July 17, 2026

Kurukshetra Crocodile Rescue: कुरुक्षेत्र के नरकातरी में 6 फुट लंबे मगरमच्छ का रेस्क्यू, खेतों में जाने से डर रहे थे किसान, आधे घंटे चला ऑपरेशन

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Kurukshetra Crocodile Rescue: कुरुक्षेत्र के नरकातरी में 6 फुट लंबे मगरमच्छ का रेस्क्यू, खेतों में जाने से डर रहे थे किसान, आधे घंटे चला ऑपरेशन

कुरुक्षेत्र के नरकातरी में 6 फुट लंबे मगरमच्छ का रेस्क्यू

Kurukshetra Crocodile Rescue: धर्मनगरी कुरुक्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में वन्य जीवों की आमद से एक बार फिर हड़कंप मच गया है। कुरुक्षेत्र जिले के नरकातरी गांव के पास से गुजरने वाली एक ड्रेन (नाले) से वन्य प्राणी विभाग और स्थानीय गोताखोरों की टीम ने 6 फुट लंबे एक विशालकाय मगरमच्छ को रेस्क्यू किया है। मंगलवार शाम को करीब आधे घंटे तक चले एक बेहद जोखिम भरे और सूझबूझ वाले ऑपरेशन के बाद इस भारी-भरकम मगरमच्छ को सुरक्षित काबू किया जा सका। इस रेस्क्यू के बाद ड्रेन के आसपास रहने वाले ग्रामीणों और अपनी फसलों की देखभाल करने वाले किसानों ने राहत की लंबी सांस ली है।

सरपंच की एक फोटो से हरकत में आई गोताखोरों की टीम

इस पूरे मामले की शुरुआत तब हुई जब नरकातरी गांव के सरपंच अनिल कुमार ने खेतों के पास ड्रेन में इस विशाल जीव को रेंगते हुए देखा। उन्होंने तुरंत इसकी सूचना मशहूर गोताखोर प्रगट सिंह को दी। शुरुआत में तो टीम को यकीन नहीं हुआ कि आबादी और खेतों के इतने करीब ड्रेन में मगरमच्छ हो सकता है, लेकिन जब सरपंच ने अपने मोबाइल से खींचकर मगरमच्छ की लाइव तस्वीरें भेजीं, तो टीम के होश उड़ गए। मामले की गंभीरता और खतरे को देखते हुए गोताखोर प्रगट सिंह अपनी टीम के साथ बिना वक्त गंवाए तुरंत मौके पर पहुंच गए।

आबादी के बिल्कुल पास था खतरा, वन्य विभाग ने संभाला मोर्चा

मगरमच्छ की मौजूदगी की खबर तुरंत वन्य प्राणी विभाग को भी दी गई। विभाग की तरफ से मुस्तैदी दिखाते हुए कर्मचारी कृष्ण और बलराम आवश्यक साजो-सामान के साथ मौके पर पहुंचे। चुनौती बड़ी थी क्योंकि मगरमच्छ जहां छिपा हुआ था, वह जगह रिहायशी आबादी और किसानों के खेतों के बिल्कुल करीब थी। जरा सी चूक किसी बड़े हादसे को दावत दे सकती थी। गोताखोरों और वन्य जीव कर्मियों ने मिलकर जाल और रस्सियों के सहारे मगरमच्छ को चारों तरफ से घेरा और करीब 30 मिनट की कड़ी मशक्कत के बाद उसे सुरक्षित तरीके से बांध लिया।

4 दिनों से थम गया था खेतों का काम, टला बड़ा हादसा

गोताखोर प्रगट सिंह ने बताया कि यह मगरमच्छ पिछले चार दिनों से इसी ड्रेन में लगातार देखा जा रहा था। इसके चलते खेतों में काम करने वाले किसान खौफ के साये में जीने को मजबूर थे। डर का आलम यह था कि कई किसानों ने अकेले अपने खेतों में जाना तक बंद कर दिया था, जिससे फसलों की सिंचाई का काम भी प्रभावित हो रहा था। गनीमत रही कि समय रहते ग्रामीणों की सतर्कता से इस जीव को पकड़ लिया गया, जिससे कोई अप्रिय घटना या हमला होने से पहले ही टल गया। रेस्क्यू के बाद वन्य जीव विभाग की टीम मगरमच्छ को गाड़ी में लादकर भौर सैंदा गांव स्थित मगरमच्छ प्रजनन केंद्र ले गई, जहां उसे प्राकृतिक माहौल में छोड़ दिया गया है।

SYL नहर में पहले भी दिख चुके हैं 12 फुट तक लंबे मगरमच्छ

कुरुक्षेत्र के इस इलाके के लिए मगरमच्छों का दिखना कोई नई बात नहीं है। इससे पहले भी सतलुज-यमुना लिंक (SYL) नहर और उससे जुड़े ड्रेनों में कई बार मगरमच्छ बाहर आते रहे हैं। करीब चार महीने पहले भी इसी क्षेत्र में 10 से 12 फुट लंबा एक बेहद विशालकाय मगरमच्छ देखा गया था। जानकारों का कहना है कि भौर सैंदा में मगरमच्छों का पुराना केंद्र होने और मानसून या जलस्तर बढ़ने के कारण ये जीव अक्सर संपर्क नहरों और ड्रेनों के रास्ते ग्रामीण इलाकों की तरफ रुख कर लेते हैं।

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