July 11, 2026

India First Hydrogen Train: जींद से सोनीपत के बीच 140 की रफ्तार से दौड़ेगी हाइड्रोजन ट्रेन, किराया मात्र 5 रुपये

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India First Hydrogen Train: जींद से सोनीपत के बीच 140 की रफ्तार से दौड़ेगी हाइड्रोजन ट्रेन, किराया मात्र 5 रुपये

धुएं की जगह सिर्फ भाप छोड़ेगी देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन, जानें रूट और स्टॉपेज

India First Hydrogen Train: देश के परिवहन इतिहास में 17 जुलाई की तारीख एक बड़ी क्रांति के रूप में दर्ज होने जा रही है। भारत सरकार के ‘हरित परिवहन मिशन’ और ‘मेक इन इंडिया’ के तहत तैयार की गई देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन पटरी पर उतरने के लिए पूरी तरह तैयार है। हरियाणा के जींद-सोनीपत रूट पर शुरू होने वाली इस बेहद खास और पर्यावरण अनुकूल ट्रेन का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे।

पूरी तरह स्वदेशी सूझबूझ से बनी इस ट्रेन का खाका ‘डिजाइन्स एंड स्टैंडर्ड्स ऑर्गनाइजेशन’ ने तैयार किया है, जबकि इसकी मैन्युफैक्चरिंग चेन्नई की प्रसिद्ध ‘इंटीग्रल कोच फैक्टरी’ (ICF) में की गई है। कम दूरी के सफर को रफ्तार देने वाली यह ट्रेन एक बार में 2600 से अधिक मुसाफिरों को मंजिल तक पहुंचाएगी।

रफ्तार 140 किलोमीटर प्रति घंटा और किराया सिर्फ ₹5 से शुरू

भौगोलिक और तकनीकी लिहाज से बेहद मुफीद माने जाने वाले 89 किलोमीटर लंबे जींद-सोनीपत रेल खंड पर यह ट्रेन अपनी ताकत दिखाएगी। पटरियों पर इसकी अधिकतम रफ्तार 140 किलोमीटर प्रति घंटे तक मापी गई है, जो यात्रियों के समय की बड़ी बचत करेगी। रेलवे ने इस रूट पर शुरुआती तौर पर 4 से 5 स्टॉपेज तय किए हैं।

सबसे दिलचस्प बात यह है कि इस हाईटेक सफर के लिए आम आदमी को अपनी जेब ढीली नहीं करनी पड़ेगी। दैनिक यात्रियों और स्थानीय लोगों की सुविधा को देखते हुए इसका किराया महज 5 रुपये से लेकर 25 रुपये के बीच रखा गया है, जो बसों और अन्य साधनों के मुकाबले बेहद सस्ता और आरामदायक साबित होगा।

धुएं की जगह निकलेगी सिर्फ भाप, ‘नेट-जीरो’ मिशन को मिलेगी ताकत

पारंपरिक रूप से चलने वाली डीजल गाड़ियों के विपरीत इस ट्रेन के भीतर 1200 किलोवाट क्षमता का ‘हाइड्रोजन फ्यूल सेल प्रोपल्शन सिस्टम’ फिट किया गया है।

यह सिस्टम रासायनिक तौर पर हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के मिश्रण से खुद बिजली पैदा करता है। इस पूरी प्रक्रिया की सबसे खूबसूरत बात यह है कि इससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाला रत्ती भर भी कार्बन या जहरीला धुआं बाहर नहीं आता; साइलेंसर से केवल पानी की भाप और सामान्य गर्मी निकलती है। भारत ने साल 2070 तक देश को ‘नेट-जीरो’ यानी शून्य कार्बन उत्सर्जन वाला राष्ट्र बनाने का जो संकल्प लिया है, यह कदम उसी दिशा में मील का पत्थर माना जा रहा है।

दुनिया के टॉप-5 क्लब में शामिल हुआ भारत, जापान से आएगी ऊर्जा

इस कामयाबी के साथ ही भारत अब जर्मनी, फ्रांस, स्वीडन और चीन जैसे चुनिंदा देशों की कतार में शामिल हो जाएगा, जिनके पास हाइड्रोजन तकनीक से ट्रेन चलाने की महारत है। केंद्र सरकार की योजना ‘हाइड्रोजन फॉर हेरिटेज’ के तहत देश भर के विभिन्न खूबसूरत पहाड़ी और ऐतिहासिक रूटों पर ऐसी कुल 35 ट्रेनें उतारने की है।

एक अनुमान के मुताबिक, हर ट्रेन की लागत करीब 80 करोड़ रुपये है और संबंधित रूट के इंफ्रास्ट्रक्चर पर 70 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। हरियाणा में शुरू हो रहे इस पहले प्रोजेक्ट के लिए ईंधन की सप्लाई जापान की मदद से स्थापित 1 मेगावाट क्षमता वाले ‘पॉलिमर इलेक्ट्रोलाइट मेम्ब्रेन’ इलेक्ट्रोलाइजर से होगी, जो रोजाना करीब 430 किलोग्राम शुद्ध हाइड्रोजन तैयार करेगा।

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