July 8, 2026

Kaithal Canada News: कैथल के स्टार वॉलीबॉल खिलाड़ी राकेश कुमार की कनाडा में मौत, तेज बुखार के बाद फेल हुआ हार्ट

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Kaithal Canada News: कैथल के स्टार वॉलीबॉल खिलाड़ी राकेश कुमार की कनाडा में मौत, तेज बुखार के बाद फेल हुआ हार्ट

कैथल के स्टार वॉलीबॉल खिलाड़ी की कनाडा में मौत

Kaithal Canada News: हरियाणा के ग्रामीण अंचलों से हर साल हजारों युवा सुनहरे भविष्य और परिवार की किस्मत बदलने का सपना लेकर सात समंदर पार जाते हैं, लेकिन कभी-कभी वहां से ऐसी खबरें आती हैं जो पूरे इलाके को झकझोर कर रख देती हैं। कैथल जिले के गांव चुहड़ माजरा के एक ऐसे ही होनहार और उभरते हुए वॉलीबॉल खिलाड़ी राकेश कुमार (24) की कनाडा में अचानक हार्ट फेल होने से मौत हो गई। 12वीं पास करने के बाद साल 2020 में स्टडी बेस पर कनाडा गए राकेश की मौत की खबर जैसे ही गांव पहुंची, पूरे इलाके में मातम पसर गया। किसान माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल है, जिन्हें उम्मीद थी कि उनका बेटा परदेस में रहकर घर के दिन बहुरने का जरिया बनेगा।

तेज बुखार के बाद बिगड़ी तबीयत, अस्पताल में तोड़ा दम

मृतक राकेश के चाचा कृष्ण कुमार ने रुंधे गले से बताया कि राकेश पिछले छह सालों से कनाडा में अपने सगे बड़े भाई साहिल के साथ रह रहा था। दोनों भाइयों ने कड़ी मेहनत के बाद वहां स्थायी निवास (PR) भी हासिल कर लिया था। सब कुछ ठीक चल रहा था कि कुछ दिन पहले अचानक राकेश की तबीयत खराब हो गई और उसे बेहद तेज बुखार आ गया। भाई साहिल उसे तुरंत इलाज के लिए स्थानीय अस्पताल ले गया, लेकिन डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद इलाज के दौरान राकेश के दिल ने काम करना बंद कर दिया और उसकी मौत हो गई।

पंजाब की टीम का इकलौता हरियाणवी स्टार

राकेश सिर्फ पढ़ाई में ही नहीं, बल्कि खेल के मैदान में भी गांव और प्रदेश का नाम रोशन कर रहा था। वह शानदार वॉलीबॉल खिलाड़ी था। दिलचस्प और गर्व की बात यह थी कि राकेश पूरे हरियाणा का इकलौता ऐसा खिलाड़ी था, जिसका चयन पंजाब की राज्य स्तरीय वॉलीबॉल टीम में हुआ था। स्कूल के दिनों से ही वह पंजाब की टीम के लिए खेल रहा था और अपनी कप्तानी व खेल की बदौलत कई राज्य स्तरीय मुकाबले जीतकर कप और मेडल अपने नाम किए थे। गांव के खेल मैदान से लेकर कनाडा की धरती तक उसकी खेल प्रतिभा की चर्चा थी।

चार एकड़ के किसान पिता के अरमान टूटे

राकेश के पिता रामकुमार गांव में ही अपनी चार एकड़ जमीन पर खेती-बाड़ी कर परिवार का गुजारा चलाते हैं। बेटे को स्पोर्ट्स और पढ़ाई में आगे बढ़ता देख उन्होंने करीब 17 लाख रुपए का भारी-भरकम इंतजाम कर उसे विदेश भेजा था। मां सुदेश रानी घरेलू महिला हैं, जिनकी आंखें अब पथरा चुकी हैं। चाचा कृष्ण लाल ने बताया कि कानूनी औपचारिकताओं और लंबी दूरी के कारण राकेश का अंतिम संस्कार उसके भाई साहिल ने कनाडा में ही कर दिया है। चुहड़ माजरा गांव में पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाने के लिए रोजाना आसपास के गांवों से लोग पहुंच रहे हैं, लेकिन इस होनहार खिलाड़ी के चले जाने से खेल जगत और गांव को जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई नामुमकिन है।

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