील पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा, “अगर यह समझौता अमलीजामा पहन लेता है, तो इसका सबसे पहला और घातक असर हमारे छोटे पशुपालकों, सीमांत किसानों और स्थानीय व्यापारियों पर पड़ेगा।

विदेशी कॉरपोरेट कंपनियों को भारतीय बाजारों में खुली छूट मिलने से हमारे अपने किसानों की आय तो गिरेगी ही, साथ ही कृषि क्षेत्र पूरी तरह बहुराष्ट्रीय कंपनियों के रहमोकरम पर आ जाएगा।” कसाना ने मांग की कि सरकार को तुरंत इस देशविरोधी समझौते पर पुनर्विचार करना चाहिए।

हलका अध्यक्ष की दोटूक— मांगें नहीं मानीं, तो किसान घाट से होगा बड़े आंदोलन का शंखनाद

बैठक के दौरान हलका अध्यक्ष रणधीर बरसाना ने भी सरकार के अड़ियल रवैये पर तीखा रोष प्रकट किया। उन्होंने कहा कि किसान लंबे समय से अपनी वाजिब मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से आवाज उठा रहा है, लेकिन हुक्मरान इसे अनसुना कर रहे हैं।

बरसाना ने चेतावनी दी कि यदि 21 जुलाई से पहले सरकार ने किसानों के हितों में सकारात्मक कदम नहीं उठाए, तो किसान घाट की पावन भूमि से सरकार के खिलाफ एक ऐसे ऐतिहासिक आंदोलन का ऐलान होगा जिसे संभालना मुश्किल हो जाएगा।

खाद सुरक्षा और खेती पर संकट बर्दाश्त नहीं; गांवों में जनसंपर्क तेज

यूनियन के जिलाध्यक्ष गुरनाम सिंह फरल ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि देश की खाद्य सुरक्षा और खेती-किसानी को दांव पर लगाकर बनाई जाने वाली किसी भी नीति को स्वीकार नहीं किया जाएगा।

उन्होंने कार्यकर्ताओं को निर्देश दिए कि वे गांवों में जाकर नुक्कड़ बैठकें करें और 21 जुलाई के लिए किसानों को लामबंद करें। फरल ने कहा कि यदि समय रहते बात नहीं बनी, तो पूरे हरियाणा में इस आंदोलन की आग फैलेगी। इस बैठक में ढांड और आसपास के दर्जनों गांवों से आए प्रमुख किसान प्रतिनिधियों और पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया और दिल्ली पहुंचने का संकल्प लिया।

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